वृंदावन के चैतन्य विहार स्थित राजकीय बाल गृह (बालिका) में 14 वर्षीय किशोरी की मौत ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक किशोरी की पहचान शिवानी के रूप में हुई है। शुक्रवार को वह कमरा नंबर पांच के बाथरूम में अचेत अवस्था में मिली थी। बाल गृह की प्रभारी अधीक्षिका प्रगति खरे ने उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। किशोरी की मौत की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। जिलाधिकारी सीपी सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार ने बाल गृह का निरीक्षण किया और घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी ली। इसके बाद पुलिस ने बाल गृह में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगालनी शुरू की।
पुलिस के अनुसार CCTV फुटेज में सुबह करीब 11:08 बजे शिवानी के साथ तीन अन्य किशोरियों के कमरा नंबर पांच के बाथरूम में जाने की गतिविधि सामने आई। करीब 11:30 बजे एक अन्य किशोरी ने बाथरूम का दरवाजा खोलकर अंदर देखा और फिर वहां से चली गई। इसके कुछ देर बाद करीब 11:48 बजे दो किशोरियां बाथरूम से बाहर निकलती दिखाई दीं, जबकि शिवानी उनके साथ बाहर आती नहीं दिखी। जांच के दौरान पुलिस को शक हुआ कि बाथरूम के अंदर ही शिवानी के साथ घटना हुई। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पानी में डूबने से मौत की पुष्टि हुई है। इसी आधार पर पुलिस ने मामले को हत्या के एंगल से आगे बढ़ाया है। हालांकि घटना के पीछे का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।
मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि घटना के बाद CCTV कैमरों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। बाल गृह की प्रभारी अधीक्षिका की शिकायत के मुताबिक 21 अगस्त की शाम करीब पांच बजे एक किशोरी को कमरा नंबर पांच में लगे CCTV कैमरों को तोड़ने की कोशिश करते देखा गया। पुलिस का मानना है कि CCTV फुटेज में घटना से जुड़े अहम साक्ष्य हो सकते हैं, इसलिए कैमरों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की भी जांच की जा रही है। पूछताछ के दौरान बाल गृह में रहने वाली कुछ किशोरियों के बयानों में भी पुलिस को विरोधाभास मिला। पुलिस का कहना है कि घटना की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए सभी संबंधित किशोरियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पांच नामजद किशोरियों समेत अन्य के खिलाफ हत्या, साक्ष्य मिटाने, आपराधिक साजिश और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
जिन दो किशोरियों पर हत्या का मुख्य आरोप है, वे अलीगढ़ और पीलीभीत की रहने वाली बताई गई हैं। पुलिस के अनुसार दोनों पहले से पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों में बाल गृह में रह रही थीं। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि शिवानी को निशाना बनाने की वजह क्या थी और घटना में वास्तव में कितनी किशोरियां शामिल थीं। मृतक किशोरी शिवानी बरेली की रहने वाली थी। अधिकारियों के अनुसार उसकी मां मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं और लखनऊ के राजकीय मानसिक चिकित्सालय में भर्ती हैं। बाल कल्याण समिति बरेली के आदेश के बाद शिवानी को जून 2026 में रामपुर के राजकीय बाल गृह से वृंदावन के राजकीय बाल गृह (बालिका) में लाया गया था। वह काफी समय से प्रशासनिक संरक्षण में रह रही थी।
इस घटना के बाद बाल गृह में रहने वाली अन्य बालिकाओं की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल पुलिस CCTV फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और किशोरियों के बयानों को आधार बनाकर जांच आगे बढ़ा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी सीपी सिंह ने न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया है और इसके लिए जिला जज को पत्र भेजा गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी हत्या के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं है और जांच पूरी होने के बाद ही पूरी घटना की तस्वीर सामने आएगी।