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कुंभ 2027 की तैयारियों के बीच जमीन अधिग्रहण पर पेच, किसानों को कोर्ट से राहत

नाशिक में 2027 सिंहस्थ कुंभमेले के लिए प्रस्तावित साधुग्राम की जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर किसानों को बॉम्बे हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने याचिकाकर्ता किसानों और उनकी संपत्तियों के खिलाफ अगली सुनवाई तक किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई पर रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर 2026 को होगी। हालांकि, कोर्ट का आदेश जमीन अधिग्रहण को पूरी तरह रद्द नहीं करता; अंतिम फैसला आगे की सुनवाई और प्रशासन की दलीलों के बाद होगा।

Neha Sharma21 अग. 2026, 10:00 AM IST
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कुंभ 2027 की तैयारियों के बीच जमीन अधिग्रहण पर पेच, किसानों को कोर्ट से राहत

नाशिक: आगामी सिंहस्थ कुंभमेले 2027 की तैयारियों के बीच नाशिक में साधुग्राम के लिए प्रस्तावित जमीन अधिग्रहण को लेकर चल रहे विवाद में किसानों को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने याचिकाकर्ता किसानों और उनकी संपत्तियों के खिलाफ किसी भी तरह की जबरन या दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। यह राहत अगली सुनवाई तक लागू रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर 2026 को होगी।


क्या है पूरा मामला?

नाशिक में 2027 में होने वाले सिंहस्थ कुंभमेले के मद्देनजर साधुग्राम और उससे जुड़ी सुविधाओं के लिए बड़ी मात्रा में जमीन की आवश्यकता बताई गई है। इसी उद्देश्य से प्रशासन ने कुछ किसानों की जमीन अधिग्रहित करने की प्रक्रिया शुरू की है। प्रभावित किसानों ने इस प्रक्रिया का विरोध करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनका मुख्य आरोप है कि उनकी ओर से दर्ज कराई गई कानूनी आपत्तियों पर उचित सुनवाई किए बिना प्रशासन ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी।


किसानों ने कोर्ट में क्या दलील दी?

याचिकाकर्ता किसानों का कहना है कि प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण से संबंधित नोटिस जारी किए, लेकिन उनकी आपत्तियों पर कानून के अनुसार सुनवाई का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। किसानों ने अदालत के सामने यह भी चिंता जताई कि यदि प्रशासन को आगे कार्रवाई करने की अनुमति दी जाती है, तो उनकी जमीन और संपत्ति का कब्जा लिया जा सकता है। इसी आशंका के चलते उन्होंने हाईकोर्ट से तत्काल अंतरिम संरक्षण मांगा था।


हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश

मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की संपत्तियों के खिलाफ coercive action यानी जबरन कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी। इसका अर्थ है कि अगली सुनवाई तक संबंधित याचिकाकर्ताओं की जमीन का जबरन कब्जा लेने या उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई करने की अनुमति नहीं होगी, जो उनकी संपत्ति के अधिकारों को प्रभावित करे। हालांकि, अदालत ने प्रशासन को किसानों की आपत्तियों पर कानून के अनुसार सुनवाई करने से नहीं रोका है। यानी जमीन अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया समाप्त नहीं हुई है; फिलहाल किसानों को केवल अंतरिम न्यायिक संरक्षण मिला है।


3 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

इस मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, नाशिक महानगरपालिका सहित संबंधित पक्षों को अदालत के निर्देशों के अनुसार अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया गया है। अगली सुनवाई में अदालत यह देख सकती है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसानों को उनकी आपत्तियां रखने और उन पर सुनवाई का उचित अवसर दिया गया था या नहीं।


किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

यह आदेश उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है जिनकी जमीन साधुग्राम और कुंभमेले से जुड़े विकास कार्यों के लिए प्रस्तावित अधिग्रहण के दायरे में आ सकती है। अंतरिम रोक से किसानों को फिलहाल अपनी जमीन पर तत्काल जबरन कार्रवाई के खतरे से राहत मिली है। साथ ही, यह मामला इस बड़े सवाल को भी सामने लाता है कि बड़े धार्मिक और सार्वजनिक आयोजनों के लिए जमीन अधिग्रहित करते समय भूमि मालिकों के कानूनी अधिकारों और प्रशासनिक प्रक्रिया का कितना पालन किया गया।


क्या जमीन अधिग्रहण रुक गया है?

पूरी तरह नहीं। हाईकोर्ट का वर्तमान आदेश अंतरिम प्रकृति का है। इसका मतलब यह नहीं है कि साधुग्राम के लिए जमीन अधिग्रहण हमेशा के लिए रद्द हो गया है। फिलहाल अदालत ने याचिकाकर्ताओं के खिलाफ जबरन कार्रवाई पर रोक लगाई है। प्रशासन कानूनी प्रक्रिया के तहत किसानों की आपत्तियों पर सुनवाई कर सकता है। अंतिम फैसला मामले की आगे की सुनवाई और अदालत के आदेशों पर निर्भर करेगा।


सिंहस्थ कुंभमेले की तैयारियों पर असर?

नाशिक में 2027 के सिंहस्थ कुंभमेले के लिए बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे और साधुग्राम से संबंधित तैयारियां चल रही हैं। ऐसे में जमीन अधिग्रहण को लेकर कानूनी विवाद प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है। एक तरफ सरकार और स्थानीय प्रशासन के सामने समय पर कुंभमेले की तैयारियां पूरी करने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी तरफ प्रभावित किसानों के भूमि अधिकार, उचित प्रक्रिया और मुआवजे से जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण हैं।


नाशिक के साधुग्राम जमीन अधिग्रहण मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश किसानों के लिए फिलहाल बड़ी राहत है। 3 सितंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि किसानों की जमीन पर जबरन कार्रवाई नहीं की जा सकती, लेकिन भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। अंतिम स्थिति अदालत में आगे होने वाली सुनवाई और संबंधित पक्षों की दलीलों पर निर्भर करेगी।