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MD Geriatric Medicine डॉक्टरों के लिए दिल्ली HC का बड़ा फैसला! DM Super-Speciality का रास्ता खोलने का NMC को निर्देश
बुजुर्ग मरीजों के इलाज में विशेषज्ञता रखने वाले MD Geriatric Medicine डॉक्टरों के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा रास्ता खोल दिया है। Justice Jasmeet Singh ने कहा कि किसी speciality में infrastructure, teaching staff या doctors की कमी होना, उसी field के qualified doctors को आगे DM Super-Speciality करने से रोकने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने National Medical Commission (NMC) को MD Geriatric Medicine को DM specialisations के लिए eligible feeder qualification के रूप में शामिल करने के मुद्दे पर दोबारा विचार करने और जरूरी कदम जल्द उठाने का निर्देश दिया है।

नई दिल्ली:
60 साल से अधिक उम्र के मरीजों के इलाज में विशेषज्ञता रखने वाले डॉक्टरों के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा रास्ता खोल दिया है। कोर्ट ने National Medical Commission (NMC) को निर्देश दिया है कि MD (Geriatric Medicine) को DM Super-Speciality Courses के लिए eligible feeder qualification के रूप में शामिल करने पर दोबारा विचार किया जाए। Justice Jasmeet Singh ने कहा कि infrastructure, teaching staff, clinical material या अस्पतालों की कमी को आधार बनाकर MD Geriatric Medicine कर चुके डॉक्टरों को super-specialisation और बेहतर career prospects से वंचित करना पर्याप्त कारण नहीं है। यह मामला NEET-SS और INI-SS के जरिए DM super-speciality courses में प्रवेश से जुड़ा है। याचिकाकर्ता डॉक्टरों का कहना था कि वे MD Geriatric Medicine होने के बावजूद medicine-related DM courses के लिए eligible नहीं थे। कोर्ट ने NMC के तर्कों को अपर्याप्त मानते हुए मामले पर दोबारा विचार करने और MD (Geriatric Medicine) को eligible feeder qualification में शामिल करने के लिए आवश्यक कदम जल्द उठाने का निर्देश दिया।
आखिर विवाद क्या था?
कई MD (Geriatric Medicine) डॉक्टरों ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। उनका कहना था कि Geriatric Medicine को DM specialisation के लिए eligible broad speciality/feeder qualification की सूची से बाहर रखा गया है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने 2018 से लगातार संबंधित authorities के सामने representations दिए, लेकिन उनकी मांग पर प्रभावी निर्णय नहीं लिया गया। मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह था कि AIIMS, जो INI-SS के जरिए DM courses में admission प्रक्रिया संचालित करता है, MD Geriatric Medicine के उम्मीदवारों को संबंधित DM courses के लिए परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दे रहा था।
NMC ने MD Geriatric Medicine को बाहर रखने की क्या वजह बताई?
National Medical Commission ने अपने जवाब में मुख्य रूप से infrastructure और training facilities से जुड़े कारण बताए। NMC का कहना था कि Geriatric Medicine के क्षेत्र में पर्याप्त physical infrastructure, teaching staff, clinical material और hospitals उपलब्ध नहीं हैं। इसी आधार पर MD Geriatric Medicine को DM super-speciality courses के लिए feeder qualification के रूप में उपयुक्त नहीं माना गया था। लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट इस दलील से सहमत नहीं हुआ।
दिल्ली HC ने कहा- डॉक्टरों की कमी है तो डॉक्टर बढ़ाइए
Justice Jasmeet Singh ने कहा कि अगर authorities को लगता है कि Geriatric Medicine में पर्याप्त संख्या में doctors उपलब्ध नहीं हैं और 60 वर्ष से अधिक उम्र की आबादी के लिए specialised care की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है, तो इसका समाधान doctors की संख्या बढ़ाना होना चाहिए। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी speciality में doctors की कमी को उसी speciality के MD doctors को आगे DM super-specialisation करने से रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत के अनुसार, यह स्थिति डॉक्टरों के career और professional advancement को अनावश्यक रूप से सीमित करेगी।
‘Infrastructure कम है’ तो अवसर क्यों रोकें?
कोर्ट ने NMC के counter-affidavit में दिए गए कारणों को पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने कहा कि authorities द्वारा बताए गए कारण MD Geriatric Medicine रखने वाले candidates को DM Super-Speciality Courses में आगे बढ़ने के अवसर से वंचित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि विभागाध्यक्षों की टिप्पणियों से यह संकेत मिलता है कि Geriatric Medicine अभी उस स्तर तक विकसित नहीं हुई है, जिससे 60 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों की जरूरतों को पूरी तरह पूरा किया जा सके। लेकिन कोर्ट ने इसी कमी को doctors के लिए अवसर बंद करने का कारण मानने से इनकार कर दिया।
2019 के दस्तावेजों पर भी कोर्ट ने उठाया सवाल
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह भी महत्वपूर्ण तथ्य नोट किया कि AIIMS द्वारा relied upon documents वर्ष 2019 के थे। अदालत ने कहा कि इन documents को तैयार हुए सात साल से अधिक समय बीत चुका है। ऐसे में इतने पुराने material के आधार पर आज MD Geriatric Medicine doctors को DM specialisation से बाहर रखना उचित नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने authorities को मौजूदा परिस्थितियों और वर्तमान medical education landscape को ध्यान में रखते हुए मामले पर दोबारा विचार करने को कहा।
NEET-SS और INI-SS में क्या बदलेगा?
इस आदेश का सीधा असर उन MD Geriatric Medicine doctors पर पड़ सकता है जो DM level पर super-specialisation करना चाहते हैं। NEET-SS और INI-SS देश में विभिन्न DM/MCh super-speciality courses में admission के प्रमुख रास्ते हैं। यदि MD Geriatric Medicine को संबंधित DM courses के लिए feeder qualification के रूप में शामिल किया जाता है, तो eligible candidates इन entrance examinations के जरिए super-speciality education का रास्ता अपना सकेंगे। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि हाईकोर्ट ने स्वयं किसी particular candidate को किसी DM course में admission देने का आदेश नहीं दिया है। कोर्ट ने NMC को eligibility framework पर दोबारा विचार कर MD (Geriatric Medicine) को eligible feeder qualification के रूप में शामिल करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा है।
बुजुर्गों की बढ़ती जरूरत के बीच क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?
Geriatric Medicine विशेष रूप से elderly population की complex healthcare needs पर केंद्रित speciality है। उम्र बढ़ने के साथ मरीजों में कई chronic diseases, cognitive problems, frailty और multiple medications जैसी जटिलताएं एक साथ सामने आ सकती हैं। भारत में elderly healthcare की बढ़ती जरूरत के बीच इस speciality में trained doctors की संख्या बढ़ाना महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल के वर्षों में geriatric oncology जैसे क्षेत्रों में भी specialised clinical guidelines और research का विस्तार हुआ है। ऐसे में दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला medical education और specialised elderly care दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
कोर्ट का बड़ा संदेश
फैसले का मूल संदेश यह है कि किसी medical speciality में infrastructure या manpower की कमी को दूर करने के लिए doctors को उस field में आगे बढ़ने से रोकना समाधान नहीं हो सकता। अगर specialists की कमी है, तो policy makers को training capacity, seats, faculty और clinical infrastructure बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए।
किस जज ने सुनाया फैसला?
इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट के Justice Jasmeet Singh ने की। मामले का शीर्षक Kartik Mittal & Ors. v. National Medical Commission है। फैसला 2026 LiveLaw (Del) 777 के रूप में रिपोर्ट किया गया है।
कोर्ट ने क्या निर्देश दिया?
दिल्ली हाईकोर्ट ने respondent authority को निर्देश दिया कि MD (Geriatric Medicine) को DM specialisations के लिए eligible qualification के रूप में शामिल करने के मुद्दे पर दोबारा विचार किया जाए और आवश्यक कार्रवाई expeditiously की जाए। इस निर्देश के साथ अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला MD Geriatric Medicine कर चुके डॉक्टरों के लिए बड़ा राहत वाला कदम है। कोर्ट ने साफ किया कि infrastructure या specialists की कमी को डॉक्टरों के career progression का रास्ता रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता। अब NMC को इस qualification को DM super-speciality courses के eligible feeder qualifications में शामिल करने के मुद्दे पर दोबारा विचार करना होगा। खास बात यह है कि अदालत ने medical education policy को केवल उपलब्ध infrastructure की कमी के आधार पर सीमित करने के बजाय doctors की संख्या और training opportunities बढ़ाने की दिशा में सोचने का संकेत दिया है।
