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नासिक में बाढ़ का कहर, 63 करोड़ के रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट को नुकसान

नासिक रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट: महाराष्ट्र के नासिक में गोदावरी नदी की बाढ़ से करीब 63 करोड़ रुपये के रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। गोडाघाट और रामकुंड के आसपास तेज जलप्रवाह से पत्थरों की फर्श और कुछ प्रकाश व्यवस्था क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। कुंभ 2027 से पहले हुए इस नुकसान ने परियोजना की मजबूती, मरम्मत और बाढ़ से निपटने की तैयारियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

Neha Sharma25 अग. 2026, 04:51 PM IST
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नासिक में बाढ़ का कहर, 63 करोड़ के रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट को नुकसान

नासिक: महाराष्ट्र के नासिक में गोदावरी नदी में आई तेज बाढ़ ने करीब 63 करोड़ रुपये की लागत वाले रिवरफ्रंट सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचाया है। यह परियोजना शहर में सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 की तैयारियों के तहत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बाढ़ के बाद परियोजना की मजबूती, निर्माण गुणवत्ता और भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने की क्षमता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।


गोदावरी में बाढ़ से क्या हुआ नुकसान?

रिपोर्ट के मुताबिक, 24 जुलाई 2026 को भारी बारिश और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण गोदावरी नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया था। गंगापुर बांध से पानी छोड़े जाने के बाद नदी ने खतरे के निशान को पार कर लिया और निचले इलाकों में पानी भर गया। इस दौरान गोडाघाट और रामकुंड के आसपास बने रिवरफ्रंट के कई हिस्से तेज बहाव और लंबे समय तक पानी के दबाव की चपेट में आए। खास तौर पर गोडाघाट पर बिछाई गई बेसाल्ट पत्थर की फर्श के कुछ हिस्से बह गए। इसके अलावा स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत लगाए गए कई दीपस्तंभ भी क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है।


63 करोड़ रुपये की परियोजना में क्या-क्या बनाया गया?

रिवरफ्रंट सौंदर्यीकरण का काम नासिक म्युनिसिपल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से करीब तीन से चार साल पहले कराया गया था।

  • 44,000 वर्ग मीटर बेसाल्ट पत्थर की फर्श
  • करीब 40 पत्थर से ढके दीपस्तंभ
  • 6 हाई-मास्ट लाइट
  • ऐतिहासिक घाटों के आसपास सार्वजनिक सुविधाओं और स्थानों का विकास

शामिल था।

इसका उद्देश्य गोदावरी के घाटों को बेहतर बनाना और धार्मिक व पर्यटन गतिविधियों के लिए नदी किनारे के क्षेत्र को विकसित करना था।


सात साल बाद आई बड़ी बाढ़

नासिक शहर में यह गोदावरी की करीब सात वर्षों में पहली बड़ी बाढ़ बताई जा रही है। तेज बहाव के कारण नदी किनारे का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया और रिवरफ्रंट पर बनी नई संरचनाओं को लगातार कई दिनों तक ऊंचे जलस्तर का सामना करना पड़ा। बाढ़ का असर केवल रिवरफ्रंट तक सीमित नहीं रहा। रामकुंड के आसपास के कुछ छोटे मंदिर भी पानी की चपेट में आए। रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ का स्तर इतना बढ़ा कि दुतोंड्या मारुति की प्रतिमा करीब तीन घंटे तक पानी में डूबी रही।


कुंभ 2027 से पहले क्यों महत्वपूर्ण है मामला?

नासिक में सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 आयोजित होना है। इस दौरान रामकुंड और आसपास के घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इसी वजह से शहर में बड़े पैमाने पर स्थायी और अस्थायी बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला प्राधिकरण के अनुसार, कुंभ के लिए निर्धारित 34,732 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय में करीब 85% राशि स्थायी बुनियादी ढांचे पर खर्च की जानी है। ऐसे समय में 63 करोड़ रुपये के रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट को नुकसान होना प्रशासन के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि कुंभ के दौरान घाटों पर सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर भारी दबाव रहने वाला है।


क्या दोबारा होगा निर्माण?

बाढ़ के बाद अब परियोजना के क्षतिग्रस्त हिस्सों का विस्तृत आकलन किया जाना है। इसके आधार पर मरम्मत और पुनर्स्थापना का काम तय किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्ट सिटी निगम को नुकसान का विस्तृत आकलन कर कुंभ मेले से पहले आवश्यक मरम्मत कराने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना को हुए कुल वित्तीय नुकसान का अंतिम आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं है।


निर्माण की मजबूती पर उठे सवाल

रिवरफ्रंट को नुकसान के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नदी के प्राकृतिक बाढ़ क्षेत्र में बनाए गए ढांचे को असाधारण जलस्तर और तेज बहाव को ध्यान में रखकर पर्याप्त रूप से डिजाइन किया गया था। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि नुकसान निर्माण गुणवत्ता में कमी के कारण ही हुआ। इसके लिए तकनीकी जांच और संरचनात्मक आकलन जरूरी होगा। प्रशासन के सामने अब यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि मरम्मत के दौरान केवल क्षतिग्रस्त हिस्सों को दोबारा बनाया ही न जाए, बल्कि भविष्य में ऐसी बाढ़ आने पर संरचना की मजबूती भी बढ़ाई जाए।


आगे क्या चुनौती?

नासिक में कुंभ 2027 से पहले बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहे हैं। ऐसे में गोदावरी के जलस्तर और बाढ़ के संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए नदी किनारे की परियोजनाओं की सुरक्षा और आपदा-रोधक क्षमता पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा। फिलहाल प्रशासन के सामने तीन प्रमुख प्राथमिकताएं हैं नुकसान का सही आकलन, समय पर मरम्मत और भविष्य की बाढ़ के लिए बेहतर तैयारी। रिवरफ्रंट परियोजना को हुआ नुकसान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल एक सौंदर्यीकरण परियोजना नहीं, बल्कि कुंभ से पहले नासिक के नदी किनारे के बुनियादी ढांचे का हिस्सा है।