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गुवाहाटी में रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाया, 60 मकानों पर चला बुलडोजर

गुवाहाटी Government Land News: असम के गुवाहाटी स्थित बामुनिमैदाम इलाके में रेलवे की जमीन पर कथित अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई। 24 अगस्त को रेलवे पुलिस, असम पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी में करीब 60 मकानों को ध्वस्त किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, प्रभावित लोगों को पहले जमीन खाली करने के नोटिस दिए गए थे। कार्रवाई के दौरान कुछ परिवारों ने विरोध करते हुए अतिरिक्त समय और वैकल्पिक आवास की मांग की। खाली कराई गई जमीन के भविष्य में उपयोग को लेकर भी योजना पर चर्चा है।

Neha Sharma25 अग. 2026, 05:16 PM IST
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गुवाहाटी में रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाया, 60 मकानों पर चला बुलडोजर

गुवाहाटी: असम के गुवाहाटी स्थित बामुनिमैदाम रेलवे कॉलोनी में 24 अगस्त 2026 को रेलवे की जमीन से कथित अतिक्रमण हटाने के लिए बड़ा अभियान चलाया गया। कार्रवाई के दौरान करीब 60 मकानों को ध्वस्त किया गया। रेलवे पुलिस ने असम पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की मदद से अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए, क्योंकि प्रभावित परिवारों के विरोध के चलते इलाके में तनाव की स्थिति बन गई थी।


क्या है पूरा मामला?

बामुनिमैदाम इलाके में रेलवे की जमीन पर लंबे समय से कई परिवारों के रहने की बात सामने आई थी। रेलवे अधिकारियों ने इन निर्माणों को अनधिकृत कब्जा बताया और जमीन खाली कराने के लिए संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए। रिपोर्टों के मुताबिक, निवासियों को पहले 21 अगस्त तक जमीन खाली करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद उन्हें तीन दिन का अतिरिक्त समय दिया गया। समयसीमा समाप्त होने के बाद भी मकान खाली नहीं किए गए, जिसके बाद 24 अगस्त को रेलवे प्रशासन ने ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया।


भारी सुरक्षा के बीच चला अभियान

कार्रवाई के दौरान रेलवे पुलिस के साथ असम पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच खुदाई मशीनों और अन्य उपकरणों की मदद से मकानों को हटाया। अभियान शुरू होने पर कई निवासी कार्रवाई का विरोध करने लगे। कुछ लोग खुदाई मशीनों के सामने खड़े हो गए और मकानों को तोड़े जाने से रोकने की कोशिश की। इसके कारण इलाके में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बना रहा। हालांकि, सुरक्षा बलों की मौजूदगी में कार्रवाई आगे बढ़ी और करीब 60 मकानों को हटा दिया गया।


परिवारों ने क्यों किया विरोध?

कार्रवाई से प्रभावित परिवारों का कहना था कि उन्हें घर खाली करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। उनका दावा था कि अचानक घर खाली करने से पहले वैकल्पिक आवास तलाशना, सामान दूसरी जगह ले जाना और बच्चों की व्यवस्था करना मुश्किल था। कुछ परिवारों में स्कूल जाने वाले बच्चे भी हैं। निवासियों ने कहा कि कम समय में किराये का घर ढूंढना आसान नहीं है, खासकर तब जब आसपास किराये अपेक्षाकृत महंगे हैं। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, इलाके में किराये के मकानों का खर्च करीब ₹15,000 से ₹20,000 प्रति माह तक हो सकता है। हालांकि, ये किराये के आंकड़े स्थानीय निवासियों के दावे हैं और इन्हें किसी आधिकारिक किराया सर्वे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।


खाली कराई गई जमीन का क्या होगा?

रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि खाली कराई गई जमीन पर उद्यान विकसित करने का प्रस्ताव है। हालांकि, जमीन के अंतिम उपयोग को लेकर विस्तृत आधिकारिक योजना अभी स्पष्ट नहीं है। यही वजह है कि प्रभावित परिवारों ने सवाल उठाया कि जमीन के भविष्य के इस्तेमाल के साथ-साथ उनके पुनर्वास और तत्काल आवास की समस्या पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।


रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण का मुद्दा

रेलवे की जमीन देशभर में बड़े सार्वजनिक भूमि-संसाधनों में शामिल है। ऐसी जमीन पर बिना अनुमति निर्माण होने पर रेलवे प्रशासन को उसे खाली कराने की कानूनी प्रक्रिया का अधिकार होता है। गुवाहाटी में यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रेलवे भूमि से जुड़े अतिक्रमण मामलों में भूमि की सही सीमा तय करना और संबंधित लोगों के दावों की जांच भी अहम होती है। मार्च 2026 में गौहाटी हाईकोर्ट के एक मामले में भी रेलवे भूमि पर कथित अतिक्रमण को लेकर सीमा-निर्धारण और दस्तावेजों की जांच का मुद्दा सामने आया था। वहीं, जुलाई 2026 में गौहाटी हाईकोर्ट ने एक अलग भूमि-अतिक्रमण मामले में कहा था कि जहां किसी व्यक्ति को अनधिकृत कब्जे का नोटिस दिया जाता है, वहां उसके जवाब और दस्तावेजों पर विचार करके व्यक्तिगत आदेश पारित करना जरूरी है। यह मामला बामुनिमैदाम की कार्रवाई से अलग है, इसलिए इसे इस ध्वस्तीकरण के सीधे न्यायिक आदेश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।


विस्थापन का मानवीय पहलू

इस कार्रवाई ने सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के बीच संतुलन का सवाल भी खड़ा किया है। रेलवे के लिए अपनी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराना जरूरी है, लेकिन दूसरी ओर लंबे समय से वहां रह रहे परिवारों के लिए मकान टूटने के बाद तुरंत वैकल्पिक आवास की व्यवस्था बड़ी चुनौती बन गई है। प्रभावित परिवारों ने अतिरिक्त समय और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की थी, लेकिन प्रशासन ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अभियान आगे बढ़ाया।


कार्रवाई के बाद अब क्या?

ध्वस्तीकरण के बाद सबसे बड़ा सवाल प्रभावित परिवारों की आगे की व्यवस्था का है। कई परिवारों को तत्काल दूसरी जगह रहने की व्यवस्था करनी होगी। दूसरी ओर रेलवे के सामने खाली कराई गई जमीन को सुरक्षित रखना और भविष्य की योजना के अनुसार उसका इस्तेमाल करना अगला कदम होगा। यह घटना गुवाहाटी में रेलवे भूमि, सरकारी संपत्ति, अतिक्रमण और शहरी विकास से जुड़े बड़े मुद्दे को सामने लाती है। साथ ही यह भी दिखाती है कि सरकारी जमीन खाली कराने की कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया के साथ प्रभावित परिवारों की पुनर्वास संबंधी जरूरतें भी महत्वपूर्ण रहती हैं।