बिहार के सड़क और परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने NH-22 के मुजफ्फरपुर-सितामढ़ी-सोनबरसा सेक्शन को फोरलेन मानक में अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की कुल लंबाई 82.578 किलोमीटर होगी और इसे पूरा करने के लिए करीब 3,590.73 करोड़ रुपये की कुल पूंजी लागत तय की गई है। यह परियोजना हाइब्रिड एन्युइटी मोड यानी HAM के तहत विकसित की जाएगी। सरकार का उद्देश्य इस महत्वपूर्ण मार्ग की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ यात्री और माल परिवहन को तेज, सुरक्षित और अधिक सुगम बनाना है। मुजफ्फरपुर-सितामढ़ी-सोनबरसा मार्ग बिहार के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सोनबरसा के जरिए भारत-नेपाल सीमा को मुजफ्फरपुर जैसे बड़े आर्थिक केंद्र से जोड़ता है। मुजफ्फरपुर में यह मार्ग NH-27 के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से जुड़ता है। ऐसे में फोरलेन बनने के बाद नेपाल सीमा से आने-जाने वाले यात्री और माल परिवहन को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
कई इलाकों में घटेगा ट्रैफिक का दबाव
सरकार के मुताबिक, इस परियोजना के पूरा होने से मुजफ्फरपुर, मक्सूदपुर, रुन्नी सैदपुर, थुम्मा, डुमरा, भुतही और सोनबरसा जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में मौजूदा ट्रैफिक दबाव कम करने में मदद मिलेगी। फोरलेन सड़क बनने से वाहनों के लिए अधिक लेन उपलब्ध होंगी और यातायात का संचालन ज्यादा व्यवस्थित हो सकेगा। इससे यात्रियों के सफर का समय कम होने के साथ-साथ मालवाहक वाहनों की आवाजाही भी अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है।
100 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड
नए फोरलेन कॉरिडोर को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के हिसाब से तैयार किया जाएगा, जबकि इसकी औसत परिचालन गति करीब 80 किलोमीटर प्रति घंटे रखने की योजना है। परियोजना में सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। सड़क पर एट-ग्रेड मीडियन ओपनिंग नहीं रखने की योजना है। इससे अचानक सड़क पार करने या विपरीत दिशा से आने वाले वाहनों के कारण होने वाले जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी और हाई-स्पीड ट्रैफिक के लिए सुरक्षित कॉरिडोर तैयार किया जा सकेगा।
सात बड़े पुल और तीन रेलवे ओवरब्रिज
परियोजना में कई बड़े स्ट्रक्चर भी बनाए जाएंगे। इसके तहत सात मेजर ब्रिज प्रस्तावित हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण बागमती नदी पर 340 मीटर लंबा मेजर ब्रिज शामिल है। यह नदी सालभर बहती है, इसलिए इस पुल का निर्माण पूरे कॉरिडोर की कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा परियोजना में तीन रेलवे ओवरब्रिज (ROB) और दो फ्लाईओवर भी बनाए जाएंगे। प्रस्तावित फ्लाईओवर की लंबाई करीब 1,170 मीटर और 270 मीटर होगी। इन संरचनाओं का उद्देश्य सड़क और रेल यातायात के बीच क्रॉसिंग को बेहतर तरीके से नियंत्रित करना और वाहनों की आवाजाही को सुरक्षित बनाए रखना है।
PM गति शक्ति योजना से जुड़ा प्रोजेक्ट
यह परियोजना PM गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के सिद्धांतों के अनुरूप तैयार की गई है। इसका उद्देश्य केवल सड़क को चौड़ा करना नहीं, बल्कि सड़क को आर्थिक, औद्योगिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ना है। फोरलेन कॉरिडोर के जरिए औद्योगिक क्षेत्रों, रेलवे स्टेशनों और अन्य महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्रों तक पहुंच बेहतर होगी। इससे कृषि उत्पादों और अन्य माल की सप्लाई चेन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
नेपाल सीमा और माल परिवहन के लिए महत्वपूर्ण
NH-22 का यह हिस्सा भारत-नेपाल सीमा से जुड़ा होने के कारण रणनीतिक महत्व रखता है। यह मार्ग भिठामोड़ लैंड पोर्ट के जरिए सीमा पार यात्री और माल परिवहन को भी बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने में मदद करेगा। इसके अलावा यह परियोजना NH-31 और NH-122 जैसे मौजूदा कॉरिडोर से भी बेहतर तालमेल बनाएगी। इससे बरौनी के औद्योगिक क्षेत्र और गंगा नदी से जुड़े लॉजिस्टिक्स हब तक पहुंच मजबूत होने की उम्मीद है।
पर्यटन और धार्मिक स्थलों को भी फायदा
बेहतर सड़क कनेक्टिविटी का फायदा बिहार के धार्मिक और पर्यटन स्थलों को भी मिल सकता है। इस कॉरिडोर के जरिए बौद्ध सर्किट और सीतामढ़ी के ऐतिहासिक जानकी पुनौरा धाम मंदिर जैसे प्रमुख स्थलों तक पहुंच बेहतर होगी। इसके अलावा परियोजना क्षेत्र में बाबा गरीबनाथ मंदिर, माता जानकी मंदिर और पुनौरा धाम जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सामाजिक केंद्र भी बेहतर सड़क संपर्क से जुड़ेंगे।
पांच आर्थिक और चार सामाजिक नोड्स से कनेक्टिविटी
सरकार के अनुसार, इस परियोजना से PM गति शक्ति के पांच आर्थिक नोड्स को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इनमें चार औद्योगिक एस्टेट और एक मेगा फूड पार्क शामिल हैं। इसके साथ ही चार सामाजिक नोड्स और दो लॉजिस्टिक्स नोड्स को भी फायदा होगा। मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन को प्रमुख लॉजिस्टिक्स नोड के रूप में जोड़ा गया है। इससे यात्रियों के साथ-साथ माल की आवाजाही भी तेज और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।
यात्रा समय और वाहन खर्च में आएगी कमी
फोरलेन परियोजना पूरी होने के बाद वाहनों की औसत गति बढ़ने और यात्रा समय घटने की उम्मीद है। बेहतर सड़क सतह, अधिक लेन और सुरक्षित क्रॉसिंग व्यवस्था से वाहन संचालन लागत और ईंधन की खपत में भी कमी आ सकती है। केंद्र सरकार के अनुसार, परियोजना से सड़क सुरक्षा, ईंधन दक्षता और वाहन परिचालन लागत में सुधार होगा। साथ ही बिहार के इस क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों, व्यापार, कृषि आपूर्ति श्रृंखला और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिल सकता है। कुल मिलाकर, 82.578 किलोमीटर लंबे मुजफ्फरपुर-सितामढ़ी-सोनबरसा NH-22 कॉरिडोर का फोरलेन विस्तार बिहार की सड़क कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है। ₹3,590.73 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से नेपाल सीमा, औद्योगिक क्षेत्रों, रेलवे नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स हब और धार्मिक-पर्यटन स्थलों के बीच संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है।