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लखनऊ में वकीलों के चैंबर पर बुलडोजर का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, 30 अगस्त की कार्रवाई से पहले CJI के सामने उठी आवाज
लखनऊ में वकीलों के चैंबरों पर चलने वाले बुलडोजर की आहट अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। करीब 40 साल पुराने बताए जा रहे इन चैंबरों को कथित अतिक्रमण बताकर हटाने के आदेश के खिलाफ अब शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया गया है। 30 अगस्त की प्रस्तावित कार्रवाई से पहले 24 अगस्त को CJI सूर्यकांत के सामने मामला उठाया गया। अब बड़ा सवाल यही है—क्या दशकों से मौजूद वकीलों के चैंबर बचेंगे या हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम की कार्रवाई आगे बढ़ेगी?

लखनऊ में जिला अदालत के आसपास बने अधिवक्ताओं के चैंबरों को हटाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि चैंबरों को गिराने के नोटिस जारी हो चुके हैं और 30 अगस्त को कार्रवाई की आशंका है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत के सामने मामले का उल्लेख किया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी सुनवाई की कोई निश्चित तारीख तय नहीं की है।
CJI ने पूछा- हाईकोर्ट क्यों नहीं गए?
24 अगस्त को वकील ने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग करते हुए CJI सूर्यकांत के समक्ष उल्लेख किया। इस पर CJI ने पूछा कि मामले में हाईकोर्ट का रुख क्यों नहीं किया जा सकता। वकील की ओर से जवाब दिया गया कि जिस हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ चुनौती दी जा रही है, वही अदालत चैंबरों को हटाने का निर्देश दे चुकी है। इस पर CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि चैंबर अनधिकृत ही होंगे। जवाब में अधिवक्ता की ओर से कहा गया कि ये चैंबर लगभग 40 वर्षों से अस्तित्व में हैं। CJI ने कहा, "We will see" यानी मामले को देखा जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई। CJI ने यह भी कहा कि संबंधित अधिवक्ता ध्वस्तीकरण नोटिस का जवाब दे सकते हैं।
30 अगस्त को क्यों महत्वपूर्ण है?
याचिका का उल्लेख करते हुए वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कथित अतिक्रमण हटाने के लिए 30 अगस्त की तारीख से संबंधित नोटिस जारी किए गए हैं। उनका कहना था कि नोटिस केवल जवाब लेने के लिए नहीं बल्कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के इरादे से जारी किए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 24 अगस्त तक सुप्रीम कोर्ट ने न तो ध्वस्तीकरण पर रोक लगाई थी और न ही 30 अगस्त की कार्रवाई को स्थगित करने का कोई आदेश सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने केवल मामले को देखने की बात कही है और तत्काल सूचीबद्धता की निश्चित तारीख नहीं बताई।
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद लखनऊ के District and Sessions Court परिसर के आसपास, पुराने हाईकोर्ट परिसर के निकट बने कथित अनधिकृत चैंबरों और दुकानों से जुड़ा है। मामला Anuradha Singh and Others v. State of U.P. and Others से जुड़ा है। मार्च 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कोर्ट परिसर के आसपास सार्वजनिक रास्तों, फुटपाथ अथवा सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण हटाने के लिए लखनऊ नगर निगम को कार्रवाई तेज करने का निर्देश दिया था। उस समय नगर निगम की निरीक्षण रिपोर्ट में कुल 72 कथित अतिक्रमणकारियों की पहचान की गई थी, जिनमें अधिकांश अधिवक्ता बताए गए थे।
मार्च के आदेश में हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
24 मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, Justice Rajesh Singh Chauhan और Justice Rajeev Bharti की खंडपीठ ने कहा था कि सार्वजनिक रास्ते, फुटपाथ या सरकारी जमीन पर अवैध और अनधिकृत अतिक्रमण के मामलों में कानून के अनुसार तत्काल कार्रवाई की जा सकती है। हाईकोर्ट ने लखनऊ नगर निगम को आवश्यक कानूनी कदम तेजी से उठाने को कहा था। यदि संबंधित व्यक्ति नोटिस प्राप्त नहीं करता है, तो नोटिस को अतिक्रमित हिस्से, भवन या दुकान पर चस्पा करने तथा व्यापक प्रसार वाले हिंदी और अंग्रेजी समाचार पत्रों में प्रकाशित करने का निर्देश भी दिया गया था। इसी कार्यवाही के दौरान नगर निगम ने 72 कथित अतिक्रमणकारियों की पहचान वाली निरीक्षण रिपोर्ट अदालत के सामने रखी थी।
6 अगस्त को हाईकोर्ट ने दिया था 'आखिरी मौका'
इसके बाद 6 अगस्त 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 72 कथित अतिक्रमणकारियों को एक और मौका देने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि संबंधित लोगों को या तो चैंबर/दुकानें खाली करनी होंगी या फिर यह साबित करना होगा कि उनके पास वहां बने ढांचे पर वैध अधिकार या दावा है। ऐसा नहीं करने पर नगर निगम को कथित अवैध ढांचों को हटाने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। हाईकोर्ट की खंडपीठ में Justice Rajesh Singh Chauhan और Justice Rajeev Bharti शामिल थे। अदालत ने नगर निगम को सभी 72 कथित अतिक्रमणकारियों को नए नोटिस जारी करने के लिए कहा था। नोटिस लेने से इनकार करने की स्थिति में उन्हें अतिक्रमित स्थान पर चस्पा करने और एक हिंदी तथा एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित करने का निर्देश दिया गया था। संबंधित लोगों को कम से कम 10 दिन का समय देने की बात भी आदेश में दर्ज है।
हाईकोर्ट ने रविवार को कार्रवाई की बात क्यों कही?
अदालत ने सुझाव दिया था कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रविवार को की जाए, ताकि अदालत का नियमित कामकाज प्रभावित न हो। प्रस्तावित कार्रवाई की तारीख संबंधित लोगों को पहले से बताने को भी कहा गया था, जिससे वे सहयोग कर सकें। अदालत ने यह भी कहा था कि यदि कार्रवाई के दौरान कोई व्यक्ति या उसके सहयोगी गैरकानूनी तरीके से विरोध करते हैं या कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा करते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
100 से ज्यादा चैंबर पहले ही हटाए जाने का दावा
6 अगस्त की सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से अदालत को बताया गया था कि पहले के निर्देशों के अनुपालन में 100 से अधिक अवैध रूप से निर्मित चैंबर पहले ही हटाए जा चुके हैं। हालांकि, 72 चिन्हित अतिक्रमणों के संबंध में नगर निगम ने बताया कि केवल 14 ढांचे हटाए जा सके और अधिवक्ताओं के विरोध/आंदोलन के कारण कार्रवाई बाधित हुई। नगर निगम ने प्रशासन और पुलिस की पर्याप्त सहायता की जरूरत भी बताई थी।
वकीलों की ओर से भी क्या कहा गया?
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता H.G.S. Parihar ने कथित तौर पर कहा कि यदि कोई अधिवक्ता या दुकानदार अवैध अथवा अनधिकृत अतिक्रमण करता है तो उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। एक अन्य अधिवक्ता की ओर से अदालत से नरम रुख अपनाने और वैध चैंबर बनने तक अस्थायी व्यवस्था उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। हालांकि, यह भी कहा गया कि सार्वजनिक रास्ते या सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर अवैध कब्जे का समर्थन अधिवक्ता के तौर पर नहीं किया जा सकता।
पुलिस और प्रशासन को भी जिम्मेदारी
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को शांतिपूर्ण तरीके से पूरा कराने के लिए हाईकोर्ट ने Lucknow Police Commissioner, District Magistrate और Municipal Commissioner को आपस में समन्वय करने और नगर निगम अधिकारियों को आवश्यक प्रशासनिक एवं पुलिस सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट में अब क्या होगा?
24 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के सामने मामला उठाए जाने के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि याचिका कब सूचीबद्ध होती है और शीर्ष अदालत हाईकोर्ट के निर्देश तथा प्रस्तावित ध्वस्तीकरण को लेकर क्या रुख अपनाती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सुप्रीम कोर्ट ने चैंबरों के ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी है। अभी केवल तत्काल सुनवाई की मांग अदालत के समक्ष रखी गई है और CJI सूर्यकांत ने मामले को देखने की बात कही है।
