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पुतिन के भारत दौरे से रक्षा क्षेत्र में बड़ी उम्मीदें, BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान Su-57 और सुखोई अपग्रेड पर बन सकती है बात
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। क्रेमलिन की ओर से उनके दौरे की पुष्टि हो चुकी है। यह एक साल के भीतर पुतिन की दूसरी भारत यात्रा होगी। सम्मेलन के साथ भारत-रूस के बीच रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग पर अहम बातचीत की उम्मीद है। खास तौर पर Su-57 लड़ाकू विमान और 100 से अधिक Su-30MKI विमानों के अपग्रेड से जुड़े संभावित समझौतों पर नजर है।
sd23 अग. 2026, 11:31 AM IST

नई दिल्ली में होगा BRICS का बड़ा जमावड़ा
भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। रूस ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इसमें हिस्सा लेंगे। पुतिन की पिछली भारत यात्रा दिसंबर 2025 में 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। इस बार BRICS मंच के अलावा भारत-रूस के बीच द्विपक्षीय बैठक भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से रक्षा सहयोग रणनीतिक साझेदारी का प्रमुख आधार रहा है।
रक्षा क्षेत्र में क्या हो सकता है बड़ा ऐलान?
पुतिन के दौरे को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा संभावित रक्षा समझौतों की है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक रूस भारत को पांचवीं पीढ़ी के Su-57 स्टेल्थ फाइटर कार्यक्रम में शामिल करने की पेशकश कर रहा है। इसमें केवल विमान की बिक्री ही नहीं, बल्कि भारत में संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग की संभावना भी बताई जा रही है। हालांकि, अभी इसे अंतिम सरकारी समझौता नहीं माना जा सकता।
इसके साथ ही भारतीय वायुसेना के 100 से अधिक Su-30MKI लड़ाकू विमानों के अपग्रेड पर भी रूस के साथ बातचीत आगे बढ़ने की खबरें हैं। रूसी विशेषज्ञों की ओर से भारत में संबंधित सुविधाओं का जायजा लिए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई है।
Su-57 पर भारत की नजर क्यों?
भारत अपनी पांचवीं पीढ़ी की लड़ाकू विमान क्षमता विकसित करने के लिए AMCA कार्यक्रम पर काम कर रहा है। ऐसे में Su-57 को लेकर संभावित रूसी प्रस्ताव को अंतरिम क्षमता के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। रूस पहले ही भारत को Su-57 कार्यक्रम में सहयोग की पेशकश कर चुका है और संयुक्त उत्पादन की संभावना पर भी बात रख चुका है। हालांकि, Su-57 पर कोई अंतिम खरीद निर्णय या समझौता हुआ है—ऐसा अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया गया है। इसलिए इसे संभावित रक्षा वार्ता के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
S-400 और एयर डिफेंस सहयोग भी अहम
भारत-रूस रक्षा संबंध केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं हैं। मार्च 2026 में रक्षा मंत्रालय ने रूस की Rosoboronexport के साथ ₹445 करोड़ के Tunguska एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की खरीद का अनुबंध किया था। इससे दोनों देशों के बीच एयर डिफेंस सहयोग की निरंतरता भी सामने आती है।
भारत पहले ही रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम हासिल कर चुका है। ऐसे में भविष्य की एयर डिफेंस जरूरतों और तकनीकी सहयोग पर भी पुतिन-मोदी वार्ता में चर्चा की संभावना बनी हुई है।
रक्षा के साथ व्यापार और ऊर्जा भी एजेंडे में
भारत और रूस के रिश्तों में रक्षा के अलावा ऊर्जा, व्यापार और परमाणु सहयोग भी महत्वपूर्ण हैं। दोनों देश आर्थिक संबंधों को और बढ़ाने तथा व्यापारिक सहयोग को विस्तार देने पर लगातार काम कर रहे हैं। BRICS सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक परिस्थितियों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं।
एक साल में दूसरी बार भारत आएंगे पुतिन
सितंबर का दौरा पुतिन की एक साल के भीतर दूसरी भारत यात्रा होगी। इससे नई दिल्ली और मॉस्को के बीच उच्चस्तरीय रणनीतिक संपर्क की अहमियत साफ होती है। पिछली दिसंबर यात्रा में दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग पर व्यापक चर्चा हुई थी।
निष्कर्ष
पुतिन का सितंबर दौरा केवल BRICS सम्मेलन तक सीमित नहीं माना जा रहा है। भारत-रूस द्विपक्षीय वार्ता में Su-57, Su-30MKI अपग्रेड, एयर डिफेंस, सैन्य तकनीक, ऊर्जा और व्यापार जैसे मुद्दे प्रमुख हो सकते हैं। हालांकि संभावित रक्षा सौदों को लेकर अंतिम तस्वीर सितंबर में होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत और आधिकारिक घोषणाओं के बाद ही साफ होगी।
