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मार्च में भौंकने लगा था करन, अब स्कूल जाने लगा; रेबीज केस में एंटीबॉडी टेस्ट से होगी बड़ी पुष्टि”

मिर्जापुर के कछवां क्षेत्र के करन की हालत में अब काफी सुधार बताया जा रहा है। दिसंबर 2025 में कुत्ते के काटने के करीब चार महीने बाद मार्च 2026 में उसमें पानी से डर, बेचैनी और कुत्ते की तरह भौंकने जैसी असामान्य हरकतें दिखाई दी थीं। परिवार उसे कई अस्पतालों में लेकर गया, जिसके बाद वाराणसी के हरहुआ स्वास्थ्य केंद्र में एंटी-रेबीज उपचार शुरू हुआ। रिपोर्ट के अनुसार उसे पांच डोज का कोर्स कराया गया और हालत गंभीर होने पर दो अतिरिक्त डोज भी दिए गए। अब वह सामान्य रूप से स्कूल जा रहा है। हालांकि उसके शरीर में रेबीज वायरस के खिलाफ पर्याप्त प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया बनी है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए एंटीबॉडी जांच की जानी है।

sd23 अग. 2026, 05:49 PM IST
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मार्च में भौंकने लगा था करन, अब स्कूल जाने लगा; रेबीज केस में एंटीबॉडी टेस्ट से होगी बड़ी पुष्टि”

कछवां (Mirzapur) के जागीपुर वार्ड में मार्च में कुत्ते की तरह भौंकने वाला छात्र करन अब ठीक हो गया है।

चार महीने बाद अचानक बिगड़ी थी हालत

मामला मिर्जापुर के कछवां क्षेत्र का है। परिवार के अनुसार करन दिसंबर 2025 में अपने ननिहाल वाराणसी के हरहुआ गया था। वहां 20 दिसंबर को एक कुत्ते ने उसे काट लिया था।

शुरुआत में इस घटना को परिवार ने गंभीरता से नहीं लिया। करीब चार महीने तक करन सामान्य रहा, लेकिन मार्च 2026 में अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। उसे पानी से डर लगने लगा और उसके व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखाई देने लगे। परिवार के मुताबिक वह कुत्ते की तरह भौंकने भी लगा था। मार्च में सामने आई रिपोर्टों में इस घटनाक्रम की पुष्टि हुई थी।

एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक इलाज

करन की हालत बिगड़ने के बाद परिवार उसे पहले स्थानीय अस्पतालों में लेकर गया। इसके बाद उसे बीएचयू समेत वाराणसी के अन्य अस्पतालों में दिखाया गया।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, बीएचयू से लौटने के बाद परिवार उसे वाराणसी के हरहुआ स्थित स्वास्थ्य केंद्र ले गया, जहां एंटी-रेबीज उपचार शुरू किया गया।

हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 22 दिनों में पांच डोज का कोर्स पूरा कराया गया और हालत गंभीर होने के कारण दो अतिरिक्त डोज भी दिए गए। उपचार के बाद धीरे-धीरे करन की हालत में सुधार होने लगा।

अब सामान्य जिंदगी की ओर लौट रहा करन

सबसे राहत वाली बात यह है कि अब करन की हालत में काफी सुधार बताया जा रहा है। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक वह अब स्कूल जाने लगा है और सामान्य गतिविधियां कर रहा है।परिवार के लिए यह राहत इसलिए भी बड़ी है क्योंकि मार्च में उसकी हालत काफी गंभीर बताई गई थी और उसे कई अस्पतालों में उपचार के लिए ले जाना पड़ा था।

सात डोज की बात ने खड़े किए सवाल

मामले में सात एंटी-रेबीज डोज दिए जाने की बात भी सामने आई है। अमर उजाला की रिपोर्ट में जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अरुण वर्मा ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले की चिकित्सकीय जांच जरूरी है। हिन्दुस्तान के मुताबिक पांच डोज का कोर्स पूरा होने के बाद दो अतिरिक्त डोज दिए गए। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अलग-अलग रिपोर्टों में उपचार का विवरण थोड़ा अलग है। इसलिए इसे “सात इंजेक्शन से रेबीज ठीक हो गया” जैसे सीधे निष्कर्ष के रूप में लिखना उचित नहीं होगा।

अब होगी एंटीबॉडी की जांच

करन के मामले में अब अगला महत्वपूर्ण कदम एंटीबॉडी टेस्ट है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि उसके शरीर में रेबीज वायरस के खिलाफ कैसी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया बनी है। अमर उजाला की रिपोर्ट में डॉक्टर ने भी कहा है कि एंटीबॉडी जांच के बाद ही इस असामान्य रिकवरी के बारे में ज्यादा स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।

उम्र को लेकर रिपोर्टों में अंतर

इस मामले की रिपोर्टिंग में एक तथ्यात्मक अंतर भी सामने आया है। अमर उजाला और मार्च की आजतक रिपोर्ट में करन की उम्र 17 वर्ष बताई गई है, जबकि 23 अगस्त की हिन्दुस्तान रिपोर्ट में उसे 15 वर्षीय बताया गया है। इसलिए खबर में उम्र को लेकर किसी एक आंकड़े को बिना आधिकारिक रिकॉर्ड के निर्णायक तथ्य की तरह लिखने से बचना बेहतर होगा।

रेबीज को लेकर क्या कहता है सरकारी कार्यक्रम?

भारत सरकार के National Rabies Control Programme के अनुसार, पशु के काटने के बाद समय पर घाव की देखभाल और निर्धारित पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस बेहद महत्वपूर्ण है। सरकारी कार्यक्रम की वेबसाइट पर रेबीज वैक्सीनेशन शेड्यूल और Category III bite में rabies immunoglobulin से संबंधित जानकारी भी दी गई है।

NCDC ने 2026 में suspected human rabies cases की joint investigation के लिए अलग SOP भी जारी की है। इससे स्पष्ट है कि संदिग्ध मानव रेबीज मामलों में चिकित्सकीय जांच और निगरानी को गंभीरता से लिया जाता है।

करन का मामला क्यों चर्चा में है?

करन के मामले ने इसलिए ध्यान खींचा है क्योंकि रेबीज के लक्षण सामने आने के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ है और वह अब सामान्य गतिविधियां कर रहा है। हालांकि इस रिकवरी को लेकर चिकित्सकीय कारण अभी स्पष्ट नहीं हैं।

इसलिए फिलहाल सबसे सुरक्षित निष्कर्ष यही है कि करन की हालत में सुधार हुआ है और वह स्कूल लौट आया है, लेकिन उसके शरीर में रेबीज के खिलाफ बनी प्रतिरक्षा और बीमारी की स्थिति की पुष्टि एंटीबॉडी जांच तथा चिकित्सकीय मूल्यांकन से ही होगी।