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Civil Judge बनने के लिए 3 नहीं, अब सिर्फ 1 साल की प्रैक्टिस! सुप्रीम कोर्ट ने Law Graduates को दी बड़ी राहत

जज बनने का सपना देख रहे Law Graduates के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा दरवाजा खोल दिया है। अब Civil Judge बनने के लिए 3 साल की Bar Practice नहीं, सिर्फ 1 साल की प्रैक्टिस जरूरी होगी। 21 अगस्त 2026 के इस बड़े फैसले में कोर्ट ने चयन के बाद 1 साल की Judicial Training और 1 साल की Clerkship का नया मॉडल भी तय किया है। यानी तीन साल का इंतजार कम हुआ, लेकिन practical experience की शर्त बरकरार रही।

Sonali21 अग. 2026, 08:12 PM IST
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Civil Judge बनने के लिए 3 नहीं, अब सिर्फ 1 साल की प्रैक्टिस! सुप्रीम कोर्ट ने Law Graduates को दी बड़ी राहत

नई दिल्ली: 

देश की निचली अदालतों में Civil Judge बनने की तैयारी कर रहे हजारों-लाखों Law Graduates और Judiciary Aspirants के लिए 21 अगस्त 2026 का दिन बेहद अहम साबित हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने entry-level judicial service यानी Civil Judge (Junior Division) में सीधी भर्ती के लिए अनिवार्य तीन साल की legal practice की व्यवस्था में बड़ा बदलाव कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने तीन साल की prior Bar Practice को घटाकर एक साल कर दिया है। लेकिन Court ने practical experience की जरूरत को खत्म नहीं किया। इसके बजाय चयन के बाद एक साल की intensive judicial training और उसके बाद एक साल की structured law clerkship का मॉडल तैयार किया गया है। यानी अब संदेश साफ है— “तीन साल की Bar Practice जरूरी नहीं, लेकिन courtroom और judicial work का practical experience जरूरी है।”

21 अगस्त 2026 को क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट ने Bhumika Trust v. Union of India एवं connected matters में review petitions पर फैसला सुनाया। पीठ में Chief Justice of India Surya Kant, Justice Augustine George Masih और Justice K. Vinod Chandran शामिल थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार फैसला majority judgment के रूप में आया, जबकि Justice K. Vinod Chandran ने dissent किया। यह वही मामला है जिसमें मई 2025 के फैसले के जरिए Civil Judge (Junior Division) की सीधी भर्ती के लिए न्यूनतम तीन साल की Bar Practice को अनिवार्य किया गया था। Review petitions में इसी शर्त को दोबारा विचार करने की मांग की गई थी।

सबसे बड़ा बदलाव क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने तीन साल की practice requirement को पूरी तरह समाप्त नहीं किया, बल्कि उसकी संरचना बदल दी।

1 अप्रैल 2027 के बाद जारी होने वाली भर्ती notifications के लिए:

1 साल की actual Bar Practice

↓

Judicial Service Examination

↓

Selection

↓

1 साल Intensive Training at State Judicial Academy

↓

1 साल Structured Law Clerkship

↓

Judicial Service

इस प्रकार Court ने पुराने तीन साल के practical-experience requirement को केवल एक साल की Bar Practice तक सीमित नहीं किया, बल्कि बाकी practical exposure को structured training और clerkship के माध्यम से पूरा करने का रास्ता बनाया है।

Training कैसी होगी?

चयनित उम्मीदवारों को तुरंत regular judicial officer के रूप में काम शुरू नहीं कराया जाएगा। उन्हें पहले “Trainee Judicial Officer” के रूप में एक साल की intensive training करनी होगी। यह training संबंधित State Judicial Academy में होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि नए उम्मीदवारों को judicial functioning, adjudication, court procedure, evidence, judgment writing और judicial ethics जैसे क्षेत्रों में structured exposure दिया जा सके। यानी Court ने यह मानने के बजाय कि तीन साल की सामान्य Bar Practice अपने आप किसी व्यक्ति को Judge बनने के लिए तैयार कर देती है, practical judicial training को institutionalise करने पर जोर दिया है।

Clerkship में भी बड़ा बदलाव

एक साल की training पूरी होने के बाद उम्मीदवारों को एक साल की structured law clerkship करनी होगी। इस एक साल को दो हिस्सों में बांटा गया है—

पहले 6 महीने — Principal District Judge या Higher Judicial Service के न्यायाधीशों की supervision में clerkship।

अगले 6 महीने — संबंधित High Court के sitting judge की supervision में clerkship।

इसका अर्थ यह है कि candidate को District Judiciary से लेकर High Court level तक judicial functioning को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

20 मई 2025 से 31 मार्च 2027 तक वालों के लिए सबसे बड़ी राहत

इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा transitional arrangement है।

जिन Civil Judge (Junior Division) recruitment notifications को 20 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच जारी किया गया है, उनके लिए Court ने तीन साल की practice requirement को लागू नहीं किया है। इस अवधि में सभी law graduates application कर सकते हैं। और खास बात यह है कि उन्हें उस deemed one-year practice के लिए अलग से practice certificate भी नहीं देना होगा। यानी इस transition period में law graduate के लिए स्थिति कुछ ऐसी होगी—

Law Degree

↓

Judicial Service Exam के लिए आवेदन

↓

Selection

↓

Trainee Judicial Officer

↓

1 साल Intensive Training

↓

1 साल Clerkship

इसलिए 2026 और 2027 के शुरुआती हिस्से में Judiciary Exam की तैयारी कर रहे candidates के लिए यह फैसला खास तौर पर महत्वपूर्ण है।

कोर्ट ने ऐसा क्यों किया?

यह विवाद केवल “3 साल बनाम 1 साल” का नहीं था। असल सवाल था—

क्या किसी युवा Law Graduate को सीधे Judicial Service में आने देना चाहिए या पहले उसे पर्याप्त courtroom experience लेना चाहिए? मई 2025 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने courtroom experience को judicial competence और maturity के लिए महत्वपूर्ण माना था। इस फैसले की पृष्ठभूमि में pre-2002 व्यवस्था को revive करने की बात भी सामने आई थी। लेकिन review proceedings में यह चिंता सामने आई कि अचानक तीन साल की practice requirement लागू होने से उन युवा कानून स्नातकों को कठिनाई हुई जिन्होंने पहले की eligibility व्यवस्था के आधार पर judicial examinations की तैयारी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसी hardship को ध्यान में रखते हुए transitional relief दिया और आगे के लिए तीन साल को एक साल कर दिया।

Court ने practical experience को खत्म नहीं, institutionalise किया

यही इस फैसले की सबसे महत्वपूर्ण बात है। सामान्य Bar Practice में किसी युवा वकील को मिलने वाला experience अलग-अलग हो सकता है। किसी को substantive litigation का अच्छा exposure मिल सकता है, जबकि किसी दूसरे को शुरुआती वर्षों में सीमित courtroom work ही मिले। इस पृष्ठभूमि में न्यायिक प्रशिक्षण को structured बनाने का विचार सामने आया। Law universities से लिए गए inputs और इस विवाद पर किए गए academic/legal research में भी यह सवाल उठा था कि क्या structured judicial academy training को अधिक प्रभावी practical preparation बनाया जा सकता है। नई व्यवस्था इसी सोच को judicial recruitment के framework में शामिल करती है।

क्या LLM करने से Practice Rule खत्म हो जाएगा?

नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने law में post-graduation को Bar Practice के equivalent मानने की मांग को स्वीकार नहीं किया। यानी केवल LLM या अन्य higher legal qualification हासिल कर लेने से practical legal experience की requirement अपने आप पूरी नहीं मानी जाएगी। यह distinction महत्वपूर्ण है—Academic qualification अलग है। Courtroom practice अलग है। और judicial training अलग है। सुप्रीम कोर्ट ने इन तीनों को एक-दूसरे का automatic substitute नहीं माना है।

PwD Candidates का मुद्दा भी इस मामले से जुड़ा था

इस मामले की सुनवाई के दौरान Persons with Disabilities यानी PwD candidates के लिए तीन साल की practice requirement में exemption का सवाल भी सुप्रीम कोर्ट के सामने आया था। जनवरी 2026 में Court ने इस मुद्दे पर High Courts और Law Universities/National Law Schools से suggestions मांगे थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि तीन साल की practice rule पर बहस केवल fresh graduates तक सीमित नहीं थी। इसमें accessibility, equal opportunity और अलग-अलग वर्गों के candidates के लिए judicial recruitment को अधिक inclusive बनाने के सवाल भी शामिल थे।

जुलाई 2026 में क्या हुआ था?

21 अगस्त के फैसले से पहले 28 जुलाई 2026 को Supreme Court में review petitions पर final hearing हुई थी और Court ने judgment reserve कर लिया था।

उस hearing में practice requirement के alternative के रूप में training-based models सहित विभिन्न सुझावों पर चर्चा हुई थी। इसके बाद 21 अगस्त को Court ने अपना फैसला सुनाया। इसलिए यह फैसला अचानक आया हुआ निर्णय नहीं था। इसके पीछे लंबे समय से चल रही judicial review process, law universities के inputs, High Courts की राय और विभिन्न stakeholders की दलीलें थीं।

क्या 2026 के Judiciary Aspirants को तुरंत फायदा होगा?

हां, लेकिन recruitment notification की तारीख देखना बेहद जरूरी है। 20 मई 2025 से 31 मार्च 2027 तक की transitional period वाली notifications के लिए law graduates को तीन साल की practice के आधार पर बाहर नहीं किया जाएगा। इसके बाद 1 अप्रैल 2027 से जारी होने वाली notifications के लिए सामान्य नियम के तहत कम से कम एक साल की actual legal practice आवश्यक होगी। इसलिए aspirants को अपने राज्य की Judicial Service notification जरूर देखनी चाहिए।

नई व्यवस्था का सबसे आसान Formula

2025-2027 Transitional Period

Law Graduate → Exam → Selection → 1 Year Training → 1 Year Clerkship

1 अप्रैल 2027 के बाद

Law Degree → 1 Year Actual Bar Practice → Judicial Service Exam → Selection → 1 Year Training → 1 Year Clerkship

यही इस पूरे फैसले का सबसे आसान सार है।

क्या Training और Clerkship के दौरान पैसा मिलेगा?

उपलब्ध रिपोर्टिंग के अनुसार trainee judicial officers को training period के दौरान remuneration मिलेगा, जो Judicial Magistrate First Class के gross remuneration के एक हिस्से के बराबर निर्धारित किया गया है। Clerkship के दौरान भी emoluments की व्यवस्था फैसले में बताई गई है। इससे नई व्यवस्था केवल “बिना वेतन की training” तक सीमित नहीं रहती, बल्कि चयनित candidates को formal trainee structure के भीतर रखा जाता है।

फैसले का Judicial Recruitment पर बड़ा असर

यह फैसला भारत की subordinate judiciary में recruitment philosophy को प्रभावित कर सकता है।

पहले focus था— “पहले लंबी Bar Practice, फिर Judicial Service।”

अब मॉडल अधिक balanced हो गया है— “कम prior practice + structured judicial training + supervised court exposure।”

इससे एक ओर युवा candidates के लिए entry barrier कम होगा, वहीं दूसरी ओर न्यायिक सेवा में आने वाले उम्मीदवारों को institutional practical training देने की व्यवस्था मजबूत होगी।

क्यों ऐतिहासिक है 21 अगस्त 2026 का फैसला?

क्योंकि यह केवल eligibility की अवधि कम करने का फैसला नहीं है। यह इस बात को भी बदलता है कि भारत में future Civil Judges को practical judicial experience कैसे दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने एक तरफ युवा Law Graduates के लिए तीन साल की बाध्यता कम की है और दूसरी तरफ judicial academy, District Judiciary और High Court level पर supervised training का formal structure बनाया है। यानी Court ने “practice या no practice” की बहस को एक नए सवाल में बदल दिया है—

“एक बेहतर Judge बनने के लिए practical experience किस तरीके से सबसे प्रभावी ढंग से दिया जाए?”

और इसी सवाल का जवाब है— 1 साल Bar Practice + 1 साल Judicial Training + 1 साल Structured Clerkship.

21 अगस्त 2026 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला Judiciary Aspirants के लिए बड़ी राहत है, लेकिन इसे केवल “3 साल की practice खत्म” कहना इस फैसले की पूरी तस्वीर नहीं बताता।

सही तस्वीर यह है कि Court ने तीन साल की prior Bar Practice को घटाकर एक साल कर दिया है। 20 मई 2025 से 31 मार्च 2027 की transitional अवधि में law graduates को तीन साल की practice requirement से राहत दी गई है। और future recruitment में चयनित candidates को एक साल की intensive State Judicial Academy training तथा एक साल की structured clerkship से गुजरना होगा। यानी अब Judge बनने की राह में तीन साल की अनिवार्य Bar Practice की जगह एक ज्यादा structured रास्ता सामने आया है— “1 साल Practice, 1 साल Training और 1 साल Clerkship।” युवा Law Graduates के लिए यह राहत है, लेकिन Supreme Court का संदेश भी उतना ही स्पष्ट है—न्यायिक पद सिर्फ परीक्षा पास करने से नहीं, बल्कि वास्तविक courtroom और judicial experience से जुड़ा हुआ पद है।