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सरकारी जमीन का मुफ्त आवंटन रद्द, तेलंगाना को मिलेगी ₹600 करोड़ की जमीन

तेलंगाना Government Land News: हैदराबाद के रायदुर्ग इलाके में करीब 3.70 एकड़ जमीन, जिसकी मौजूदा कीमत लगभग ₹600 करोड़ बताई जा रही है, अब तेलंगाना सरकार वापस लेने की प्रक्रिया में है। यह जमीन 2021 में International Arbitration and Mediation Centre (IAMC) को मुफ्त में आवंटित की गई थी। तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा आवंटन रद्द किए जाने के बाद Supreme Court ने भी फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार किया, जिसके बाद सरकार ने जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की है।

Neha Sharma25 अग. 2026, 05:15 PM IST
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सरकारी जमीन का मुफ्त आवंटन रद्द, तेलंगाना को मिलेगी ₹600 करोड़ की जमीन

हैदराबाद: तेलंगाना सरकार ने हैदराबाद के रायदुर्ग क्षेत्र में 3.70 एकड़ प्राइम जमीन को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस जमीन की मौजूदा कीमत करीब ₹600 करोड़ बताई जा रही है। यह जमीन पिछली बीआरएस सरकार ने 2021 में इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन एंड मेडिएशन सेंटर (IAMC) को बिना बाजार मूल्य लिए आवंटित की थी। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमीन आवंटन रद्द किए जाने के फैसले को बरकरार रखने के बाद राज्य सरकार इसे वापस लेने जा रही है।


क्या है पूरा मामला?

मामला हैदराबाद के रायदुर्ग इलाके की सर्वे नंबर 83/1 में स्थित करीब 3.70 एकड़ जमीन का है। दिसंबर 2021 में तत्कालीन तेलंगाना सरकार ने यह जमीन IAMC को मुफ्त में आवंटित की थी। IAMC को हैदराबाद में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और विवाद समाधान से जुड़ी संस्था के रूप में विकसित करने की योजना थी। इसके अलावा पिछली सरकार ने केंद्र को आर्थिक सहायता भी दी थी। बाद में इस जमीन के मुफ्त आवंटन को लेकर कानूनी चुनौती दी गई और मामला तेलंगाना हाईकोर्ट पहुंचा।


हाईकोर्ट ने क्यों रद्द किया था आवंटन?

तेलंगाना हाईकोर्ट ने जून 2025 में जमीन आवंटन को रद्द कर दिया था। अदालत के अनुसार, राज्य सरकार ने जमीन आवंटित करने की प्रक्रिया में जल्दबाजी की और लागू भूमि आवंटन नियमों का पालन नहीं किया। अदालत ने यह भी कहा था कि निजी संस्था को सरकारी जमीन मुफ्त में देने के लिए संबंधित नियमों और बाजार मूल्य से जुड़े प्रावधानों का पालन जरूरी है। हाईकोर्ट ने IAMC को बढ़ावा देने की सरकारी नीति पर पूरी तरह आपत्ति नहीं जताई, लेकिन जमीन मुफ्त में देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।


सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

IAMC ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। लेकिन फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इससे जमीन का मुफ्त आवंटन रद्द करने का फैसला बरकरार रहा। बाद में IAMC की समीक्षा याचिका भी खारिज हो गई। यही कानूनी स्थिति अब तेलंगाना सरकार के जमीन वापस लेने के फैसले का आधार बनी है।


अब सरकार क्या करने जा रही है?

रायदुर्ग और नॉलेज सिटी क्षेत्र की जमीन की देखरेख करने वाली तेलंगाना इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन (TGIIC) ने जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। TGIIC सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा, जिसके बाद औपचारिक resumption orders जारी किए जाने की उम्मीद है। इन आदेशों के जरिए पहले जारी जमीन आवंटन से संबंधित सरकारी आदेश को रद्द कर जमीन को वापस सरकारी नियंत्रण में लिया जाएगा।


₹600 करोड़ की जमीन इतनी महत्वपूर्ण क्यों?

रायदुर्ग का इलाका हैदराबाद के Knowledge City और Financial District के पास स्थित प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र है। यहां जमीन की कीमतों में पिछले वर्षों में काफी वृद्धि हुई है। TGIIC ने इसी सर्वे नंबर के आसपास जमीन की नीलामी में बहुत ऊंची कीमतें हासिल की हैं। एक हालिया नीलामी में करीब एक एकड़ जमीन के लिए ₹264 करोड़ तक की कीमत मिलने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों का अनुमान है कि भविष्य में वापस ली गई जमीन को भी ऊंची कीमत पर नीलाम किया जा सकता है।


क्या IAMC को दूसरी जमीन मिल सकती है?

जमीन वापस लेने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि सरकार IAMC को पूरी तरह समर्थन नहीं देगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यदि IAMC नई जमीन के लिए प्रस्ताव देता है तो सरकार किसी दूसरे स्थान पर जमीन देने पर विचार कर सकती है। हालांकि, इस बार जमीन बिना बाजार मूल्य लिए मुफ्त में देने के बजाय निर्धारित कीमत पर आवंटित किए जाने की संभावना है।


सरकार के लिए इसका क्या मतलब?

इस फैसले से सरकार के पास हैदराबाद के बेहद महंगे व्यावसायिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण जमीन फिर से आ जाएगी। इसके भविष्य के उपयोग को लेकर कई विकल्प हो सकते हैं, जिनमें सरकारी परियोजना या नीलामी शामिल हैं। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के दिनों में रायदुर्ग क्षेत्र की सरकारी जमीन की नीलामी को लेकर भी चर्चा और कानूनी विवाद चल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2026 में रायदुर्ग पनमक्था की कुछ अन्य जमीनों की प्रस्तावित नीलामी में हस्तक्षेप करने से इनकार किया था।


आगे क्या होगा?

फिलहाल अगला महत्वपूर्ण कदम TGIIC की रिपोर्ट और सरकार के औपचारिक resumption orders होंगे। इसके बाद जमीन का सरकारी रिकॉर्ड में पुनः हस्तांतरण और भविष्य के उपयोग को लेकर फैसला किया जा सकता है। कुल मिलाकर, यह मामला सरकारी जमीन के आवंटन, सार्वजनिक संपत्ति के इस्तेमाल और अदालत के निर्देशों के पालन से जुड़ा महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है। करीब ₹600 करोड़ मूल्य की जमीन के वापस सरकारी नियंत्रण में आने से रायदुर्ग की जमीन नीति और भविष्य की नीलामी पर भी नजर रहेगी।