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महाराष्ट्र में मराठी नियम पर विवाद, 331 ऑटो-टैक्सी चालकों को नोटिस

Maharashtra Marathi Rule Controversy: महाराष्ट्र में Auto-Rickshaw, Taxi और App-Based Cab Drivers के लिए Marathi की basic/working knowledge को लेकर विवाद तेज हो गया है। RTO की जांच में भाषा संबंधी निर्धारित मानक पूरा नहीं करने वाले 331 drivers को Notice जारी किए गए हैं। नियम के विरोध में कुछ ड्राइवरों ने प्रदर्शन किया है, जबकि Marathi language requirement को Bombay High Court में भी चुनौती दी गई है। सरकार का कहना है कि ड्राइवरों को Marathi का expert नहीं, बल्कि यात्रियों से सामान्य बातचीत करने लायक basic knowledge होना जरूरी है।

Neha Sharma25 अग. 2026, 02:25 PM IST
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महाराष्ट्र में मराठी नियम पर विवाद, 331 ऑटो-टैक्सी चालकों को नोटिस

मुंबई: महाराष्ट्र में Marathi language rule को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य सरकार ने ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवरों के लिए Marathi की working knowledge को जरूरी बनाया है। 20 अगस्त से शुरू हुई जांच के बाद RTO ने ऐसे ड्राइवरों को नोटिस देना शुरू किया है जो निर्धारित Marathi proficiency दिखाने में असफल रहे। 25 अगस्त को अकेले एक दिन में राज्यभर में 331 ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों को नोटिस दिए गए, जिनमें 139 Mumbai Metropolitan Region (MMR) से हैं।


क्या है Maharashtra का नया Marathi Rule?

सरकार का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े ड्राइवरों के लिए यात्रियों से सामान्य बातचीत करने जितनी Marathi की जानकारी जरूरी है। इसी उद्देश्य से RTO की टीमें ड्राइवरों की भाषा क्षमता की जांच कर रही हैं। ड्राइवरों से रोजमर्रा की बातचीत से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं—जैसे यात्री कहां जाना चाहता है, किराया कितना है, रास्ता कौन-सा है और भुगतान किस माध्यम से किया जाएगा। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ जगहों पर 16 सवालों वाला language test भी लिया जा रहा है। सरकार की कार्रवाई अचानक शुरू नहीं हुई। इससे पहले ड्राइवरों के लिए करीब 105 दिनों का training और assessment programme चलाया गया था। इसके बाद अब RTO ने नियम के पालन को लेकर enforcement शुरू किया है।


331 ड्राइवरों को क्यों मिला Notice?

25 अगस्त को RTO की statewide checking के दौरान कुल 4,807 commercial passenger vehicle drivers की जांच की गई। इनमें MMR के 1,392 ड्राइवर और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों के 3,415 ड्राइवर शामिल थे। जांच के दौरान MMR में 139 और राज्य के अन्य हिस्सों में 192 ड्राइवर निर्धारित Marathi knowledge प्रदर्शित नहीं कर पाए। इस तरह कुल 331 ड्राइवरों को नोटिस जारी किए गए। RTO की कार्रवाई इससे पहले भी जारी रही है। पिछले पांच दिनों में राज्यभर में 35,190 commercial passenger vehicles की जांच की जा चुकी है और कुल 4,729 notices जारी किए गए हैं। इनमें 2,239 नोटिस MMR में दिए गए हैं।


नोटिस मिलने के बाद क्या होगा?

रिपोर्टों के अनुसार, जिन ड्राइवरों को भाषा परीक्षा में अपेक्षित स्तर हासिल नहीं हुआ, उन्हें Marathi सीखने और अपनी proficiency सुधारने के लिए समय दिया जा रहा है। नियम का पालन नहीं करने पर आगे उनके driver badge पर कार्रवाई हो सकती है। इससे पहले RTO ने बताया था कि असफल ड्राइवरों को एक महीने का notice दिया जा सकता है और सुधार नहीं होने पर badge suspension जैसी कार्रवाई का प्रावधान है।


विवाद क्यों बढ़ा?

इस नियम का विरोध मुख्य रूप से उन ड्राइवरों की ओर से सामने आया है जो Marathi में सहज नहीं हैं। उनका कहना है कि अचानक language proficiency को रोजगार से जोड़ने से उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है। 24 अगस्त को Mumbai के Kandivali इलाके में गैर-Marathi भाषी ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों ने विरोध प्रदर्शन किया और सड़क पर traffic disruption भी हुआ। प्रदर्शनकारियों ने enforcement के दौरान कथित harassment और दबाव की शिकायत की। मुंबई में ड्राइवरों के विरोध के बीच public transport पर भी असर देखने को मिला। MMR में कई इलाकों में ऑटो और टैक्सी की उपलब्धता कम होने से यात्रियों को परेशानी हुई, खासकर residential areas से railway stations तक पहुंचने वाले feeder routes पर।


ड्राइवरों की एक और शिकायत: Test में 'Out of Syllabus' सवाल

कुछ ड्राइवरों ने RTO की language testing प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि उन्होंने RTO और अन्य संस्थाओं द्वारा आयोजित Marathi classes में हिस्सा लिया, लेकिन test में ऐसे सवाल पूछे गए जो training में शामिल नहीं थे। इससे training और assessment के बीच consistency को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि, इन शिकायतों को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से अंतिम निष्कर्ष अलग से स्पष्ट किया जाना बाकी है।


सरकार का क्या कहना है?

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 24 अगस्त को कहा कि ड्राइवरों को Marathi का expert बनने की जरूरत नहीं है। सरकार की ओर से जोर basic या working knowledge पर है, ताकि ड्राइवर यात्रियों के साथ सामान्य बातचीत कर सकें। सरकार का पक्ष यह है कि सार्वजनिक परिवहन में काम करने वाले ड्राइवरों को स्थानीय भाषा की बुनियादी जानकारी होने से यात्रियों के साथ communication बेहतर होगा और महाराष्ट्र की regional language को बढ़ावा मिलेगा।


मामला Bombay High Court तक पहुंचा

Marathi language requirement को लेकर अब Bombay High Court में भी कानूनी चुनौती सामने आई है। 25 अगस्त को एक Public Interest Litigation (PIL) दाखिल किए जाने की खबर है, जिसमें ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और app-based cab drivers के लिए Marathi knowledge को अनिवार्य करने वाली सरकारी व्यवस्था की constitutional validity और इसके प्रभावों पर सवाल उठाए गए हैं। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले 2017 में Bombay High Court ने auto-rickshaw permits से जुड़ी एक समान Marathi requirement को रद्द किया था। मौजूदा नियम को लागू करने के साथ यह पुराना कानूनी विवाद भी फिर चर्चा में आ गया है।


New Badge के लिए भी Marathi Verification

नए ऑटो और टैक्सी ड्राइवर badges जारी करने की प्रक्रिया में Marathi language verification को लेकर भी बदलाव किए गए हैं। 20 अगस्त से नए applicants के language verification process की videography शुरू करने की घोषणा की गई थी, ताकि पूरी प्रक्रिया में transparency और accountability बनी रहे।


आगे क्या होगा?

अब इस विवाद में तीन स्तरों पर घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहेगा—RTO की enforcement drive, ड्राइवरों का विरोध और Bombay High Court में कानूनी चुनौती। एक तरफ सरकार basic Marathi knowledge को public transport drivers के लिए जरूरी बता रही है, वहीं विरोध कर रहे ड्राइवर रोजगार और implementation process को लेकर सवाल उठा रहे हैं। अदालत में चुनौती के बाद यह भी स्पष्ट होगा कि इस language requirement को लागू करने की कानूनी सीमा क्या है और इसके लिए सरकार को किन प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। फिलहाल महाराष्ट्र में Marathi Rule का मुद्दा केवल भाषा तक सीमित नहीं रह गया है। यह रोजगार, public transport, regional language policy और नागरिक अधिकारों से जुड़ा बड़ा सार्वजनिक विवाद बन चुका है।