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गोरखपुर में 980 पुराने लुटेरों पर पुलिस की नजर, पिपराइच में सबसे ज्यादा 96 नाम

गोरखपुर पुलिस ने जिले में लूट की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुराने आपराधिक रिकॉर्ड वाले 980 लोगों की सूची तैयार की है। एसएसपी के निर्देश पर 28 थाना क्षेत्रों में चिह्नित इन लोगों की वर्तमान स्थिति, रोजगार, पता और गतिविधियों का सत्यापन कराया जाएगा। पिपराइच में सबसे अधिक 96 नाम हैं, जबकि गुलरिहा में 76 और चिलुआताल में 71 लोगों को सूची में शामिल किया गया है।

sd22 अग. 2026, 02:05 PM IST
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गोरखपुर में 980 पुराने लुटेरों पर पुलिस की नजर, पिपराइच में सबसे ज्यादा 96 नाम
गोरखपुर (Gorakhpur) . जिले में लूट की घटनाओं को रोकने और अपराध की पुनरावृत्ति पर लगाम लगाने के लिए गोरखपुर पुलिस ने पुराने लूट के मामलों से जुड़े लोगों की निगरानी बढ़ाने की तैयारी की है। पुलिस ने जिले के 28 थाना क्षेत्रों से कुल 980 ऐसे लोगों को चिह्नित किया है, जिनके नाम पुराने आपराधिक रिकॉर्ड में लूट से जुड़े रहे हैं। पुलिस का उद्देश्य यह पता लगाना है कि सूची में शामिल लोग वर्तमान में क्या कर रहे हैं और इनमें से कौन सामान्य जीवन व्यतीत कर रहा है। साथ ही ऐसे लोगों की पहचान भी की जाएगी, जिनकी गतिविधियां दोबारा अपराध की ओर बढ़ने का संकेत देती हैं।
पिपराइच में सबसे ज्यादा 96 नाम
थाना क्षेत्रवार तैयार सूची में पिपराइच 96 नामों के साथ सबसे ऊपर है। इसके बाद गुलरिहा में 76 और चिलुआताल में 71 लोगों को निगरानी सूची में रखा गया है।
इसके अलावा रामगढ़ताल में 55, खोराबार में 52, शाहपुर में 49, पीपीगंज में 45 और बड़हलगंज में 45 नाम शामिल हैं। गोला में 41 और गगहा में 40 लोगों को सूची में चिह्नित किया गया है।
बीट सिपाही और हल्का दारोगा करेंगे सत्यापन
पुलिस की योजना के अनुसार संबंधित थाना प्रभारी के साथ बीट सिपाही और हल्का दारोगा सूची में शामिल लोगों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचकर वर्तमान पता और स्थिति का सत्यापन भी करेंगे। सत्यापन के दौरान यह जानकारी जुटाई जाएगी कि संबंधित व्यक्ति वर्तमान में कहां रह रहा है, उसका रोजगार या व्यवसाय क्या है और उसकी आर्थिक व सामाजिक गतिविधियां सामान्य हैं या नहीं। जरूरत के अनुसार उसके संपर्क में रहने वाले लोगों और गतिविधियों की भी जानकारी जुटाई जा सकती है।
संदिग्ध गतिविधि मिलने पर होगी कार्रवाई
पुलिस की निगरानी का उद्देश्य केवल पुराने रिकॉर्ड खंगालना नहीं है। यदि सत्यापन के दौरान किसी व्यक्ति की गतिविधियां संदिग्ध मिलती हैं या उसके दोबारा अपराध में सक्रिय होने के संकेत सामने आते हैं, तो पुलिस नियमानुसार कार्रवाई कर सकती है। पुलिस का मानना है कि पुराने आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की लगातार निगरानी से संभावित अपराधों की समय रहते जानकारी मिल सकती है और लूट जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने में मदद मिलेगी।
थाना क्षेत्रवार कितने नाम
पिपराइच: 96
गुलरिहा: 76
चिलुआताल: 71
रामगढ़ताल: 55
खोराबार: 52
शाहपुर: 49
पीपीगंज: 45
बड़हलगंज: 45
गोला: 41
गगहा: 40
राजघाट: 38
तिवारीपुर: 38
गोरखनाथ: 38
गीडा: 31
चौरीचौरा: 31
कैंट: 30
एम्स: 26
कोतवाली: 22
कैंपियरगंज: 22
झंगहा: 15
सहजनवा: 9
हरपुर-बुदहट: 9
महत्वपूर्ण बात: यहां 980 लोगों को “लुटेरे” कहने का मतलब यह नहीं है कि सभी लोग वर्तमान समय में लूट की घटनाओं में सक्रिय हैं। यह संख्या पुलिस द्वारा पुराने रिकॉर्ड और निगरानी के लिए चिह्नित लोगों की है। सूची में शामिल किसी व्यक्ति की वर्तमान आपराधिक सक्रियता अलग से सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।