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वाराणसी में साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क: 860 म्यूल खातों में पहुंची 12 करोड़ की रकम, 18 गिरफ्तार
वाराणसी में साइबर ठगी के पैसों की जांच के दौरान 860 संदिग्ध म्यूल बैंक खातों का नेटवर्क सामने आया है। पुलिस के मुताबिक पिछले छह महीनों में आठ राज्यों से करीब 12 करोड़ रुपये इन खातों तक पहुंचे। पिछले तीन महीनों में ऐसे खातों से जुड़े 22 मामले दर्ज किए गए और 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब रकम को नियंत्रित करने वाले मुख्य संचालकों और अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

860 म्यूल खातों तक पहुंची करोड़ों की रकम
वाराणसी में साइबर अपराध की जांच के दौरान पुलिस को बैंक खातों के ऐसे नेटवर्क का पता चला है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया गया। जांच के मुताबिक करीब 860 संदिग्ध म्यूल खातों में पिछले छह महीनों के दौरान आठ राज्यों से लगभग 12 करोड़ रुपये की रकम पहुंची। म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है जिनका इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति या गिरोह की अवैध रकम को प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए किया जाता है। इस मामले में पुलिस को शक है कि कई खाताधारकों ने कमीशन या आसान कमाई के लालच में अपने खाते उपलब्ध कराए।
तीन महीने में 22 मामले, 18 गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार पिछले तीन महीनों में म्यूल खातों से जुड़े 22 मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में अब तक 18 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए कई लोगों की भूमिका कथित तौर पर अपने बैंक खाते उपलब्ध कराने और लेनदेन के बदले कमीशन लेने तक सीमित थी। हालांकि, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इन लोगों को रकम के वास्तविक स्रोत और साइबर अपराध से जुड़े इस्तेमाल की कितनी जानकारी थी। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जांच की जा रही है, ताकि उन लोगों की पहचान की जा सके जो इन खातों को संचालित करने के निर्देश देते थे।
चेतगंज, भेलूपुर और सारनाथ बने जांच के केंद्र
म्यूल खातों से जुड़े 22 मामलों में चेतगंज, भेलूपुर और सारनाथ थाना क्षेत्रों में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। इन तीन थाना क्षेत्रों से कुल 14 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक कुछ लोगों ने घर बैठे कमाई या कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन खातों की जानकारी आरोपियों तक कौन पहुंचाता था और लेनदेन के निर्देश कहां से आते थे।
अनुराग मौर्य के खाते में मिला 8 करोड़ का लेनदेन
जांच के दौरान सारनाथ के कोटवां निवासी अनुराग मौर्य का बैंक खाता भी पुलिस के रडार पर आया। पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित तीन शिकायतें मिली थीं। करीब दो साल के बैंक रिकॉर्ड की जांच करने पर खाते से लगभग 8 करोड़ रुपये का लेनदेन सामने आया। इसके बाद साइबर सेल ने मामला दर्ज किया और रकम के स्रोत तथा उसके आगे के लेनदेन की जांच शुरू की। हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात है—8 करोड़ रुपये का पूरा लेनदेन साइबर ठगी की रकम था, यह अभी साबित नहीं हुआ है। पुलिस यह पता लगा रही है कि इस रकम में से कितनी राशि कथित साइबर अपराध से संबंधित थी और पैसा किन खातों में पहुंचा या किन माध्यमों से निकाला गया।
ऐसे छिपाई जाती थी रकम की मनी ट्रेल
जांच में लेयरिंग का पैटर्न सामने आया है। आरोप है कि साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन निवेश जैसी धोखाधड़ी से हासिल रकम को सीधे अपराधियों के खाते में भेजने के बजाय पहले म्यूल खातों में डाला जाता था। इसके बाद रकम को कई बैंक खातों में तेजी से ट्रांसफर किया जाता था। कई स्तरों पर लेनदेन होने से रकम के मूल स्रोत और अंतिम लाभार्थी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। जांच एजेंसियां अब इन लेनदेन की पूरी कड़ी तैयार कर रही हैं। इसके लिए बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, डिजिटल लेनदेन और एटीएम से हुई निकासी की जानकारी का विश्लेषण किया जा रहा है।
खाते किराये पर लेने की भी जांच
पुलिस की जांच में ऐसे मामलों की भी आशंका सामने आई है जहां लोगों के बैंक खाते कमीशन के बदले इस्तेमाल किए गए या चालू खाते किराये पर लिए गए। कुछ मामलों में दूसरे लोगों के नाम पर खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। वाराणसी पुलिस की जुलाई की एक अलग कार्रवाई में भी पांच आरोपियों को कथित तौर पर म्यूल बैंक खाते और लेनदेन से जुड़े संसाधन उपलब्ध कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उस मामले में मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किए थे। यह कार्रवाई मौजूदा 860 खातों वाली जांच से अलग मामला है, लेकिन इससे वाराणसी में म्यूल अकाउंट नेटवर्क के खिलाफ चल रही कार्रवाई की व्यापकता सामने आती है।
बैंक और साइबर सेल मिलकर कर रहे जांच
पुलिस संदिग्ध लेनदेन की जानकारी जुटाने के लिए बैंकों से भी सहयोग ले रही है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों को संबंधित बैंक खातों और लेनदेन से जोड़कर देखा जा रहा है। कई खाते अभी भी जांच के दायरे में हैं। पुलिस का उद्देश्य सिर्फ खाताधारकों तक पहुंचना नहीं, बल्कि उस नेटवर्क की अंतिम कड़ी तक पहुंचना है जहां से रकम को नियंत्रित किया जा रहा था।
सरगना और अंतिम लाभार्थी अभी जांच के दायरे में
18 गिरफ्तारियों के बावजूद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती कथित मास्टरमाइंड और अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचने की है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस उन लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है जो बैंक खातों का इंतजाम, रकम के ट्रांसफर और निकासी के निर्देश देते थे। इसलिए फिलहाल ₹12 करोड़ को जब्त रकम या बरामद रकम कहना सही नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह रकम आठ राज्यों से 860 संदिग्ध म्यूल खातों में पहुंचने वाला मनी ट्रेल/लेनदेन है। इसी तरह अनुराग मौर्य के खाते में मिले ₹8 करोड़ को भी जांच पूरी होने से पहले पूरी तरह साइबर ठगी की रकम कहना उचित नहीं है।
साइबर ठगी के बदलते तरीके पर बड़ा संकेत
वाराणसी की यह जांच दिखाती है कि ऑनलाइन ठगी का नेटवर्क केवल ठग और पीड़ित के बीच सीधे लेनदेन तक सीमित नहीं रह गया है। कथित तौर पर कई स्तर के बैंक खातों, कमीशन पर उपलब्ध कराए गए खातों और तेजी से किए गए डिजिटल ट्रांसफर के जरिए रकम की पहचान छिपाने की कोशिश की जाती है। पुलिस की मौजूदा जांच में अब अगला फोकस मनी ट्रेल, डिजिटल साक्ष्य, बैंक रिकॉर्ड और अंतिम लाभार्थियों की पहचान पर है। मुख्य संचालकों तक पहुंचने के बाद ही इस नेटवर्क के पूरे आकार और दूसरे राज्यों में इसके संभावित कनेक्शन की तस्वीर स्पष्ट होगी।
