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अखिलेश-जयंत विवाद पहुंचा सड़क तक, बागपत में सपा प्रमुख के खिलाफ लगे विवादित पोस्टर

उत्तर प्रदेश के बागपत में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्टर लगाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे के पास लगे इन पोस्टरों को लेकर सपा नेताओं ने रालोद समर्थकों पर आरोप लगाए हैं। हालांकि रालोद ने संगठन की किसी भी भूमिका से इनकार किया है और पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मामला अखिलेश यादव की जयंत चौधरी पर की गई कथित ‘चवन्नी’ टिप्पणी के बाद बढ़े सियासी टकराव से जुड़ा माना जा रहा है।

sd26 अग. 2026, 01:50 PM IST
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अखिलेश-जयंत विवाद पहुंचा सड़क तक, बागपत में सपा प्रमुख के खिलाफ लगे विवादित पोस्टर

बागपत में अखिलेश यादव के खिलाफ लगे पोस्टर

बागपत में बुधवार को उस समय राजनीतिक हलचल बढ़ गई जब दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाईवे के पास समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्टर और बैनर दिखाई दिए। पोस्टरों में अखिलेश यादव के खिलाफ विवादित भाषा का इस्तेमाल किया गया था। मामला सामने आने के बाद स्थानीय सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर पोस्टर हटाए। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष बिल्लू प्रधान समेत पार्टी नेताओं ने घटना पर नाराजगी जताई और पुलिस से मामले की जांच कर पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

सपा ने रालोद समर्थकों पर लगाया आरोप

सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि पोस्टर रालोद समर्थकों की ओर से लगाए गए हैं। उनका कहना है कि यह घटना अखिलेश यादव की ओर से जयंत चौधरी को लेकर की गई ‘चवन्नी’ टिप्पणी के बाद पैदा हुए राजनीतिक विवाद की अगली कड़ी है। हालांकि, अभी तक पुलिस की ओर से पोस्टर लगाने वालों की पहचान या किसी राजनीतिक संगठन की प्रत्यक्ष भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इस मामले में रालोद को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी।

रालोद ने आरोपों से किया किनारा

रालोद के बागपत जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर ने पोस्टर प्रकरण से पार्टी को अलग करते हुए कहा कि रालोद इस तरह की राजनीति में विश्वास नहीं रखती। उन्होंने कहा कि पोस्टर जिसने भी लगाए हैं, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। रालोद की ओर से संगठन स्तर पर इस तरह के पोस्टर लगाने की बात से इनकार किया गया है। इस बयान के बाद विवाद का केंद्र अब पोस्टर लगाने वाले लोगों की पहचान और उनके पीछे मौजूद लोगों तक पहुंचने पर है।

‘चवन्नी’ वाले बयान से शुरू हुआ विवाद

दरअसल, पूरा विवाद अखिलेश यादव की एक हालिया टिप्पणी के बाद शुरू हुआ। अखिलेश यादव ने पुराने राजनीतिक सहयोगियों पर निशाना साधते हुए कहा था कि उन्होंने “चवन्नी का रुपया बना दिया”, लेकिन इसके बावजूद वे गठबंधन छोड़कर चले गए। हालांकि उन्होंने टिप्पणी में सीधे किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे जयंत चौधरी और राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के संदर्भ में देखा गया। इसके बाद जयंत चौधरी ने भी अखिलेश यादव पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अगर किसी नेता को राजनीतिक तौर पर बात करनी है तो सीधे नाम लेकर करनी चाहिए।

बागपत में क्यों बढ़ी राजनीतिक गर्मी?

बागपत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद और जयंत चौधरी की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। ऐसे में अखिलेश यादव की टिप्पणी के बाद इस क्षेत्र में सपा और रालोद के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है। 20 अगस्त को बागपत के पलड़ी गांव में रालोद के अल्पसंख्यक सम्मेलन में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलनवाज खान ने भी अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार किया था। इसके बाद दोनों दलों के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर राजनीतिक बयानबाजी बढ़ती दिखाई दी।

भाजपा और बसपा ने भी अखिलेश को घेरा

‘चवन्नी’ टिप्पणी को लेकर भाजपा और बसपा नेताओं ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। मायावती और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित कई नेताओं ने इस टिप्पणी को जयंत चौधरी के साथ-साथ जाट राजनीति और चौधरी चरण सिंह की विरासत से जोड़कर अखिलेश पर हमला बोला। भाजपा की ओर से भी अखिलेश यादव से टिप्पणी को लेकर माफी मांगने की मांग की गई।

सपा की जवाबी रणनीति भी तैयार

दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी भी इस विवाद का राजनीतिक जवाब देने की तैयारी में है। रिपोर्टों के मुताबिक सपा रणनीतिकारों ने पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़े करीब 25 वीडियो जुटाए हैं। इन वीडियो का इस्तेमाल रालोद की ओर से लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देने के लिए किया जा सकता है। हालांकि अंतिम तौर पर इनका इस्तेमाल किया जाएगा या नहीं, यह पार्टी नेतृत्व के फैसले पर निर्भर बताया गया है।

पोस्टर विवाद में अब पुलिस जांच पर नजर

बागपत में पोस्टर लगाए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन्हें किसने लगाया और इसके पीछे किसकी भूमिका थी। सपा की ओर से शिकायत और कार्रवाई की मांग के बाद पुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज, पोस्टर लगाने वालों की पहचान और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि पोस्टर लगाए जाने की घटना सामने आई है, लेकिन पोस्टर लगाने वालों और किसी राजनीतिक संगठन की प्रत्यक्ष भूमिका की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।