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35 दिन बाद घर लौटा देवरिया का अभिषेक, यूक्रेन में मिसाइल हमले का बना था शिकार

देवरिया के करमेल गांव निवासी 22 वर्षीय अभिषेक निषाद का पार्थिव शरीर करीब 35 दिन बाद रविवार को भारत पहुंचा। अभिषेक 19 जुलाई को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के पास मालवाहक जहाज Golden Leo पर हुए मिसाइल हमले में मारे गए भारतीय क्रू सदस्यों में शामिल थे। हमले के बाद उनका शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और सामान्य तरीके से पहचान नहीं हो सकी। बाद में डीएनए जांच से पहचान की पुष्टि हुई। शव को यूक्रेन से मोल्दोवा के रास्ते दिल्ली लाया गया, जहां से परिजन उसे देवरिया के करमेल गांव लेकर पहुंचे।

sd24 अग. 2026, 02:06 PM IST
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35 दिन बाद घर लौटा देवरिया का अभिषेक, यूक्रेन में मिसाइल हमले का बना था शिकार
देवरिया DEORIA: यूक्रेन के ओडेसा के पास रूसी मिसाइल हमले में जान गंवाने वाले देवरिया के 22 वर्षीय अभिषेक निषाद का लंबा इंतजार रविवार को खत्म हुआ। करीब 35 दिन बाद उनका पार्थिव शरीर भारत पहुंचा। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर शव पहुंचने के बाद परिजन उसे लेकर देवरिया के करमेल गांव के लिए रवाना हुए।
19 जुलाई को Golden Leo पर हुआ था हमला
अभिषेक Golden Leo नाम के मालवाहक जहाज पर क्रू सदस्य के रूप में काम कर रहे थे। 19 जुलाई 2026 को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के पास ब्लैक सी में जहाज पर तीन मिसाइलें दागे जाने की जानकारी यूक्रेनी अधिकारियों ने दी थी। Reuters के अनुसार जहाज पर 17 लोग सवार थे और हमले के बाद आग लग गई। रातभर चले खोज एवं बचाव अभियान में आठ लोगों को बचाया गया, जबकि 10 लोगों की मौत की पुष्टि हुई। यूक्रेनी नौसेना ने हमले के लिए रूस को जिम्मेदार बताया था। Reuters के अनुसार Golden Leo पर तीन क्रूज मिसाइलें दागे जाने की बात यूक्रेनी पक्ष ने कही। रूस की ओर से उस समय इस हमले पर तत्काल सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की गई थी।
चार भारतीयों की हुई थी मौत
भारत के विदेश मंत्रालय के हवाले से Reuters ने रिपोर्ट किया कि हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हुई थी और एक अन्य भारतीय गंभीर रूप से घायल हुआ था। भारत ने वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक क्रू सदस्यों को निशाना बनाए जाने की निंदा की थी। अभिषेक भी इन्हीं भारतीय क्रू सदस्यों में शामिल थे। घटना के बाद उनके परिवार ने केंद्र सरकार से शव को जल्द भारत लाने की अपील की थी। उनके पिता कौशल निषाद ने सांसद और केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान से हस्तक्षेप की मांग की थी।
आखिरी बार मां से हुई थी फोन पर बात
घटना से पहले 19 जुलाई को अभिषेक ने अपनी मां अनीता से दो बार फोन पर बात की थी। परिवार के अनुसार शाम करीब सात बजे आखिरी बातचीत के दौरान एयर रेड सायरन बज रहा था। अभिषेक ने मां को बताया था कि वह बंकर की ओर जा रहे हैं और बाद में फोन करेंगे। इसके बाद परिवार का उनसे संपर्क नहीं हो सका।
शव की पहचान में क्यों लगा इतना समय?
मिसाइल हमले में अभिषेक का शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। अमर उजाला के अनुसार शव की स्थिति के कारण तत्काल पहचान नहीं हो सकी। पहचान के लिए उनके माता-पिता के डीएनए नमूने लिए गए। अन्य मृतकों की डीएनए प्रक्रिया और रिपोर्ट में भी देरी हुई, जिससे शव भारत लाने में समय लगा।
PTI और Daily Pioneer की रिपोर्ट के मुताबिक डीएनए नमूनों का मिलान होने के बाद अभिषेक की पहचान सुनिश्चित हुई। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को यूक्रेन के बोरीस्पिल एयरपोर्ट से मोल्दोवा के चिसिनाउ एयरपोर्ट ले जाया गया और वहां से विमान द्वारा नई दिल्ली लाया गया।
नौकरी के लिए जुलाई में ही जहाज पर हुए थे सवार
शिपिंग कंपनी की प्रतिनिधि प्रतिज्ञा त्रिपाठी के अनुसार अभिषेक 10 जुलाई को वाराणसी से मुंबई पहुंचे थे और 11 जुलाई को तुर्किये के रास्ते Golden Leo पर सवार हुए थे। रिपोर्टों के अनुसार जहाज का माल मक्का की ओर जा रहा था। इससे पहले परिवार ने बताया था कि अभिषेक ने विदेश में नौकरी के लिए 10 जून को घर छोड़ा था और मुंबई की एक शिपिंग एजेंसी के माध्यम से जहाज पर काम हासिल किया था।
अब गांव में होगा अंतिम संस्कार
रविवार सुबह दिल्ली एयरपोर्ट से अभिषेक के रिश्तेदार उनका शव लेकर करमेल गांव के लिए रवाना हुए। अमर उजाला के अनुसार परिवार करीब एक महीने से बेटे के पार्थिव शरीर का इंतजार कर रहा था और सोमवार सुबह अंतिम संस्कार की तैयारी थी।