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BRICS का बड़ा अकादमिक सम्मेलन लखनऊ में, दुनिया की बदलती तस्वीर पर विशेषज्ञों की नजर

लखनऊ विश्वविद्यालय इन दिनों वैश्विक नीति और शोध के एक बड़े केंद्र के रूप में सामने आया है। यहां 18वां BRICS Academic Forum आयोजित किया जा रहा है, जिसमें BRICS देशों के शिक्षाविद, शोधकर्ता, नीति विशेषज्ञ, थिंक टैंक प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। यह आयोजन 23 से 25 अगस्त 2026 तक भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत हो रहा है। फोरम का केंद्रीय विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है। चर्चा में आर्थिक विकास, जलवायु परिवर्तन, तकनीकी बदलाव, AI, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, MSME, व्यापार, नवीकरणीय ऊर्जा और मानव विकास जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।

sd24 अग. 2026, 02:06 PM IST
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BRICS का बड़ा अकादमिक सम्मेलन लखनऊ में, दुनिया की बदलती तस्वीर पर विशेषज्ञों की नजर
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में BRICS देशों के विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं का महत्वपूर्ण जमावड़ा हो रहा है। 18वें BRICS Academic Forum का आयोजन Observer Research Foundation (ORF), Research and Information System for Developing Countries (RIS) और University of Lucknow के सहयोग से किया जा रहा है।
लखनऊ विश्वविद्यालय ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर इस कार्यक्रम को 23-25 अगस्त 2026 के आयोजन के रूप में सूचीबद्ध किया है। कार्यक्रम भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता के तहत आयोजित किया जा रहा है। इस साल भारत की BRICS अध्यक्षता का व्यापक विषय है—Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability, यानी लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास को बढ़ावा देना।
किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
फोरम में केवल पारंपरिक आर्थिक मुद्दों तक चर्चा सीमित नहीं रहेगी। विशेषज्ञ BRICS देशों के सामने मौजूद साझा चुनौतियों और उनके व्यावहारिक समाधान पर विचार करेंगे।
प्रमुख विषयों में शामिल हैं:
आर्थिक विकास और समावेशी विकास
जलवायु परिवर्तन और जलवायु-लचीली अर्थव्यवस्था
नवीकरणीय ऊर्जा
हरित एवं ट्रांजिशन फाइनेंस
MSME और स्टार्टअप इकोसिस्टम
विज्ञान और नई तकनीक
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती तकनीक
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर
अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक सहयोग
स्वास्थ्य एवं सामाजिक क्षेत्र
मानव विकास
वैश्विक संस्थाओं में सुधार
टिकाऊ और मजबूत बुनियादी ढांचा
इन मुद्दों पर चर्चा का लक्ष्य केवल विचारों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि BRICS एजेंडे के लिए नीति-आधारित सुझाव तैयार करना भी है।
BRICS के नए सदस्य देशों की भी भागीदारी
फोरम में BRICS के मूल सदस्यों—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—के साथ समूह में शामिल नए सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी भी बताई गई है। इससे मंच पर वैश्विक दक्षिण और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के विभिन्न दृष्टिकोण सामने आने की उम्मीद है। BRICS अब केवल पांच देशों का समूह नहीं रह गया है। इसके विस्तार के बाद आर्थिक, तकनीकी, व्यापारिक और विकास संबंधी मुद्दों पर सहयोग का दायरा भी बढ़ा है। आर्थिक विकास से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी और AI पर फोकस
फोरम की एक खासियत यह है कि इसमें आर्थिक विकास को नई तकनीकी चुनौतियों से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञ यह चर्चा कर रहे हैं कि AI, डिजिटल तकनीक और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल विकासशील देशों में आर्थिक और सामाजिक प्रगति को तेज करने के लिए कैसे किया जा सकता है। स्टार्टअप और MSME को भी BRICS देशों की आर्थिक मजबूती के महत्वपूर्ण आधार के तौर पर चर्चा में शामिल किया गया है।
जलवायु और ऊर्जा भी एजेंडे में
जलवायु परिवर्तन BRICS देशों के लिए साझा चुनौती बन चुका है। फोरम में आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन पर भी विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञ हरित वित्त, ऊर्जा प्रणालियों को अधिक मजबूत बनाने, नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे। इसका उद्देश्य ऐसी विकास रणनीतियों पर विचार करना है जो आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरणीय स्थिरता को भी सुनिश्चित कर सकें।
वैश्विक संस्थाओं में सुधार पर भी चर्चा BRICS देशों की ओर से लंबे समय से वैश्विक संस्थाओं में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की बेहतर भागीदारी की मांग की जाती रही है। लखनऊ के फोरम में भी वैश्विक संस्थाओं में सुधार और बदलती विश्व व्यवस्था में BRICS की भूमिका पर विचार-विमर्श प्रमुख विषयों में शामिल है।
सुधाकर दलेला रखेंगे विचार
कार्यक्रम में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्वी क्षेत्र) और BRICS Sherpa सुधाकर दलेला के भी विचार रखने की जानकारी दी गई है। आयोजन के दौरान नवाचार, सहयोग और सततता से संबंधित BRICS घोषणा जारी करने तथा BRICS Think Tank Council की सिफारिशों को विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों को सौंपने की योजना भी बताई गई है।
लखनऊ के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह आयोजन?
इस सम्मेलन का महत्व केवल BRICS देशों के बीच नीति संवाद तक सीमित नहीं है। लखनऊ विश्वविद्यालय में इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच का आयोजन उत्तर प्रदेश को वैश्विक ज्ञान, शोध और नीति-विचार के केंद्र के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर भी देता है।
ORF अध्यक्ष समीर सरन ने कहा है कि इस मंच के माध्यम से उत्तर प्रदेश की ज्ञान और विचार-विमर्श की परंपरा को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
BRICS के 20 साल और आगे की दिशा
इस फोरम का आयोजन ऐसे समय हो रहा है जब BRICS अपने 20 वर्षों के सहयोग के पड़ाव पर है। इसलिए सम्मेलन में अब तक की यात्रा की समीक्षा के साथ यह भी विचार किया जा रहा है कि बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीक, जलवायु और भू-राजनीतिक परिस्थितियों में BRICS की अगली दिशा क्या होनी चाहिए।