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22 मौत की सजा सुनाने वाले यूपी के जज की अदालत से करीब 100 मामले स्थानांतरित
उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में, एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज रवि कुमार दिवाकर से 97 से 100 गंभीर आपराधिक मामले दूसरे जजों को ट्रांसफर कर दिए गए हैं। यह फ़ैसला उनके उस निर्णय के बाद लिया गया है, जिसमें उन्होंने सिर्फ़ चार महीने के अंदर 10 मामलों में 22 लोगों को मौत की सज़ा सुनाई थी।
Kalpana Gautam21 अग. 2026, 08:12 PM IST

मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (Additional District and Sessions Judge) रवि कुमार दिवाकर की फास्ट-ट्रैक अदालत से करीब 100 लंबित आपराधिक मामलों को दूसरी अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया है। इनमें हत्या और ऐसे अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े मामले शामिल हैं, जिनमें मृत्युदंड या उम्रकैद का प्रावधान है। रिपोर्ट के अनुसार, दिवाकर की अदालत से कुल 97 लंबित केस फाइलें वापस लेकर जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार सिंह की अदालत को सौंप दी गई हैं। यह प्रशासनिक फैसला ऐसे समय हुआ है जब दिवाकर की अदालत ने पिछले करीब चार महीनों में 10 मामलों में 22 दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी।
वकीलों और पक्षकारों में चिंता
मुजफ्फरनगर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने बताया कि वकीलों और मुकदमे से जुड़े पक्षकारों के बीच इस बात को लेकर आशंका थी कि अदालत मृत्युदंड सुना सकती है। इसी पृष्ठभूमि में मामलों को दूसरी अदालत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में यह नहीं कहा गया है कि जज रवि कुमार दिवाकर के फैसलों को गलत पाए जाने या किसी न्यायिक कदाचार के कारण ये मामले उनसे हटाए गए हैं। मामले स्थानांतरित करने की प्रक्रिया को प्रशासनिक कार्रवाई बताया गया है। इसलिए केवल मामलों के स्थानांतरण से जज के खिलाफ किसी गलत काम का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
22 मौत की सजाओं का क्या मतलब?
सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा पर तुरंत अमल नहीं किया जा सकता। कानून के तहत ऐसे मामलों को उच्च न्यायालय के पास पुष्टि के लिए भेजना आवश्यक होता है। उच्च न्यायालय सजा की पुष्टि कर सकता है, उसे बदल सकता है, दोषसिद्धि में संशोधन कर सकता है या मामले का कानून के अनुसार अन्य तरीके से निपटारा कर सकता है। इसका अर्थ है कि दिवाकर की अदालत द्वारा सुनाई गई 22 मौत की सजाएं, 22 फांसी दिए जाने के बराबर नहीं हैं। इन सभी मामलों का अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय की समीक्षा और पुष्टि के बाद ही होगा।
आगे की सुनवाई
अब 97 लंबित मामलों की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार सिंह की अदालत में जारी रहेगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्थानांतरण का तत्काल प्रभाव यही है कि इन मामलों की सुनवाई नई अदालत में होगी।
