politics

चवन्नी से रुपया’ बयान पर यूपी की सियासत गरम: जयंत चौधरी का पलटवार, मायावती ने मांगी माफी; अखिलेश ने दिया जवाब

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय लोकदल (RLD) प्रमुख जयंत चौधरी ने इस टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे जाट समाज के सम्मान से जोड़ दिया। बसपा प्रमुख मायावती ने भी अखिलेश यादव से माफी मांगने की मांग की। जवाब में अखिलेश यादव ने RLD और भाजपा के गठबंधन पर सवाल उठाते हुए पलटवार किया। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस बयानबाजी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

sd22 अग. 2026, 04:55 PM IST
खबर शेयर करें:
चवन्नी से रुपया’ बयान पर यूपी की सियासत गरम: जयंत चौधरी का पलटवार, मायावती ने मांगी माफी; अखिलेश ने दिया जवाब

लखनऊ/मेरठ: क्या है पूरा विवाद?

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव के एक बयान ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। अखिलेश यादव ने अपने एक बयान में गठबंधन की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि “चवन्नी को रुपया बना दिया”। उनके इस बयान को राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख जयंत चौधरी पर राजनीतिक तंज के तौर पर देखा गया।

हालांकि, अखिलेश ने बयान में जयंत चौधरी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया था, लेकिन सपा और RLD के पुराने राजनीतिक संबंधों के संदर्भ में इसे जयंत से जोड़कर देखा गया।

जयंत चौधरी ने जताई आपत्ति

अखिलेश यादव के बयान पर जयंत चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि राजनीतिक विरोध के दौरान किसी समुदाय को निशाना बनाना उचित है या नहीं। जयंत ने टिप्पणी को जाट समाज के सम्मान से जोड़ते हुए अखिलेश पर राजनीतिक अहंकार का आरोप लगाया। जयंत की प्रतिक्रिया का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि RLD की राजनीति का मजबूत आधार पश्चिमी उत्तर प्रदेश और चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत से जुड़ा रहा है।

mayavati.avif
Image caption

मायावती ने अखिलेश से मांगी माफी

विवाद में बसपा प्रमुख मायावती की एंट्री के बाद मामला और गरमा गया। मायावती ने अखिलेश यादव के बयान को आपत्तिजनक बताते हुए उनसे माफी मांगने की मांग की।

मायावती ने इसे केवल जयंत चौधरी से जुड़ा मामला नहीं माना, बल्कि जाट समाज और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के सम्मान से जोड़कर अखिलेश पर निशाना साधा।

अखिलेश यादव का पलटवार

जयंत चौधरी और मायावती की आलोचना के बाद अखिलेश यादव ने भी पलटवार किया। उन्होंने RLD और भाजपा के मौजूदा राजनीतिक संबंधों को निशाने पर लेते हुए 120 सीटों का मुद्दा उठाया। अखिलेश ने सवाल खड़ा किया कि अगर भाजपा और RLD के बीच इतना मजबूत राजनीतिक तालमेल है तो भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में RLD को कितनी सीटें देती है। इस बयान को 2027 के संभावित सीट बंटवारे और गठबंधन की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

सपा-RLD रिश्तों का बदला राजनीतिक समीकरण

इस विवाद की पृष्ठभूमि में सपा और RLD के पुराने गठबंधन को समझना जरूरी है। दोनों दलों ने 2022 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा था। उस दौरान RLD ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। बाद में दोनों दल अलग राजनीतिक खेमों में चले गए। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले जयंत चौधरी NDA के साथ आ गए। इसके बाद सपा और RLD के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ी। इसी बदले हुए समीकरण के बीच अखिलेश यादव की टिप्पणी और जयंत चौधरी की प्रतिक्रिया सामने आई है।

पश्चिमी यूपी की राजनीति पर नजर

इस पूरे विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू पश्चिमी उत्तर प्रदेश है। क्षेत्र में जाट मतदाताओं की राजनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। RLD लंबे समय से इस क्षेत्र में जाट-किसान राजनीति और चौधरी चरण सिंह की विरासत से अपनी पहचान जोड़ती रही है। यही वजह है कि जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव की टिप्पणी को सीधे जाट समाज के सम्मान से जोड़कर जवाब दिया। हालांकि, किसी एक राजनीतिक बयान के आधार पर पूरे समुदाय की प्रतिक्रिया या चुनावी रुख का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

2027 चुनाव से पहले बढ़ी सियासी बयानबाजी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच चुनावी तैयारियां तेज हो चुकी हैं। सपा जहां अपने सामाजिक गठजोड़ को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दल भी अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में राजनीतिक आधार मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में अखिलेश-जयंत विवाद को केवल व्यक्तिगत बयानबाजी के तौर पर नहीं देखा जा रहा। इसमें गठबंधन की विश्वसनीयता, पश्चिमी यूपी की राजनीति और आगामी सीट बंटवारे जैसे मुद्दे भी जुड़े हुए हैं।

राजनीतिक संदेश क्या है?

इस विवाद से फिलहाल तीन बड़े राजनीतिक संदेश सामने आते हैं:

  • सपा और RLD के पुराने रिश्तों में आई दूरी अब सार्वजनिक बयानबाजी में भी दिखाई दे रही है।
  • पश्चिमी यूपी और जाट मतदाताओं को लेकर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है।
  • 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर गठबंधन और सीट बंटवारे की राजनीति आने वाले महीनों में और महत्वपूर्ण हो सकती है।

निष्कर्ष

अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान ने यूपी की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। जयंत चौधरी के पलटवार और मायावती की प्रतिक्रिया के बाद मुद्दा सपा बनाम RLD की राजनीतिक लड़ाई से आगे बढ़ गया है। वहीं, अखिलेश का 120 सीटों वाला जवाब इसे सीधे भाजपा-RLD गठबंधन और 2027 के चुनावी समीकरणों से जोड़ रहा है।

हालांकि, इस विवाद का वास्तविक चुनावी असर अभी तय करना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनाव से पहले गठबंधन, सामाजिक समीकरण और पश्चिमी यूपी की राजनीति आने वाले समय में प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल रहने वाली है।