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रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छ पेयजल के लिए विशेष अभियान, पानी की टंकियों और फिल्टरों की होगी सफाई l

भारतीय रेलवे ने यात्रियों और कर्मचारियों को सुरक्षित व स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए विशेष स्वच्छता अभियान शुरू किया है। इसके तहत स्टेशनों पर पानी की टंकियों, फिल्टरों, वाटर कूलर, आरओ-यूवी सिस्टम, पाइपलाइन, नल और जल वितरण केंद्रों का व्यापक निरीक्षण किया जाएगा। टंकियों की सफाई और कीटाणुशोधन के साथ-साथ पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच भी होगी। क्षेत्रीय रेलवे को कमियों की पहचान कर समयबद्ध सुधारात्मक कार्रवाई करने और उसकी स्टेशनवार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

Kashish Rai25 अग. 2026, 04:51 PM IST
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रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छ पेयजल के लिए विशेष अभियान, पानी की टंकियों और फिल्टरों की होगी सफाई l

भारतीय रेलवे ने स्टेशनों पर यात्रियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विशेष स्वच्छता अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत पानी की टंकियों और फिल्टरों की सफाई कर उन्हें कीटाणुरहित बनाया जाएगा। रेलवे के अनुसार, यह पहल पेयजल गुणवत्ता प्रबंधन को मजबूत करने के लिए तैयार की गई व्यापक कार्ययोजना का हिस्सा है। कार्ययोजना में पेयजल प्रणालियों के नियमित निरीक्षण, रखरखाव और जल गुणवत्ता की निगरानी पर विशेष जोर दिया गया है।

टंकियों और जल स्रोतों का निरीक्षण

अभियान के दौरान क्षेत्रीय रेलवे द्वारा जल स्रोतों, जल उपचार और निस्पंदन संयंत्रों, भूमिगत एवं ओवरहेड टैंकों, पीवीसी टैंकों, जल बूथों, नलों और जल वितरण केंद्रों का व्यापक निरीक्षण किया जाएगा। सभी पानी की टंकियों को खाली कर उनकी पूरी तरह सफाई की जाएगी। इसके बाद टंकियों को कीटाणुरहित किया जाएगा। टैंक के वेंट और ओवरफ्लो पाइप को पक्षियों, जानवरों और शैवाल से बचाने के लिए उचित सुरक्षा उपाय भी किए जाएंगे। जहां भी मरम्मत की जरूरत होगी, वहां क्षतिग्रस्त टैंक, पाइपलाइन और फिल्टर की मरम्मत की जाएगी या आवश्यकता पड़ने पर उन्हें बदला जाएगा। रेलवे यह भी सुनिश्चित करेगा कि पीने योग्य और गैर-पेयजल प्रणालियों के बीच किसी प्रकार का क्रॉस-कनेक्शन न हो।

वाटर कूलर और आरओ सिस्टम की जांच

रेलवे बोर्ड ने क्षेत्रीय रेलवे को वाटर कूलर और जल शोधन प्रणालियों का व्यापक निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। वाटर कूलर की टंकियों को पूरी तरह साफ किया जाएगा और कूलर, पाइपलाइन तथा नलों में होने वाले रिसाव को तुरंत ठीक किया जाएगा। वाटर कूलर के आसपास स्वच्छता सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनमें लगे यूवी और आरओ सिस्टम की भी जांच की जाएगी। जरूरत के अनुसार खराब या अनुपयोगी प्रणालियों की मरम्मत अथवा उन्हें बदला जाएगा। फिल्टर, कार्ट्रिज और अन्य आवश्यक घटकों का निर्धारित समय पर रखरखाव और प्रतिस्थापन किया जाएगा। नई या बदली गई यूवी-आरओ प्रणालियों को जरूरत के आधार पर मिशन मोड में लगाया जाएगा। पानी बेचने वाली मशीनों पर भी सफाई और गुणवत्ता निगरानी से जुड़े उपाय लागू किए जाएंगे, ताकि इन मशीनों से मिलने वाला पानी सुरक्षा और स्वच्छता मानकों के अनुरूप हो।

पानी की गुणवत्ता की जांच

अधिकारी अलग-अलग स्थानों से पानी के नमूने लेकर उनकी भौतिक, रासायनिक और जीवाणु संबंधी जांच करेंगे। इन नमूनों में जल स्रोत, उपचार के बाद का निकास, टैंक, वाटर कूलर, वेंडिंग मशीन, नल और जल बूथ से लिए गए नमूने शामिल होंगे। पानी में अवशिष्ट क्लोरीन की दैनिक निगरानी भी की जाएगी। जरूरत पड़ने पर तत्काल पुनः क्लोरीनीकरण या अन्य सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी। पेयजल आपूर्ति में शामिल सभी पाइपों में रिसाव की जांच होगी। पानी की बर्बादी रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। विशेष रूप से उन स्थानों पर ध्यान दिया जाएगा जहां पीने के पानी के लिए हैंडपंप और बोरवेल का इस्तेमाल किया जा रहा है। क्षेत्रीय रेलवे को यह सुनिश्चित करना होगा कि इन स्रोतों से मिलने वाला पानी पीने के लिए सुरक्षित हो।

कमियों की स्टेशनवार निगरानी

रेलवे बोर्ड ने क्षेत्रीय रेलवे को मौजूदा ओवरहेड और भूमिगत टैंकों के प्रतिस्थापन तथा नए टैंकों के निर्माण से जुड़े स्वीकृत कार्यों की निगरानी कर उन्हें तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इन कार्यों का सारांश तैयार किया जाएगा और जहां आवश्यक होगा, वहां नए अनुमोदन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पेयजल आपूर्ति श्रृंखला के अलग-अलग चरणों में प्रदूषण की पहचान और रोकथाम के लिए स्रोत और नल, दोनों स्तरों पर उपयुक्त प्रणालियों पर भी काम किया जाएगा। क्षेत्रीय रेलवे द्वारा पहचानी गई कमियों और उनके समाधान के लिए की गई कार्रवाई का स्टेशनवार विवरण प्रस्तुत किया जाएगा। इससे समस्याओं की व्यवस्थित निगरानी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

रेलवे कॉलोनियों में भी लागू होंगे उपाय

इस कार्ययोजना के तहत रेलवे कॉलोनियों और कार्यस्थलों की पेयजल अवसंरचना को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य यात्रियों के साथ-साथ रेलवे कर्मचारियों को भी सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। भारतीय रेलवे का कहना है कि इन समन्वित उपायों के जरिए पेयजल प्रणालियों में नियमित निरीक्षण, बुनियादी ढांचे के रखरखाव, सफाई, जल गुणवत्ता परीक्षण और सुधारात्मक कार्रवाई की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।