मुंबई की लोकल ट्रेन सेवा को लेकर रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। रेल मंत्रालय ने मुंबई उपनगरीय रेलवे के लिए 238 नई AC EMU रेक के निर्माण को प्राथमिकता दी है। इन ट्रेनों का निर्माण भारतीय रेलवे की तीन प्रमुख उत्पादन इकाइयों में किया जाएगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह कदम मुंबई अर्बन ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट यानी MUTP के तहत तैयार किए जा रहे इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ समय पर रोलिंग स्टॉक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है। रेलवे की योजना के मुताबिक, कुल 238 AC EMU रेक में से सबसे ज्यादा 120 रेक Integral Coach Factory (ICF), चेन्नई में तैयार की जाएंगी। इसके अलावा 71 रेक Rail Coach Factory (RCF), कपूरथला और 47 रेक Modern Coach Factory (MCF), रायबरेली में बनाई जाएंगी। इस तरह तीनों उत्पादन इकाइयां मिलकर मुंबई के लिए निर्धारित सभी 238 AC EMU रेक का निर्माण करेंगी। रेलवे के मुताबिक इन नई रेक की सप्लाई 2027 से शुरू होने की योजना है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से बाकी रेक तैयार कर मुंबई उपनगरीय रेलवे को उपलब्ध कराई जाएंगी। पूरी स्वीकृत मात्रा यानी सभी 238 AC EMU रेक का निर्माण और उपलब्धता 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
MUTP के इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ट्रेनों की उपलब्धता पर जोर
मुंबई में उपनगरीय रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े काम किए जा रहे हैं। नए ट्रैक, स्टेशन और अन्य सुविधाओं के तैयार होने के बाद उनका पूरा फायदा तभी मिल सकेगा, जब पर्याप्त संख्या में ट्रेनें भी उपलब्ध हों। इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने AC EMU रेक के निर्माण को प्राथमिकता दी है। रेल मंत्रालय का कहना है कि 2027 से पहली ट्रेनसेट उपलब्ध होने और 2030 तक पूरी आवश्यकता पूरी होने से इंफ्रास्ट्रक्चर के तैयार होने और नई ट्रेनों के संचालन के बीच का अंतर कम किया जा सकेगा। इससे तैयार हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर और अधिक प्रभावी इस्तेमाल संभव होगा।
ICF, RCF और MCF को मिली जिम्मेदारी
नई AC EMU रेक के निर्माण की जिम्मेदारी भारतीय रेलवे की अनुभवी उत्पादन इकाइयों को दी गई है। चेन्नई स्थित ICF पहले से ही आधुनिक यात्री ट्रेनों के निर्माण के लिए जानी जाती है। वहीं कपूरथला की RCF और रायबरेली की MCF भी आधुनिक रेल कोच तैयार करने की क्षमता रखती हैं। रेलवे के अनुसार इन उत्पादन इकाइयों के पास आधुनिक यात्री रोलिंग स्टॉक बनाने का अनुभव है। इनमें AC EMU के अलावा Vande Bharat ट्रेनसेट और Vande Metro ट्रेनसेट जैसे आधुनिक रेल सिस्टम भी शामिल हैं। इसी मौजूदा क्षमता का इस्तेमाल मुंबई के लिए नई AC EMU रेक तैयार करने में किया जाएगा।
मौजूदा और प्रमाणित डिजाइन पर बनेगी ट्रेन
रेलवे बोर्ड ने स्वीकृत AC EMU रेक की खरीद के लिए मौजूदा और पहले से प्रमाणित RDSO/ICF स्पेसिफिकेशन को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य नई डिजाइन विकसित करने में लगने वाले अतिरिक्त समय को कम करना और उत्पादन प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाना है। मौजूदा और प्रमाणित तकनीकी मानकों के इस्तेमाल से उत्पादन इकाइयों को निर्माण शुरू करने में आसानी होगी। रेलवे का मानना है कि इससे नई रेक की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने में मदद मिलेगी।
2027 में मिलेंगी पहली AC EMU रेक
रेलवे की योजना के अनुसार मुंबई को पहली नई AC EMU रेक 2027 से मिलनी शुरू हो सकती हैं। इसके बाद उत्पादन बढ़ाते हुए 2030 तक पूरी स्वीकृत संख्या उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। यानी अगले कुछ वर्षों में मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क में AC लोकल ट्रेनों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इस पूरी योजना का उद्देश्य सिर्फ नई ट्रेनें उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि मुंबई में तैयार हो रहे रेल इंफ्रास्ट्रक्चर का समय पर इस्तेमाल सुनिश्चित करना भी है। रेलवे के मुताबिक, जब नई सुविधाएं तैयार होंगी तो उनके अनुरूप पर्याप्त रोलिंग स्टॉक उपलब्ध रहने से यात्रियों को बेहतर सेवा देने में मदद मिलेगी।
मुंबई लोकल यात्रियों के लिए क्या मायने?
मुंबई की उपनगरीय रेलवे देश के सबसे व्यस्त रेल नेटवर्कों में से एक है। ऐसे में नई AC EMU रेक का निर्माण और चरणबद्ध तरीके से उनका संचालन नेटवर्क की यात्री क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, इन रेक का वास्तविक संचालन किन रूटों पर और किस समय-सारणी के तहत होगा, इसकी जानकारी अलग से तय की जाएगी। फिलहाल रेलवे ने 238 AC EMU रेक के निर्माण की योजना स्पष्ट कर दी है। 120 रेक ICF, 71 RCF और 47 रेक MCF में बनेंगी, सप्लाई 2027 से शुरू होगी और पूरी मात्रा 2030 तक तैयार करने का लक्ष्य है। इससे MUTP के तहत तैयार हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर और नए रोलिंग स्टॉक के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी।