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गोल्ड लोन बाजार पर बड़े कॉरपोरेट की नजर, नए खिलाड़ियों से बढ़ी चुनौती

गोल्ड लोन बाजार: भारत के तेजी से बढ़ते गोल्ड लोन कारोबार में अब बड़े कॉरपोरेट समूह भी तेजी से उतर रहे हैं। टाटा कैपिटल, आदित्य बिड़ला कैपिटल और गोदरेज कैपिटल ने इस क्षेत्र में विस्तार की योजनाएं बनाई हैं। बढ़ती सोने की कीमतों, सुरक्षित कर्ज की मांग और विशाल घरेलू स्वर्ण भंडार के कारण कंपनियां इस बाजार को बड़े कारोबारी अवसर के रूप में देख रही हैं। नए खिलाड़ियों की एंट्री से मुथूट फाइनेंस और मणप्पुरम फाइनेंस जैसी स्थापित कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।

Neha Sharma25 अग. 2026, 04:52 PM IST
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गोल्ड लोन बाजार पर बड़े कॉरपोरेट की नजर, नए खिलाड़ियों से बढ़ी चुनौती

मुंबई: भारत का Gold Loan Market अब सिर्फ पारंपरिक गोल्ड-लोन कंपनियों तक सीमित नहीं रह गया है। टाटा कैपिटल, गोदरेज कैपिटल और आदित्य बिड़ला कैपिटल जैसे बड़े वित्तीय समूह इस क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रहे हैं। हालिया कदमों से संकेत मिलता है कि बड़े कॉरपोरेट अब गोल्ड लोन को एक महत्वपूर्ण secured retail lending business के रूप में देख रहे हैं।


गोल्ड लोन बाजार कितना बड़ा हो गया?

भारत में सोने के बदले दिए जाने वाले कर्ज का आकार तेजी से बढ़ा है। मई 2026 तक गोल्ड ज्वैलरी के बदले बकाया लोन करीब ₹3.3 लाख करोड़ पहुंच गया था। रिपोर्टों के मुताबिक, इस क्षेत्र में हाल के महीनों में तेज वृद्धि दर्ज हुई है। Business Standard के अनुसार, व्यापक गोल्ड-लोन बाजार FY26 में करीब 34% की CAGR से बढ़कर लगभग ₹18.6 लाख करोड़ हो गया और यह खुदरा ऋण का करीब 11% हिस्सा था।


टाटा कैपिटल ने क्या किया?

Tata Capital ने केरल की Yogakshemam Loans (Yogloans) में करीब 88.56% हिस्सेदारी खरीदने का समझौता किया। इस सौदे से टाटा कैपिटल को पहले से मौजूद गोल्ड-लोन नेटवर्क और ग्राहक आधार तक सीधी पहुंच मिली। मार्च 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, Yogloans के पास करीब 162 शाखाएं, लगभग 32,000 ग्राहक और ₹700 करोड़ से ज्यादा का लोन बुक था।


गोदरेज कैपिटल की भी एंट्री

Godrej Capital ने भी गोल्ड-लोन कारोबार में विस्तार के लिए Kanakadurga Finance के गोल्ड-लोन कारोबार का अधिग्रहण किया। इस सौदे से करीब ₹280 करोड़ का लोन पोर्टफोलियो, लगभग 12,000 ग्राहक और 54 शाखाएं गोदरेज के नेटवर्क में आईं। कंपनी ने आगे चलकर करीब ₹5,000 करोड़ का गोल्ड-लोन बुक बनाने का लक्ष्य रखा है।


आदित्य बिड़ला कैपिटल का सबसे बड़ा विस्तार प्लान

Aditya Birla Capital ने 20 अगस्त को गोल्ड-लोन कारोबार में सीधे प्रवेश की घोषणा की। कंपनी ने अगले तीन वर्षों में करीब 1,000 समर्पित गोल्ड-लोन शाखाएं खोलने की योजना बनाई है। मार्च 2027 तक 200-300 शाखाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। कंपनी शाखाओं के साथ डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल भी करेगी और शहरी तथा अर्ध-शहरी बाजारों को लक्ष्य बनाएगी। कंपनी के मुताबिक, यह कारोबार उसके मौजूदा Retail और MSME Lending कारोबार का विस्तार होगा।


बड़े कॉरपोरेट गोल्ड लोन पर दांव क्यों लगा रहे हैं?

इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है secured lending की बढ़ती अहमियत। गोल्ड लोन में कर्ज के बदले सोना गिरवी रखा जाता है, इसलिए यह बिना गारंटी वाले व्यक्तिगत कर्ज की तुलना में अलग जोखिम प्रोफाइल रखता है। पिछले कुछ वर्षों में बिना गारंटी वाले कर्ज की तेज वृद्धि पर नियामकीय निगरानी बढ़ी है। ऐसे माहौल में वित्तीय कंपनियां सुरक्षित संपत्ति से जुड़े कर्ज के कारोबार को बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं।

  • सोना आसानी से मूल्यांकित किया जा सकता है।
  • ऋण के लिए संपत्ति को गिरवी रखने की जरूरत होती है।
  • पारंपरिक संपत्ति ऋण की तुलना में प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज हो सकती है।
  • भारत में परिवारों के पास बड़ी मात्रा में सोना मौजूद है।
  • बढ़ती सोने की कीमतों से गिरवी रखे जाने वाले सोने का मूल्य भी बढ़ा है।

पारंपरिक कंपनियों के सामने बढ़ेगी चुनौती

अब तक गोल्ड लोन कारोबार में Muthoot Finance और Manappuram Finance जैसे विशेषज्ञ NBFC प्रमुख नाम रहे हैं। नए बड़े खिलाड़ियों के आने से इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। नए कॉरपोरेट खिलाड़ियों के पास बड़ा पूंजी आधार, तकनीकी ढांचा और पहले से मौजूद ग्राहक नेटवर्क है। इससे वे तेजी से नए क्षेत्रों में शाखाएं खोल सकते हैं। हालांकि, गोल्ड लोन कारोबार में केवल पूंजी पर्याप्त नहीं है। सोने का सही मूल्यांकन, सुरक्षित भंडारण, शाखा सुरक्षा, ग्राहक सेवा और नीलामी प्रक्रिया जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता भी महत्वपूर्ण होती है। इसी कारण टाटा और गोदरेज ने मौजूदा कारोबारों के अधिग्रहण का रास्ता अपनाया, जबकि आदित्य बिड़ला कैपिटल ने अपना नेटवर्क खुद खड़ा करने का विकल्प चुना है।


नियामकीय बदलाव भी महत्वपूर्ण

गोल्ड लोन बाजार में विस्तार ऐसे समय हो रहा है जब RBI ने इस क्षेत्र के लिए नियमों और जोखिम प्रबंधन पर ज्यादा जोर दिया है। अप्रैल 2026 से लागू नए प्रावधानों ने गोल्ड-लोन कारोबार में पारदर्शिता और जोखिम नियंत्रण को और महत्वपूर्ण बनाया है। इसका मतलब है कि बड़े खिलाड़ियों को केवल तेजी से शाखाएं खोलने के बजाय सही मूल्यांकन, जोखिम प्रबंधन और अनुपालन पर भी ध्यान देना होगा।


ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा?

बड़ी कंपनियों की एंट्री से गोल्ड लोन बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। इससे अलग-अलग कंपनियां ब्याज दर, ग्राहक सेवा, डिजिटल सुविधा और शाखा नेटवर्क के आधार पर ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश कर सकती हैं। हालांकि, गोल्ड लोन लेते समय ग्राहक के लिए ब्याज दर के साथ ऋण की शर्तें, शुल्क, पुनर्भुगतान नियम और गिरवी रखे सोने से जुड़े नियम समझना महत्वपूर्ण होता है।


आगे क्या?

गोल्ड लोन बाजार अब एक मुख्यधारा के खुदरा ऋण कारोबार में बदलता दिखाई दे रहा है। टाटा कैपिटल और गोदरेज कैपिटल के अधिग्रहण तथा आदित्य बिड़ला कैपिटल की 1,000 शाखाओं की योजना इस बदलाव को स्पष्ट करती है। आने वाले समय में प्रतिस्पर्धा सिर्फ शाखाओं की संख्या पर नहीं, बल्कि कम लागत, बेहतर तकनीक, सुरक्षित गोल्ड हैंडलिंग, ग्राहक भरोसे और मजबूत जोखिम प्रबंधन पर होगी। यानी भारत में Gold Loan Business अब छोटे क्षेत्रीय कारोबार से निकलकर बड़े कॉरपोरेट वित्तीय कारोबार की दिशा में बढ़ रहा है।