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रुपये पर दबाव के बीच RBI का हस्तक्षेप, डॉलर के मुकाबले मुद्रा में सुधार

रुपया-डॉलर अपडेट: कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और डॉलर की बढ़ती मांग के बीच भारतीय रुपये पर दबाव बना हुआ है। 25 अगस्त 2026 को RBI के विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप की खबर सामने आई, जिसके बाद रुपये की गिरावट सीमित रही। कारोबारियों के मुताबिक, सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर की बिक्री देखी गई। दिन के अंत में रुपया करीब 95.41 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। ईरान-अमेरिका तनाव और तेल की कीमतें आने वाले दिनों में रुपये की दिशा के लिए अहम रहेंगी।

Neha Sharma25 अग. 2026, 04:52 PM IST
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रुपये पर दबाव के बीच RBI का हस्तक्षेप, डॉलर के मुकाबले मुद्रा में सुधार

मुंबई: कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी डॉलर की लगातार मांग के बीच भारतीय रुपये पर दबाव बना हुआ है। इसी बीच 25 अगस्त 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने की संभावना सामने आई है। कारोबारियों के अनुसार, सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर की बिक्री देखी गई, जिसे RBI की ओर से रुपये में तेज गिरावट रोकने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। मंगलवार के शुरुआती कारोबार में रुपया करीब 95.74 रुपये प्रति डॉलर पर था। हालांकि दिन के दौरान मुद्रा ने बाद में मजबूती दिखाई और कारोबारी सत्र के अंत में रुपया 95.4125 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।


RBI ने क्यों किया हस्तक्षेप?

विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये पर इस समय कई बाहरी दबाव हैं। सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% से अधिक हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय तेल कीमत बढ़ने पर भारतीय आयातकों को अधिक डॉलर की जरूरत पड़ती है। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आ सकता है। इसके अलावा भारतीय कंपनियों की डॉलर मांग भी रुपये को कमजोर करने वाले कारकों में शामिल है। कारोबारियों के मुताबिक, इन परिस्थितियों में RBI की बाजार में मौजूदगी ने रुपये की गिरावट को सीमित करने में मदद की।


सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर की बिक्री

RBI के हस्तक्षेप का सीधा आधिकारिक आंकड़ा हर कारोबारी सत्र में तुरंत उपलब्ध नहीं होता। लेकिन बाजार कारोबारियों के अनुसार, सरकारी बैंकों को डॉलर बेचते हुए देखा गया, जिसे केंद्रीय बैंक की ओर से रुपये को सहारा देने का संकेत माना गया। इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य किसी निश्चित विनिमय दर को बनाए रखना जरूरी नहीं होता। आम तौर पर केंद्रीय बैंक अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने और बाजार में व्यवस्थित कारोबार बनाए रखने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है।


रुपया 96 के स्तर के करीब क्यों महत्वपूर्ण है?

रुपया हाल के दिनों में 96 रुपये प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब रहा है। 19 अगस्त को रुपया लगभग 95.75 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था और उस समय भी कारोबारियों ने RBI के हस्तक्षेप को गिरावट सीमित करने वाला महत्वपूर्ण कारक बताया था। बाजार में लगातार RBI की मौजूदगी से कारोबारियों के लिए रुपये के खिलाफ बड़े दांव लगाना भी अपेक्षाकृत मुश्किल हो सकता है। इसका एक असर यह है कि मुद्रा में अचानक और तेज उतार-चढ़ाव सीमित रह सकता है।


ईरान-अमेरिका तनाव का भी असर

रुपये पर दबाव का एक महत्वपूर्ण कारण ईरान-अमेरिका तनाव भी है। मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बाजार में चिंता बढ़ सकती है। इससे तेल की कीमतों में तेजी और भारत के आयात बिल पर दबाव का खतरा रहता है। 25 अगस्त को कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड में बाद में गिरावट आई और यह करीब 89.2 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जिससे रुपये को कुछ राहत मिली।


RBI के हस्तक्षेप से क्या फायदा?

केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप से रुपये में अचानक तेज गिरावट को रोकने में मदद मिल सकती है। इसका असर आयातकों और व्यापक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। अगर रुपया बहुत तेजी से कमजोर होता है तो डॉलर में भुगतान करने वाली कंपनियों के लिए आयात महंगा हो सकता है। इसका असर खासतौर पर तेल, मशीनरी और अन्य डॉलर आधारित आयात पर पड़ सकता है। वहीं, रुपये को स्थिर रखने से कारोबारियों और कंपनियों के लिए विदेशी मुद्रा जोखिम को संभालना कुछ आसान हो सकता है।


क्या RBI रुपये को एक निश्चित स्तर पर रखना चाहता है?

यह समझना जरूरी है कि RBI का उद्देश्य किसी एक निश्चित डॉलर-रुपया दर को स्थायी रूप से बनाए रखना जरूरी नहीं है। केंद्रीय बैंक आम तौर पर बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को कम करने और विदेशी मुद्रा बाजार के सुचारु संचालन पर ध्यान देता है। हाल के दिनों में रुपये की सीमित उतार-चढ़ाव वाली चाल इसी बात की ओर संकेत करती है कि RBI बाजार में सक्रिय बना हुआ है। Reuters के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताह में केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप से रुपये की अस्थिरता एशिया की कई अन्य मुद्राओं की तुलना में कम रही है।


भारत के लिए आगे क्या चुनौती?

  • कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत
  • ईरान-अमेरिका और मध्य-पूर्व की स्थिति
  • अमेरिकी डॉलर की वैश्विक मजबूती
  • विदेशी निवेश का प्रवाह
  • भारतीय कंपनियों की डॉलर मांग
  • RBI की विदेशी मुद्रा बाजार में गतिविधि

भारत के लिए महंगा तेल खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में लंबे समय तक तेल की कीमतें ऊंची रहने पर रुपये और महंगाई दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।


फिलहाल रुपये की स्थिति क्या है?

25 अगस्त को रुपये ने शुरुआती कमजोरी के बाद दिन के अंत में मजबूती दिखाई। 95.4125 प्रति डॉलर का बंद स्तर पिछले सत्र की तुलना में करीब 0.3% मजबूत था। Reuters के मुताबिक, तेल की कीमतों में गिरावट और RBI की लगातार बाजार मौजूदगी ने रुपये को सहारा दिया। इसलिए फिलहाल तस्वीर यह है कि RBI रुपये में तेज गिरावट को रोकने के लिए सक्रिय दिखाई दे रहा है, लेकिन मुद्रा की दीर्घकालिक दिशा कच्चे तेल, वैश्विक डॉलर मांग और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।