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खवड्या डोंगर हादसा: मां हाथ जोड़कर बेटे को समझाती रही, 3 की मौत

छत्रपती संभाजीनगर के खवड्या डोंगर हादसे का नया वीडियो सामने आया है। इसमें मां अपने बेटे कुणाल को सुरक्षित लौटने के लिए हाथ जोड़कर समझाती दिख रही हैं। करीब तीन घंटे की कोशिशों के बाद हादसे में कुणाल, उसके पिता और मां की मौत हो गई।

Neha Sharma23 अग. 2026, 07:44 PM IST
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खवड्या डोंगर हादसा: मां हाथ जोड़कर बेटे को समझाती रही, 3 की मौत
छत्रपती संभाजीनगर: महाराष्ट्र के छत्रपती संभाजीनगर में स्थित खवड्या डोंगर पर हुए दर्दनाक हादसे से जुड़ा एक और वीडियो सामने आया है। इस नए वीडियो में एक मां अपने बेटे को बचाने के लिए हाथ जोड़कर उससे पीछे हटने और सुरक्षित जगह आने की गुहार लगाती नजर आ रही है। आसपास मौजूद लोग, पुलिस और अन्य लोग भी युवक को समझाने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। लेकिन काफी देर तक चली कोशिशों के बावजूद हालात नहीं संभल सके और देखते ही देखते एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई।

मां हाथ जोड़कर बेटे से करती रही विनती
सामने आए नए वीडियो में 18 वर्षीय कुणाल चांदवडे खवड्या डोंगर के किनारे दिखाई दे रहा है। उसके आसपास लोग मौजूद हैं और उसे सुरक्षित जगह आने के लिए समझाने की कोशिश कर रहे हैं। वीडियो का सबसे भावुक हिस्सा वह है जब कुणाल की मां अपने बेटे के सामने हाथ जोड़कर उसे पीछे हटने की विनती करती दिखाई देती हैं। मां लगातार बेटे से बात करने और उसे समझाने की कोशिश कर रही थीं। मौके पर मौजूद अन्य लोग भी उसे जीवन खत्म करने का फैसला न लेने के लिए समझा रहे थे। यह वीडियो हादसे से कुछ समय पहले का बताया जा रहा है और इसमें परिवार की बेबसी साफ दिखाई देती है।

करीब तीन घंटे तक चला समझाने का सिलसिला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुणाल शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे खवड्या डोंगर पर पहुंचा था। वह काफी देर तक पहाड़ी के किनारे मौजूद रहा। माता-पिता, स्थानीय नागरिक, पुलिस और दमकलकर्मी लगातार उसे सुरक्षित स्थान पर आने के लिए समझाते रहे। करीब तीन घंटे तक यह प्रयास चलता रहा। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे परिवार और भविष्य के बारे में सोचने के लिए कहा। दमकल विभाग की टीम ने भी बचाव की तैयारी की थी और नीचे सुरक्षा व्यवस्था करने की कोशिश की गई थी। लेकिन युवक लगातार खतरनाक स्थिति में बना रहा।

सरपंच ने भी की थी समझाने की कोशिश
कुणाल को समझाने वालों में तिसगांव के सरपंच संजय जाधव भी शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने भी काफी देर तक कुणाल से बातचीत की और उसे पीछे हटने के लिए मनाने की कोशिश की। जब बातचीत से बात नहीं बनी तो उसे शांत करने और सुरक्षित जगह लाने के लिए अलग-अलग तरीके से समझाने की कोशिश की गई। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरपंच ने उसे iPhone देने की बात भी कही थी, लेकिन इससे भी कुणाल को समझाया नहीं जा सका।

आखिरी कोशिश बनी परिवार के लिए सबसे बड़ा हादसा
करीब तीन घंटे तक चले इस घटनाक्रम के बाद कुणाल के पिता मुरलीधर चांदवडे उसके पास पहुंचे। उनका मकसद बेटे को सुरक्षित पीछे लाना था। इसी दौरान स्थिति अचानक बिगड़ गई और पिता तथा बेटा दोनों पहाड़ी से नीचे गिर गए। कुछ ही समय बाद मां संगीता भी हादसे का शिकार हो गईं। इस तरह कुछ ही पलों में एक परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान कुणाल चांदवडे, मुरलीधर चांदवडे और संगीता चांदवडे के रूप में हुई है।

क्या iPhone विवाद ही था वजह?
घटना के शुरुआती रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कुणाल अपने माता-पिता से महंगे मोबाइल फोन को लेकर नाराज था। कुछ रिपोर्ट्स में iPhone की किस्तों और परिवार के बीच हुए विवाद का भी जिक्र किया गया। हालांकि, बाद की जानकारी में पुलिस जांच के हवाले से यह संकेत मिला है कि मामले को सिर्फ iPhone विवाद से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। पुलिस परिवार के भीतर के विवाद और घटना के पीछे मौजूद अन्य परिस्थितियों की भी जांच कर रही है। इसके अलावा, रिपोर्ट्स के मुताबिक कुणाल ने इससे पहले भी इसी जगह पर ऐसा कदम उठाने की कोशिश की थी। इसलिए फिलहाल iPhone को इस घटना का निश्चित कारण बताना उचित नहीं होगा।

सामने आया दूसरा वीडियो बढ़ा रहा है सवाल
पहले सामने आए वीडियो में स्थानीय लोग और सरपंच कुणाल को समझाते दिखाई दिए थे। अब सामने आए दूसरे वीडियो में उसकी मां की कोशिशें दिखाई दे रही हैं। वीडियो में मां का अपने बेटे को बचाने के लिए हाथ जोड़ना और लगातार उसे समझाना इस पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को दिखाता है। इसके बावजूद स्थिति नियंत्रण में नहीं आ सकी। इन वीडियो ने घटना को लेकर लोगों के बीच कई सवाल खड़े किए हैं—क्या समय रहते बेहतर तरीके से intervention किया जा सकता था? क्या ऐसे संवेदनशील स्थानों पर emergency response व्यवस्था और मजबूत होनी चाहिए? और युवाओं में बढ़ते emotional distress को समय रहते पहचानने के लिए परिवार और समाज क्या कर सकते हैं?

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इस घटना के बाद चांदवडे परिवार पूरी तरह बिखर गया है। तीन सदस्यों की मौत के बाद घर में अब कोई नहीं बचा। स्थानीय स्तर पर भी इस घटना को लेकर गहरा दुख है। घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि जब कोई व्यक्ति गंभीर emotional distress में हो, तो परिवार, आसपास के लोगों और emergency responders की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो जाती है।

घटना ने मानसिक स्वास्थ्य पर भी खड़ी की चिंता
खवड्या डोंगर की यह घटना केवल एक हादसे की कहानी नहीं है, बल्कि यह युवाओं में मानसिक तनाव और भावनात्मक संकट को समय रहते पहचानने की जरूरत की ओर भी ध्यान खींचती है। किसी भी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बड़ा बदलाव दिखाई दे, वह खुद को नुकसान पहुंचाने की बात करे या बेहद निराश नजर आए, तो उसे अकेला छोड़ने के बजाय तुरंत परिवार, भरोसेमंद लोगों और professional mental-health support से मदद दिलाना जरूरी है।

फिलहाल जांच जारी
पुलिस इस पूरे मामले की परिस्थितियों की जांच कर रही है। घटना के पीछे वास्तव में क्या वजह थी, परिवार में पहले से किस तरह के विवाद चल रहे थे और कुणाल की मानसिक स्थिति क्या थी इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। फिलहाल सामने आया नया वीडियो उस भयावह घटना से पहले की आखिरी कोशिशों को दिखाता है, जिसमें एक मां अपने बेटे को बचाने के लिए हर संभव कोशिश करती नजर आती है। लेकिन कुछ ही देर बाद हुई इस त्रासदी में कुणाल, उसके पिता मुरलीधर और मां संगीता—तीनों की जान चली गई।