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यमुना फ्लडप्लेन केस में Art of Living को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत! NGT का फैसला रद्द, ₹5 करोड़ वापस करने का आदेश
यमुना फ्लडप्लेन पर 2016 में हुए Art of Living के World Culture Festival को लेकर करीब एक दशक से चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा उलटफेर कर दिया है। कोर्ट ने NGT का 2017 का फैसला रद्द करते हुए Art of Living से जुड़े संगठन को बड़ी राहत दी और जमा कराई गई ₹5 करोड़ की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वापस करने का आदेश दिया। हालांकि, कोर्ट ने यमुना फ्लडप्लेन की rehabilitation जारी रखने को कहा है—यानी राहत Art of Living को मिली है, लेकिन यमुना की ecological recovery पर काम जारी रहेगा।

नई दिल्ली:
करीब 10 साल पुराने यमुना फ्लडप्लेन विवाद में Art of Living से जुड़े संगठन Vyakti Vikas Kendra India को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने National Green Tribunal (NGT) के दिसंबर 2017 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें 2016 के World Culture Festival के कारण यमुना फ्लडप्लेन को हुए नुकसान के लिए संगठन को जिम्मेदार ठहराया गया था। कोर्ट ने Delhi Development Authority (DDA) को संगठन द्वारा जमा कराई गई ₹5 करोड़ की environmental compensation वापस करने का निर्देश दिया है। साथ ही यमुना फ्लडप्लेन की rehabilitation का काम जारी रखने को कहा गया है।
Justice Satish Chandra Sharma और Justice N. Kotiswar Singh की Bench का फैसला
यह फैसला 22 अगस्त 2026 को Justice Satish Chandra Sharma और Justice N. Kotiswar Singh की Bench ने Vyakti Vikas Kendra India v. Manoj Misra (Dead) & Ors. मामले में सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने appeal स्वीकार करते हुए NGT का 2017 का judgment set aside कर दिया और ₹5 करोड़ वापस करने का निर्देश दिया। हालांकि विस्तृत judgment अभी उपलब्ध नहीं है, इसलिए फैसले की पूरी legal reasoning detailed order आने के बाद स्पष्ट होगी।
2016 में आखिर हुआ क्या था?
11 से 13 मार्च 2016 के बीच दिल्ली में Yamuna floodplain पर World Culture Festival आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के लिए बड़े पैमाने पर temporary infrastructure तैयार किया गया था। इसमें roads, ramps, pontoon bridges और अन्य structures बनाए गए थे। इसी construction को लेकर environmental concerns सामने आए थे। आरोप था कि construction और आयोजन की तैयारियों से floodplain की natural topography, wetlands, biodiversity और groundwater recharge system प्रभावित हुआ। इस विवाद को लेकर NGT में याचिका दाखिल की गई थी।
NGT ने ₹5 करोड़ जमा कराने का आदेश क्यों दिया था?
मार्च 2016 में festival शुरू होने से ठीक पहले NGT ने आयोजन को कुछ शर्तों के साथ आगे बढ़ने की अनुमति दी थी। इसी दौरान ₹5 करोड़ environmental compensation के रूप में जमा कराने का निर्देश दिया गया था। यह रकम बाद में environmental damage के final assessment के आधार पर adjust की जानी थी।
शुरुआत में ₹25 लाख जमा किए गए थे और बाकी रकम जमा कराने के लिए समय दिया गया था। बाद में पूरी ₹5 करोड़ की राशि जमा कर दी गई।
NGT ने 2017 में क्या कहा था?
दिसंबर 2017 में NGT ने expert committee की findings के आधार पर Art of Living से जुड़े संगठन को Yamuna floodplain को हुए नुकसान के लिए responsible माना था। हालांकि Tribunal ने उस समय कोई अलग से अतिरिक्त ₹5 करोड़ का fine नहीं लगाया था। पहले से जमा ₹5 करोड़ को ही floodplain restoration में इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया था। NGT ने DDA को floodplain की स्थिति का assessment करने और restoration की cost निर्धारित करने के निर्देश भी दिए थे।
2017 के order में यह व्यवस्था भी थी कि अगर restoration cost ₹5 करोड़ से अधिक होती है तो अतिरिक्त रकम recover की जा सकती है, जबकि restoration cost कम होने पर बची राशि वापस की जा सकती है।
Expert Committee ने क्या पाया था?
मामले की जांच के लिए NGT ने एक expert committee बनाई थी। Committee ने event site और आसपास के floodplain क्षेत्रों का निरीक्षण किया था। रिपोर्ट में floodplain की physical condition, wetlands, biodiversity और ecological impact को लेकर गंभीर observations सामने आए थे। NGT ने बाद में इन findings को अपने final decision का आधार बनाया था।एक महत्वपूर्ण विवाद यह भी था कि environmental damage का assessment किस methodology से किया गया।
Art of Living ने assessment और satellite imagery के इस्तेमाल पर सवाल उठाए थे। NGT ने हालांकि कहा था कि satellite imagery का इस्तेमाल field inspection के supplementary material के रूप में किया गया था।
Art of Living ने Supreme Court में क्या चुनौती दी?
Art of Living से जुड़े संगठन ने NGT के findings को Supreme Court में चुनौती दी।
मुख्य सवालों में यह शामिल था कि:
- क्या event site को स्पष्ट रूप से floodplain के रूप में demarcate किया गया था?
- क्या festival से हुए environmental damage की वैज्ञानिक और प्रत्यक्ष assessment हुई थी?
- क्या damage सीधे event की activities से attributable था?
- जब सरकारी authorities ने permissions दी थीं, तो liability केवल आयोजक पर क्यों डाली गई?
इन मुद्दों को लेकर organisation ने NGT के decision को challenge किया था।
Supreme Court ने अब क्या किया?
Supreme Court ने appeal allow कर दी।
इसके साथ:
- NGT का दिसंबर 2017 का judgment set aside किया गया।
- DDA को ₹5 करोड़ वापस करने का निर्देश दिया गया।
- Yamuna floodplain rehabilitation का काम जारी रखने को कहा गया।
- विस्तृत judgment बाद में उपलब्ध होगा।
सबसे अहम बात: ₹5 करोड़ वापस, लेकिन Restoration बंद नहीं
इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि Yamuna floodplain को restore करने की जरूरत खत्म हो गई है।
Court ने ₹5 करोड़ की environmental compensation वापस करने का निर्देश दिया है, लेकिन DDA को floodplain rehabilitation का काम जारी रखने को भी कहा है।
यानी इस मामले में दो अलग-अलग चीजें हैं—एक तरफ Art of Living से जुड़ी ₹5 करोड़ की liability, जिसे Supreme Court ने फिलहाल खत्म कर दिया; दूसरी तरफ Yamuna floodplain की ecological rehabilitation, जिसे जारी रखने का निर्देश दिया गया है।
DDA की भूमिका भी सवालों में रही
यह विवाद सिर्फ Art of Living की भूमिका तक सीमित नहीं था। NGT ने 2017 में permissions और regulatory oversight के लिए DDA तथा Delhi Pollution Control Committee की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे। इससे मामला और महत्वपूर्ण हो गया था, क्योंकि एक तरफ environmental damage की जिम्मेदारी आयोजक पर तय की गई, वहीं दूसरी तरफ सरकारी authorities द्वारा permission दिए जाने का प्रश्न भी मौजूद था।
यह मामला इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
यह केस भारत में environmental litigation के कई महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाता है:
क्या किसी आयोजन से ecological damage की liability तय करने के लिए direct scientific evidence जरूरी है? Environmental damage का baseline कैसे तय किया जाएगा? सरकारी permission मिलने के बावजूद आयोजक की liability कितनी होगी? और सबसे महत्वपूर्ण—अगर environmental restoration जरूरी है, तो उसकी cost कौन वहन करेगा? इन सवालों पर Supreme Court का detailed judgment आने के बाद इस मामले का कानूनी महत्व और स्पष्ट होगा।
