law-order
कॉलेज की किताबों से नहीं, कोर्टरूम से बनेगा असली वकील! Justice Sanjay Karol की Young Lawyers को बड़ी नसीहत- “जितना पढ़ोगे, उतना नहीं सीखोगे जितना अदालत में देखकर सीखोगे”
कानून की किताबों में धाराएं याद हो सकती हैं, लेकिन कानून की असली समझ अदालत की बहसों और न्यायिक प्रक्रिया के बीच ही विकसित होती है। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस संजय करोल ने युवा वकीलों को यही बड़ी सीख देते हुए कहा कि कॉलेज में Article 14 और Article 21 को कितनी भी बार पढ़ लें, उनकी वास्तविक व्याख्या और अदालत में application तभी समझ आएगी जब वकील नियमित रूप से कोर्टरूम में मौजूद रहेंगे। SCBA के विदाई समारोह में उन्होंने कहा कि युवा वकीलों की “real grooming” कोर्ट में होगी और उन्हें मिलने वाले हर छोटे-बड़े अवसर का पूरी ईमानदारी से इस्तेमाल करना चाहिए।

नई दिल्ली:
कानून की किताबें पढ़ना जरूरी है, लेकिन एक अच्छे वकील की असली ट्रेनिंग कोर्टरूम में होती है। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त हो रहे जस्टिस संजय करोल ने 21 अगस्त 2026 को Supreme Court Bar Association (SCBA) की ओर से आयोजित अपने विदाई समारोह में युवा वकीलों को यही महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि Article 14 और Article 21 को कॉलेज में कितना भी पढ़ लिया जाए, कानून को वास्तव में कैसे लागू और interpret करना है, इसकी समझ अदालत में नियमित रूप से जाने और मामलों को सुनने से ही विकसित होती है।
“Real Grooming कोर्टरूम में होगी”
युवा वकीलों को संबोधित करते हुए Justice Sanjay Karol ने कहा कि यदि कोई वकील कानून का गहरा जानकार बनना चाहता है, तो उसे कोर्ट में आना होगा। उनके मुताबिक कॉलेज में कानून की धाराएं पढ़ने से केवल सैद्धांतिक ज्ञान मिलता है, जबकि उसका वास्तविक अनुप्रयोग और interpretation कोर्टरूम में सीखने को मिलता है। उन्होंने विशेष रूप से Article 14 और Article 21 का उदाहरण देते हुए कहा कि इन प्रावधानों को पढ़ना अलग बात है, लेकिन उन्हें वास्तविक मामलों में कैसे लागू करना है और उनकी व्याख्या कैसे करनी है, यह अदालत में आकर ही समझ में आता है।
“जितनी मजबूत Bar, उतनी मजबूत Bench”
Justice Karol ने न्याय व्यवस्था में Bar की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि न्यायपालिका की ताकत एक मजबूत Bar से आती है। उन्होंने Bar को justice delivery system का “custodian” बताया और कहा कि जज आते-जाते रहते हैं, लेकिन Bar व्यवस्था का स्थायी हिस्सा है। उनका संदेश साफ था—“The stronger the Bar, the stronger the Bench.” उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और मजबूती के लिए मजबूत, जिम्मेदार और स्वतंत्र Bar जरूरी है।
युवा वकीलों से कहा- हर छोटे अवसर को भी पूरी तरह इस्तेमाल करें
Justice Karol ने युवा वकीलों से कहा कि उन्हें मिलने वाले हर अवसर का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए, चाहे वह अवसर कितना ही छोटा क्यों न हो। उन्होंने युवाओं को आत्मविश्वास के साथ कोर्ट में अपनी बात रखने और साथ ही Bench तथा वरिष्ठ वकीलों के प्रति शिष्टाचार बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवा वकील के लिए सबसे बड़ी बाधा अक्सर यही होती है कि वह अपने पैरों पर खड़े होकर अदालत में बोलने की शुरुआत करे। उन्होंने कहा कि अपने करियर के शुरुआती दौर में सभी ने इस चुनौती का सामना किया है।
सीनियर वकीलों से अपील- जूनियर्स के सपनों को टूटने न दें
Justice Karol ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं से भी युवा वकीलों को आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सीनियर वकीलों को अपने जूनियर्स का समर्थन करना चाहिए और उन्हें उनके सपनों से पीछे नहीं हटने देना चाहिए। उन्होंने अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने युवा वकीलों को amicus curiae के रूप में अवसर दिए तो यह किसी पर एहसान नहीं था, बल्कि वे इसे अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी मानते थे।
“हर केस के पीछे एक आम इंसान है”
Justice Karol ने अपने न्यायिक दृष्टिकोण को “broad substantial justice” के सिद्धांत से जोड़ते हुए कहा कि किसी भी मामले में केवल फाइल और कानूनी दलीलों को नहीं देखना चाहिए। न्यायाधीशों को उस व्यक्ति को भी ध्यान में रखना चाहिए जो उस मामले के पीछे खड़ा है।
उन्होंने कहा कि हर brief के पीछे एक आम आदमी होता है, जिसे न्याय की इस संस्था से बड़ी उम्मीद होती है। सुप्रीम कोर्ट उसके लिए अपनी आवाज उठाने का अंतिम मंच होता है।
Fali S. Nariman का किस्सा भी सुनाया
Justice Karol ने वरिष्ठ अधिवक्ता Fali S. Nariman से जुड़ा एक प्रसंग याद किया। उन्होंने बताया कि एक बार एक जज ने party-in-person के साथ कथित रूप से अनुचित व्यवहार किया था। उस समय Nariman खड़े हुए और उन्होंने जज से कहा कि उनका ऐसा व्यवहार सही नहीं था। Justice Karol ने इस प्रसंग का इस्तेमाल यह बताने के लिए किया कि मजबूत और स्वतंत्र Bar न्याय व्यवस्था के लिए क्यों जरूरी है।
युवा वकीलों की तारीफ- “उन्होंने नई dimensions दिखाईं”
Justice Karol ने अपने सामने पेश हुए युवा वकीलों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि युवा सदस्यों ने प्रभावी submissions दिए और कई मामलों के नए dimensions को समझने में उनकी मदद की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युवा वकीलों को अवसर मिलने पर पीछे नहीं हटना चाहिए, क्योंकि कोर्ट में सक्रिय भागीदारी ही उनके professional grooming का अहम हिस्सा है।
Mediation पर भी बड़ा संदेश
Justice Karol ने mediation को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने बताया कि उन्होंने judges को mediators के रूप में प्रशिक्षित करने का अनुरोध किया था और स्वयं 23 अगस्त 2026 को mediation training लेने वाले पहले judges में शामिल होने की बात कही। उन्होंने Supreme Court की “Samadhan Samaroh” पहल की भी सराहना की और Justice P.S. Narasimha के प्रयासों का उल्लेख किया। Supreme Court की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार Samadhan Samaroh के तहत 21 से 23 अगस्त 2026 तक विशेष Lok Adalat आयोजित की जा रही है।
CJI Surya Kant ने भी की Justice Karol की तारीफ
Justice Karol के विदाई समारोह में Chief Justice of India Surya Kant ने भी उनके युवा वकीलों को प्रोत्साहित करने की शैली की प्रशंसा की। CJI ने कहा कि Justice Karol युवा वकीलों की growth और nurturing को लेकर हमेशा attentive रहे और कई युवा वकीलों को उनके सामने amicus के रूप में काम करने का अवसर मिला।
कब हुआ कार्यक्रम और क्या था संदेश?
यह विदाई समारोह 21 अगस्त 2026 को Supreme Court Bar Association की ओर से आयोजित किया गया। Justice Sanjay Karol के लिए यह उनके सुप्रीम कोर्ट कार्यकाल के समापन से पहले का महत्वपूर्ण अवसर था। उनका मुख्य संदेश तीन बातों पर केंद्रित रहा—युवा वकील नियमित रूप से कोर्ट आएं, हर अवसर का पूरा इस्तेमाल करें और Bar की गरिमा एवं Bench के प्रति शिष्टाचार बनाए रखें।
