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सरकारी जमीनों पर शिकंजा: आगरा में नजूल से लेकर ग्राम पंचायत भूमि तक होगा बड़ा ऑडिट

आगरा प्रशासन ने जिले की सरकारी जमीनों का व्यापक Audit कराने का फैसला लिया है। नजूल, राजकीय आस्थान, शत्रु संपत्ति, निष्क्रांत, सीलिंग, चरागाह और ग्राम पंचायत की जमीनों का रिकॉर्ड Ground Verification से मिलाया जाएगा। जहां Encroachment मिलेगा, वहां कब्जे की स्थिति और जिम्मेदारी तय की जाएगी, जबकि खाली सरकारी जमीन को जनहित की योजनाओं में इस्तेमाल करने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।

Neha Sharma23 अग. 2026, 11:57 AM IST
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सरकारी जमीनों पर शिकंजा: आगरा में नजूल से लेकर ग्राम पंचायत भूमि तक होगा बड़ा ऑडिट

आगरा: मनीष बंसल ने जिले की विभिन्न श्रेणियों की सरकारी जमीनों का व्यापक ऑडिट (Audit) कराने का निर्णय लिया है। इस प्रक्रिया में पुराने रिकॉर्ड और जमीन की मौजूदा स्थिति का मौके पर मिलान किया जाएगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन-सी जमीन खाली है, कहां अतिक्रमण है और किन मामलों में कानूनी विवाद चल रहा है। जिले में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण की शिकायतों और जमीन के रिकॉर्ड को लेकर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी


हर सरकारी जमीन की होगी जांच

प्रशासन की योजना केवल कागजी रिकॉर्ड की समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी। अधिकारियों को जमीन का Ground Verification करने के निर्देश दिए गए हैं। पहले किए गए सत्यापन की भी दोबारा क्रॉस-चेकिंग होगी। ऑडिट के दौरान यह जानकारी दर्ज की जाएगी कि संबंधित जमीन का रिकॉर्ड क्या कहता है और मौके पर उसकी वास्तविक स्थिति क्या है। यदि किसी सरकारी भूखंड पर कब्जा मिलता है तो कब्जेदार का नाम, कब्जे की अवधि और जमीन को लेकर हुई शिकायतों जैसी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि जमीन से जुड़ा कोई मामला अदालत में लंबित तो नहीं है।


इन श्रेणियों की जमीन होगी ऑडिट में शामिल

  • नजूल भूमि

  • राजकीय आस्थान की भूमि

  • शत्रु संपत्ति

  • निष्क्रांत संपत्ति

  • सीलिंग भूमि

  • चरागाह भूमि

  • ग्राम पंचायत की जमीन

इन सभी श्रेणियों के रिकॉर्ड तहसील स्तर पर व्यवस्थित किए जाएंगे और वास्तविक स्थिति का मौके पर सत्यापन किया जाएगा।


आगरा में नजूल जमीन का बड़ा हिस्सा

प्रशासन के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले में लगभग 60 लाख वर्ग मीटर नजूल भूमि दर्ज है। इनमें करीब 50 हजार वर्ग मीटर जमीन पर अतिक्रमण और लगभग 2.5 लाख वर्ग मीटर भूमि खाली बताई गई है। प्रशासन अब इन आंकड़ों को मौके की स्थिति से मिलाकर वास्तविक तस्वीर सामने लाने की तैयारी कर रहा है। इसी तरह राजकीय आस्थान की करीब 10 लाख वर्ग मीटर भूमि बताई गई है। इसमें लगभग 2.5 लाख वर्ग मीटर जमीन खाली और करीब 25 हजार वर्ग मीटर पर अतिक्रमण दर्ज है। इस श्रेणी की जमीन के प्रबंधन में राज्य और केंद्र सरकार के संबंधित विभागों की भूमिका होती है।


शत्रु और निष्क्रांत संपत्ति भी जांच के दायरे में

ऑडिट में शत्रु संपत्ति और निष्क्रांत संपत्ति को भी शामिल किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक आगरा में करीब चार लाख वर्ग मीटर शत्रु संपत्ति दर्ज है, जिसमें लगभग 90 हजार वर्ग मीटर जमीन खाली बताई गई है। वहीं करीब तीन लाख वर्ग मीटर निष्क्रांत संपत्ति भी जिले में मौजूद है। ऐसी संपत्तियों के रिकॉर्ड और मौजूदा कब्जे की स्थिति की भी जांच की जाएगी।


कब्जा मिला तो जिम्मेदारी भी तय होगी

इस ऑडिट की खास बात यह है कि प्रशासन केवल कब्जेदारों की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहता। यदि किसी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण मिलता है तो यह भी जांचा जाएगा कि पूर्व में जमीन का सत्यापन किस अधिकारी ने किया था और इसके बावजूद कब्जा कैसे बना रहा। ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों को चिन्हित करने की प्रक्रिया भी ऑडिट का हिस्सा होगी। प्रशासन का उद्देश्य सरकारी जमीन की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना है।


खाली जमीन का हो सकता है सरकारी योजनाओं में इस्तेमाल

ऑडिट के दौरान खाली पड़ी सरकारी जमीन की भी पहचान की जाएगी। प्रशासन ऐसी भूमि को भविष्य में गरीबों के आवास, सरकारी योजनाओं और अन्य सार्वजनिक उपयोग में लाने की संभावनाएं तलाश रहा है। इससे एक ओर सरकारी जमीन को अतिक्रमण से बचाने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी भूमि को जनहित के कामों में इस्तेमाल किया जा सकेगा।


इस साल पूरा करने का लक्ष्य

जिलाधिकारी के अनुसार ऑडिट की प्रक्रिया इस वर्ष के अंत तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। प्रशासन का कहना है कि पुराने सत्यापन रिकॉर्ड को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा और उनका मौके पर क्रॉस-चेक किया जाएगा।


क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान?

आगरा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में सरकारी जमीन का सही रिकॉर्ड और उसकी सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। जमीन के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर होने पर अतिक्रमण, अवैध कब्जे और भूमि विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में यह ऑडिट प्रशासन को यह पता लगाने में मदद कर सकता है कि सरकारी जमीन कितनी है, कितनी जमीन खाली है, कितनी पर कब्जा है और कितनी जमीन का भविष्य में सार्वजनिक उपयोग किया जा सकता है।


आगरा प्रशासन का सरकारी जमीनों का व्यापक ऑडिट अभियान केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है। इसमें Land Record Verification, Ground Survey, Encroachment Identification और Vacant Government Land के बेहतर इस्तेमाल पर एक साथ ध्यान दिया जा रहा है। अगर प्रक्रिया तय समय में पूरी होती है, तो इससे जिले में सरकारी संपत्तियों के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और सरकारी जमीन को कब्जों से बचाने में मदद मिल सकती है।