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काशी में 15 घंटे की बारिश से जलभराव, BHU में मरीज को कंधे पर ले जाना पड़ा l
वाराणसी में सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक करीब 15 घंटे हुई लगातार बारिश ने शहर की रफ्तार रोक दी। 12 घंटे में 119.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिसके बाद सड़कें जलमग्न हो गईं और कई इलाकों में घरों, दुकानों तथा अस्पताल परिसरों में पानी भर गया। BHU अस्पताल परिसर में जलभराव के कारण मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी गंभीर रही कि एक मरीज को परिजन कंधे पर उठाकर अस्पताल तक ले गए। शहर की प्रमुख सड़कों पर कारें और अन्य वाहन पानी में फंस गए, जबकि कई इलाकों में यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही।

वाराणसी में सोमवार रात से शुरू हुई तेज बारिश मंगलवार सुबह तक जारी रही। कई घंटों तक हुई लगातार बारिश से शहर के निचले इलाकों में पानी भर गया। कुछ स्थानों पर बारिश रुकने के बाद भी जलभराव कम नहीं हुआ, क्योंकि नालियों और सीवर लाइनों से पानी की निकासी तेजी से नहीं हो सकी। शहर की सड़कें पानी से लबालब नजर आईं और कई जगह सड़क तथा नाली के बीच का अंतर तक दिखाई नहीं दे रहा था। आंकड़ों के अनुसार, वाराणसी में 12 घंटे के भीतर 119.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बारिश की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई इलाकों में कुछ ही समय में घुटनों से ऊपर तक पानी भर गया। निचली बस्तियों और सड़क किनारे बने घरों में पानी घुसने से लोगों को घरेलू सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा। दुकानदारों ने भी दुकानों में पानी घुसने से नुकसान की आशंका जताई l
भारी बारिश का सबसे ज्यादा असर शहर के निचले और व्यस्त इलाकों में दिखाई दिया। लंका, BHU, महमूरगंज, लहरतारा, सिगरा, कैंट, नई सड़क, चौकाघाट और आसपास के कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बनी। कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पानी की गहराई बढ़ने के कारण कई कारें, ऑटो और दोपहिया वाहन बीच रास्ते में बंद हो गए। वाहन चालकों को अपने वाहन छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा। BHU परिसर और अस्पताल की ओर जाने वाले रास्तों पर भी पानी भर गया। इलाज कराने पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल तक पहुंचने में काफी कठिनाई हुई। अस्पताल परिसर में जलभराव के कारण स्ट्रेचर और व्हीलचेयर ले जाने में भी परेशानी आई। कई मरीजों को परिजन सहारा देकर या कंधे पर उठाकर अंदर ले जाते नजर आए। एक मरीज को कंधे पर लादकर अस्पताल पहुंचाने का दृश्य बारिश से पैदा हुई मुश्किलों को दिखाता है।
मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों ने बताया कि पानी के बीच से होकर अस्पताल जाना पड़ा। बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। कई लोगों के कपड़े और जरूरी सामान पानी में भीग गए। अस्पताल तक पहुंचने के लिए लोगों को पानी से भरी सड़क पार करनी पड़ी, जिससे संक्रमण और दुर्घटना का खतरा भी बना रहा। बारिश के कारण शहर में यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। सड़कों पर पानी भरने के बाद वाहनों की रफ्तार कम हो गई और कई इलाकों में जाम की स्थिति बन गई। स्कूल, कार्यालय और बाजार जाने वाले लोगों को समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने में दिक्कत हुई। दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति और भी कठिन रही, क्योंकि तेज बहाव वाले पानी में वाहन फिसलने का खतरा बना रहा।
कई जगह स्थानीय लोगों ने खुद आगे बढ़कर लोगों की मदद की। कुछ लोगों ने जलभराव वाले रास्तों पर फंसे वाहन चालकों को बाहर निकाला, जबकि कई परिवारों ने मरीजों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में सहयोग किया। हालांकि, पानी की गहराई और तेज बहाव के कारण कई स्थानों पर लोगों को प्रशासनिक मदद का इंतजार भी करना पड़ा।भारी बारिश के बाद शहर की जलनिकासी व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नालियों की सफाई समय पर नहीं हुई और कई स्थानों पर नालियां कचरे से भरी पड़ी हैं। उनका कहना है कि बारिश शुरू होते ही पानी सड़कों पर जमा हो जाता है और उसे निकलने में कई घंटे लग जाते हैं। लोगों ने नगर निगम से नालियों की नियमित सफाई, पंपिंग व्यवस्था मजबूत करने और जलभराव वाले स्थानों का स्थायी समाधान करने की मांग की है। जलभराव वाले इलाकों में खुले मैनहोल, बिजली के खंभों और लटकते तारों को लेकर भी लोगों में चिंता रही। पानी में करंट उतरने की आशंका के कारण प्रशासन ने लोगों को बिजली के उपकरणों और तारों से दूर रहने की सलाह दी है। बच्चों को जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से रोकने की अपील भी की गई है, क्योंकि गहरे पानी में खुले गड्ढे और सीवर दिखाई नहीं देते।
प्रशासन और नगर निगम की टीमें प्रभावित इलाकों से पानी निकालने में जुटी हैं। कई जगह पंप लगाकर जलनिकासी की जा रही है। पुलिस और यातायात विभाग ने भी जलभराव वाले मार्गों पर निगरानी बढ़ाई है, ताकि वाहन चालकों को सुरक्षित रास्तों से निकाला जा सके। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें और जलभराव वाली सड़कों पर वाहन न ले जाएं। बारिश से लोगों को गर्मी और उमस से राहत जरूर मिली, लेकिन शहर की बदहाल जलनिकासी व्यवस्था ने परेशानी बढ़ा दी। काशी में हर साल मानसून के दौरान सड़कें, घर और अस्पताल परिसर जलमग्न हो जाते हैं। इस बार BHU अस्पताल तक मरीज को कंधे पर ले जाने की तस्वीर ने व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में प्रशासन के सामने जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने के साथ-साथ दोबारा पानी भरने से रोकने की चुनौती है। स्थानीय लोगों की मांग है कि बारिश के बाद केवल अस्थायी तौर पर पानी निकालने के बजाय जलनिकासी की स्थायी योजना बनाई जाए, ताकि मरीजों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और आम लोगों को हर बारिश में इसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
