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16 साल का इंतजार खत्म! महाराष्ट्र में सरकारी जमीन आवंटन की नई नीति तैयार
महाराष्ट्र सरकार ने करीब 16 साल से रुकी सरकारी जमीन आवंटन प्रक्रिया को नए नियमों के साथ फिर शुरू करने की तैयारी की है। नई नीति में Housing Societies को जमीन Lottery के बजाय Transparent Auction और Technical-Financial Bidding के जरिए देने का प्रस्ताव है। जमीन शुरुआत में 30 साल की Lease पर दी जाएगी, जबकि अलग-अलग सामाजिक वर्गों के लिए Reservation का भी प्रावधान रखा गया है।

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने सहकारी आवासीय सोसायटियों को सरकारी जमीन आवंटित करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। करीब 16 साल से रुकी सरकारी जमीन आवंटन प्रक्रिया को नए नियमों के साथ फिर शुरू करने की तैयारी है। नई व्यवस्था में पहले की तरह लॉटरी के बजाय पारदर्शी नीलामी और तकनीकी-आर्थिक बोली के आधार पर जमीन आवंटित की जाएगी।
2010 के बाद लगी थी रोक
सरकार ने इससे पहले सहकारी आवासीय सोसायटियों को सरकारी जमीन आवंटित करने के लिए 1999 और 2007 में शासनादेश जारी किए थे। लेकिन 2010 के आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटाले के बाद सरकारी जमीन के आवंटन की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद करीब डेढ़ दशक तक इस तरह के नए आवंटन नहीं हो सके। अब राज्य सरकार ने पुराने अनुभवों को देखते हुए नई नीति तैयार की है, जिसका उद्देश्य जमीन आवंटन की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाना है।
लॉटरी की जगह होगी Auction प्रक्रिया
नई प्रस्तावित नीति के तहत सरकारी जमीन को सहकारी हाउसिंग सोसायटियों को Direct Auction के जरिए दिया जाएगा। जिला कलेक्टर उपलब्ध सरकारी भूखंडों की सूची तैयार करेंगे। इसके बाद सार्वजनिक विज्ञापन जारी कर इच्छुक सोसायटियों से तकनीकी और वित्तीय बोली आमंत्रित की जाएगी। सबसे ऊंची पात्र बोली लगाने वाली सोसायटी को जमीन आवंटित किए जाने का प्रस्ताव है। इससे सरकार को उम्मीद है कि जमीन आवंटन में पारदर्शिता बढ़ेगी और मनमाने तरीके से भूखंड देने की संभावना कम होगी।
जमीन की Base Price भी तय होगी
प्रस्तावित नीति में सरकारी जमीन की शुरुआती कीमत भी निर्धारित की गई है। मुंबई शहर और उसके उपनगरों में बेस प्राइस जमीन के बाजार मूल्य का 2.5%, जबकि महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में यह 5% रखे जाने का प्रस्ताव है। इसके बाद नीलामी में पात्र सोसायटियां अपनी वित्तीय बोली पेश करेंगी।
30 साल की Lease पर मिलेगी जमीन
नई व्यवस्था में एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। सरकारी जमीन को सीधे Ownership Basis पर देने के बजाय शुरुआत में 30 साल की Lease पर देने का प्रस्ताव है। लीज अवधि पूरी होने के बाद निर्धारित शर्तों के तहत जमीन को Occupancy Class-I में बदलने की पात्रता होगी, जिससे आगे चलकर यह लगभग Freehold जैसी स्थिति में आ सकती है।
अलग-अलग वर्गों के लिए Reservation
सरकार ने नई नीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व का भी प्रावधान रखा है। प्रस्ताव के अनुसार अलग-अलग वर्गों की हाउसिंग सोसायटियों के लिए सरकारी भूखंडों में श्रेणीवार हिस्सा तय किया जाएगा। प्रस्तावित वितरण में सामान्य वर्ग के लिए 40%, राज्य सरकार, स्थानीय निकाय और सरकारी उपक्रमों के कर्मचारियों की सोसायटियों के लिए 15% और SC, ST तथा NT वर्गों के लिए 10% हिस्सा शामिल है। इसके अलावा लेखक, कलाकार, खिलाड़ी और पत्रकारों के लिए 10% तथा स्वतंत्रता सेनानियों/उनके उत्तराधिकारियों, दिव्यांग व्यक्तियों के संगठनों और EWS वर्ग के लिए 5% आरक्षण का प्रस्ताव है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और सशस्त्र बलों के वर्तमान एवं पूर्व कर्मियों के लिए भी 5-5% हिस्से का प्रस्ताव बताया गया है।
हाउसिंग सोसायटियों में भी सामाजिक प्रतिनिधित्व
सरकार ने सरकारी जमीन पाने वाली हाउसिंग सोसायटियों के सदस्यों को लेकर भी प्रावधान प्रस्तावित किए हैं। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी सोसायटियों में कम से कम 20% सदस्य पिछड़े वर्गों से और 5% सदस्य दिव्यांग वर्ग से होने की शर्त रखी गई है। इसका उद्देश्य सरकारी जमीन पर बनने वाली आवासीय परियोजनाओं में सामाजिक रूप से वंचित वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
नई नीति क्यों लाई गई?
सरकार का कहना है कि नई नीति पारदर्शिता और निष्पक्षता को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। यह नीति संजय गांधी कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी, कोल्हापुर की हाईकोर्ट याचिका और सुप्रीम कोर्ट की 25 नवंबर 2024 की टिप्पणियों की पृष्ठभूमि में तैयार की गई है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की मंजूरी के बाद ड्राफ्ट नीति को अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अंतिम मंजूरी के लिए रखा जाना है। इसलिए इसे फिलहाल प्रस्तावित नीति के रूप में देखना जरूरी है।
सरकार के सामने पारदर्शिता बनाए रखने की चुनौती
सरकारी जमीन का आवंटन हमेशा संवेदनशील मुद्दा रहा है। नई व्यवस्था में Auction, Public Advertisement और Technical-Financial Bidding जैसे प्रावधानों का उद्देश्य प्रक्रिया को रिकॉर्ड आधारित और पारदर्शी बनाना है। हालांकि, नीति लागू होने के बाद इसकी वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उपलब्ध सरकारी जमीन की सूची, बोली प्रक्रिया, पात्रता और आवंटन से जुड़े रिकॉर्ड कितने खुले और आसानी से जांचे जा सकने वाले रखे जाते हैं।
