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आजम खां के जौहर ट्रस्ट की फंडिंग में नया मोड़, ₹15 करोड़ के लेनदेन की जांच
समाजवादी पार्टी नेता आजम खां से जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की वित्तीय जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब कथित चंदे और उसके पीछे के मनी ट्रेल को खंगाल रहा है। ताजा जांच में शेल कंपनियों के जरिये करीब ₹15 करोड़ की रकम ट्रस्ट तक पहुंचने के संकेत मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन कंपनियों के पीछे वास्तविक कारोबारी और बिल्डर कौन थे तथा रकम का स्रोत क्या था। हालांकि, ₹15 करोड़ के इस विशिष्ट आंकड़े की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
sd24 अग. 2026, 02:06 PM IST

लखनऊ: आजम खां के जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय की जांच का दायरा लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। 19 अगस्त को ED ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली में करीब 10 ठिकानों पर तलाशी ली थी। कार्रवाई रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली के जामिया नगर से जुड़े परिसरों में हुई थी। ED के अनुसार जांच का मुख्य फोकस सरकारी ठेकों से जुड़े कथित धन के निजी ठेकेदारों के माध्यम से डायवर्जन और बाद में उस रकम के ट्रस्ट तथा यूनिवर्सिटी से जुड़े निर्माण और अन्य संपत्तियों में इस्तेमाल पर है। एजेंसी ने कुछ ठेकेदारों और ट्रस्ट के बीच वित्तीय लेनदेन की भी जांच शुरू की है।
शेल कंपनियों के जरिए करीब ₹15 करोड़ का दावा
24 अगस्त की अमर उजाला रिपोर्ट के अनुसार, ED की पड़ताल में ऐसी कंपनियों के जरिये जौहर ट्रस्ट को करीब ₹15 करोड़ मिलने के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक रकम कई कंपनियों के माध्यम से रूट की गई, जिससे वास्तविक धनदाता की पहचान छिपी रह सके। जांच में लखनऊ, दिल्ली, नोएडा और मुंबई से जुड़े कुछ भवन निर्माताओं की भूमिका की भी पड़ताल किए जाने की बात कही गई है।
हालांकि महत्वपूर्ण बात यह है कि ED की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी या अन्य प्रमुख स्वतंत्र रिपोर्टों में अभी तक ₹15 करोड़ की रकम और इन चार शहरों के बिल्डरों की सूची की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे जांच में सामने आया दावा या संभावित वित्तीय सुराग मानना उचित होगा, अंतिम निष्कर्ष नहीं।
ठेकेदारों से ट्रस्ट तक पैसे पहुंचने की जांच
ED की 19 अगस्त की कार्रवाई के संबंध में अधिकारियों ने बताया था कि जांच में ऐसे वित्तीय लेनदेन सामने आए हैं जिनमें सरकारी ठेके हासिल करने वाले कुछ निजी ठेकेदारों पर कथित रूप से धन को ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी की ओर भेजने का संदेह है। इसमें चंदे और निर्माण कार्यों पर खर्च की गई रकम शामिल है। एजेंसी का उद्देश्य कथित अपराध की रकम का स्रोत और उसका इस्तेमाल पता करना है। जौहर ट्रस्ट की मौजूदा ED जांच की पृष्ठभूमि में आयकर विभाग की पुरानी जांच भी अहम है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, यूनिवर्सिटी के निर्माण की घोषित लागत और जांच में सामने आई अनुमानित लागत में बड़ा अंतर पाया गया था। जून 2026 की रिपोर्ट में जागरण ने बताया कि 59 भवनों की निर्माण लागत करीब ₹494 करोड़ आंकी गई, जबकि ट्रस्ट की ओर से करीब ₹46 करोड़ का खर्च बताया गया था।
2023 में सामने आई आयकर जांच संबंधी रिपोर्टों में भी आरोप लगाया गया था कि यूनिवर्सिटी को कुछ ऐसी कंपनियों से फंडिंग मिली जिनका वास्तविक अस्तित्व जांच में संदिग्ध या अनुपलब्ध पाया गया। इन्हीं आरोपों के आधार पर मामले को ED की जांच से जोड़कर देखा गया। अब बिल्डरों और कंपनियों तक पहुंचने की कोशिश ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ED अब कथित मनी ट्रेल को पीछे की ओर ट्रैक कर यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि ट्रस्ट तक रकम पहुंचाने वाली कंपनियों के वास्तविक संचालक कौन हैं और उनका निर्माण कारोबार से क्या संबंध है। एजेंसी वित्तीय दस्तावेजों, बैंक लेनदेन, डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित कंपनियों के बीच हुए लेनदेन की जांच कर रही है।
ट्रस्ट की टैक्स छूट भी पहले ही रद्द हो चुकी है
जून 2026 में आयकर विभाग ने जौहर ट्रस्ट का 12AB पंजीकरण और उससे जुड़ी टैक्स छूट समाप्त कर दी थी। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट ने चार वर्षों में करीब ₹38.54 करोड़ की आय घोषित की, जबकि बैंक खातों में लगभग ₹97.80 करोड़ जमा पाए गए। विभाग ने दोनों के बीच करीब ₹59.25 करोड़ के अंतर को लेकर भी सवाल उठाए थे।
