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जयपुर में Land Encroachment पर बड़ा एक्शन: चांदलई बांध क्षेत्र में JDA ने हटाए अवैध निर्माण
जयपुर के चांदलई बांध के Catchment Area में अतिक्रमण के खिलाफ JDA ने बड़ी कार्रवाई की है। सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माण, फार्महाउस और बाउंड्रीवाल को हटाया गया। NGT की सख्ती के बाद प्रशासन ने जल निकाय और उसके Catchment Area को अतिक्रमण व प्रदूषण से बचाने का अभियान तेज किया है।

जयपुर:चांदलई बांध और उसके कैचमेंट क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे अतिक्रमण और पर्यावरणीय नुकसान के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने कैचमेंट क्षेत्र में चिन्हित अतिक्रमणों को हटाने की कार्रवाई शुरू की है। यह कदम राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के बाद उठाया गया है।
NGT के आदेश के बाद कार्रवाई तेज
चांदलई झील और बांध के कैचमेंट क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर NGT ने 3 जुलाई 2026 को राजस्थान के अधिकारियों, खासकर JDA, की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई थी। ट्रिब्यूनल ने जल निकाय से अतिक्रमण हटाने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। NGT ने जयपुर के जिला कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को जल निकाय में मौजूद अतिक्रमण हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा था। साथ ही झील में बिना उपचारित पानी और कचरा जाने से रोकने के निर्देश भी दिए गए थे।
कैचमेंट क्षेत्र में बने थे निर्माण
चांदलई बांध के कैचमेंट क्षेत्र में कई निर्माण और अन्य गतिविधियां सामने आई थीं। अधिकारियों के सामने चुनौती यह भी रही कि कुछ संरचनाएं निजी भूमि पर थीं और उनके पास कथित तौर पर स्वीकृत नक्शे या अन्य अनुमतियां थीं। इसी वजह से कार्रवाई को लेकर कानूनी और प्रशासनिक स्थिति जटिल बनी हुई थी। राज्य की ओर से NGT को बताया गया था कि कैचमेंट क्षेत्र में अतिक्रमणों का चिन्हांकन किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित जमीन के बड़े हिस्से पर JDA का अधिकार है और जल संसाधन विभाग द्वारा अतिक्रमण चिन्हित कर JDA को कार्रवाई के लिए जानकारी भेजी जाती रही है।
झील की पर्यावरणीय स्थिति भी चिंता का विषय
चांदलई झील सिर्फ जमीन और अतिक्रमण का मामला नहीं है। यहां प्रदूषण और औद्योगिक अपशिष्ट को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। NGT के समक्ष रखी गई रिपोर्टों में झील के आसपास बड़ी संख्या में कपड़ा इकाइयों और बिना उपचारित पानी के जल निकाय में पहुंचने का मुद्दा उठाया गया था। एक संयुक्त समिति की जांच में सैकड़ों टेक्सटाइल इकाइयों के नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला अपशिष्ट जल झील की पर्यावरणीय स्थिति को प्रभावित कर रहा था।
ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व
चांदलई बांध/झील जयपुर क्षेत्र का महत्वपूर्ण जल निकाय है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इसका निर्माण करीब 1872 में हुआ था और यह क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। झील आसपास के कृषि क्षेत्र के लिए पानी का स्रोत रही है। इसी कारण कैचमेंट क्षेत्र में अतिक्रमण को केवल सरकारी जमीन पर कब्जे का मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसका सीधा संबंध जल संरक्षण और पर्यावरण से भी है।
आगे क्या होगा?
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के साथ अब सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि कैचमेंट क्षेत्र में दोबारा अवैध निर्माण न हो। NGT ने संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है। साथ ही जल निकाय में कचरा और अनुपचारित औद्योगिक पानी जाने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन के लिए अब जमीन के रिकॉर्ड, स्वीकृत निर्माण और वास्तविक अतिक्रमण की स्थिति को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा, ताकि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप हो और चांदलई बांध के कैचमेंट क्षेत्र को लंबे समय के लिए सुरक्षित किया जा सके।
चांदलई बांध के कैचमेंट क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। NGT की सख्ती के बाद JDA और अन्य संबंधित एजेंसियों पर अब जल निकाय की जमीन की सुरक्षा, अतिक्रमण की रोकथाम और प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। आने वाले समय में कार्रवाई कितनी प्रभावी रहती है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि चिन्हित अतिक्रमण पूरी तरह हटाए जाते हैं और कैचमेंट क्षेत्र में नए निर्माण पर प्रभावी रोक लगती है या नहीं।
