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फर्जी Aadhaar से विदेशी नागरिकों की पहचान छिपाने पर Bombay HC सख्त, केंद्र से Aadhaar Act में बदलाव पर विचार करने को कहा

भारत में घुसकर अगर कोई विदेशी नागरिक फर्जी दस्तावेजों के दम पर Aadhaar जैसी सरकारी पहचान हासिल कर ले, तो अब उसकी यह ‘नकली पहचान’ लंबे समय तक छिपी नहीं रह पाएगी। Bombay High Court ने ऐसे मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार और UIDAI से Aadhaar Act में जरूरी बदलाव पर विचार करने को कहा है। कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि मामला सिर्फ एक फर्जी कार्ड का नहीं, बल्कि देश की पहचान व्यवस्था, Immigration और National Security से जुड़ा गंभीर खतरा है। अदालत ने एजेंसियों को मिलकर ऐसे लोगों को ट्रेस करने, फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क तक पहुंचने, Deportation की कार्रवाई तेज करने और दोबारा भारत में प्रवेश रोकने की दिशा में कदम उठाने पर जोर दिया है।

Sonali26 अग. 2026, 03:51 PM IST
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फर्जी Aadhaar से विदेशी नागरिकों की पहचान छिपाने पर Bombay HC सख्त, केंद्र से Aadhaar Act में बदलाव पर विचार करने को कहा

फर्जी दस्तावेजों के सहारे विदेशी नागरिकों द्वारा भारतीय पहचान हासिल करने के मामले पर Bombay High Court ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने चिंता जताई कि यदि कोई विदेशी नागरिक अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर Aadhaar, PAN या दूसरे सरकारी दस्तावेज हासिल कर लेता है, तो इससे केवल दस्तावेजी धोखाधड़ी नहीं, बल्कि Immigration और National Security से जुड़े गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार और Unique Identification Authority of India (UIDAI) को Aadhaar Act में आवश्यक संशोधन या उचित प्रक्रिया पर विचार करने को कहा है, ताकि जांच एजेंसियां ऐसे लोगों को तेजी से ट्रेस कर सकें, उनकी वास्तविक पहचान और नागरिकता की पुष्टि कर सकें और जरूरत पड़ने पर उन्हें भारत से डिपोर्ट किया जा सके। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अदालत की चिंता केवल एक विदेशी नागरिक तक सीमित नहीं रही। कोर्ट ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क की जांच तथा संबंधित व्यक्तियों को दोबारा भारत में प्रवेश करने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने पर भी जोर दिया है।

27 जुलाई और 10 अगस्त के आदेशों में सामने आया बड़ा मुद्दा

Bombay High Court की Justice A.S. Gadkari और Justice Kamal Khata की डिवीजन बेंच ने इस मामले में 27 जुलाई 2026 और 10 अगस्त 2026 को महत्वपूर्ण आदेश पारित किए। अदालत के सामने ऐसे मामलों का मुद्दा था, जिनमें विदेशी नागरिकों ने कथित तौर पर अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर भारतीय सरकारी दस्तावेज हासिल किए थे। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए केवल किसी एक विभाग की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। Police, UIDAI, Immigration authorities और केंद्र व राज्य की दूसरी संबंधित agencies के बीच बेहतर coordination जरूरी है।

मामला हाईकोर्ट तक कैसे पहुंचा?

मामले की शुरुआत Mumbai Police की Crime Intelligence Unit की जांच से हुई। पुलिस ने UIDAI से यह जानकारी मांगी थी कि कथित Afghan national Majid Khan Shah Hajrat Shah alias Miraj Tahir Khan ने Aadhaar Card हासिल करने के लिए किन documents का इस्तेमाल किया था। पुलिस के अनुसार, संबंधित व्यक्ति भारत में वैध visa पर आया था, लेकिन visa की अवधि समाप्त होने के बाद भी भारत में रहा और बाद में भारतीय पहचान से जुड़े दस्तावेज हासिल किए जाने का आरोप सामने आया। UIDAI से enrollment के दौरान इस्तेमाल किए गए documents की जानकारी हासिल करने की कोशिश के बीच यह कानूनी विवाद High Court पहुंचा।

मामले का नाम है:

State of Maharashtra vs Unique Identification Authority of India & Ors.

Writ Petition No. 4406 of 2019

Aadhaar Act की Section 29 और 33(1) क्यों बनीं अहम?

मामले का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी पहलू Aadhaar Act की Sections 29 और 33(1) से जुड़ा है। UIDAI की ओर से Aadhaar Act की Section 29 के तहत information disclosure पर statutory restrictions का मुद्दा उठाया गया। दूसरी तरफ criminal investigation के संदर्भ में Section 33(1) के तहत High Court judge के आदेश के जरिए निर्धारित जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था का सवाल सामने आया। यही स्थिति अदालत के सामने एक practical difficulty के रूप में आई—अगर किसी विदेशी नागरिक ने Aadhaar हासिल करने के लिए फर्जी documents का इस्तेमाल किया है, तो investigating agency उसके enrollment के पीछे इस्तेमाल किए गए मूल documents तक कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से पहुंच सकती है? High Court ने इसी तरह की समस्याओं को देखते हुए केंद्र सरकार को मौजूदा कानूनी व्यवस्था में आवश्यक बदलाव या विशेष प्रक्रिया पर विचार करने को कहा।

कोर्ट ने कहा- सिर्फ विदेशी नागरिक को पकड़ना काफी नहीं

अदालत का फोकस केवल उन विदेशी नागरिकों पर नहीं था जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी पहचान हासिल की। Court ने उन लोगों की पहचान और जांच की जरूरत पर भी जोर दिया जो bogus या forged documents तैयार करते हैं और उन्हें विदेशी नागरिकों तक पहुंचाते हैं। इसका मतलब है कि कार्रवाई की दिशा केवल “Fake Aadhaar holder” तक सीमित न रहकर उस पूरे network तक जा सकती है, जो forged documents के जरिए सरकारी पहचान व्यवस्था का दुरुपयोग करने में मदद करता है।

Afghan और Bangladeshi nationals से जुड़े मामले

Bar & Bench की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत के सामने दो अलग परिस्थितियां भी सामने आईं। एक मामले में एक Afghan national के बारे में बताया गया कि वह tourist visa पर भारत आया था और visa की अवधि समाप्त होने के बाद भी भारत में रहा तथा Aadhaar हासिल किया। दूसरे मामले में एक Bangladeshi national द्वारा assumed name के तहत Aadhaar हासिल किए जाने का मुद्दा सामने आया।

इन मामलों ने अदालत के सामने यह सवाल रखा कि विदेशी नागरिकों की वास्तविक पहचान और उनके सरकारी दस्तावेजों के बीच संबंध को agencies किस तरह तेजी से verify करें।

Deportation के साथ दोबारा Entry रोकने पर जोर

Bombay High Court ने ऐसे मामलों में केवल deportation को अंतिम कदम नहीं माना। अदालत ने संबंधित authorities को यह सुनिश्चित करने की दिशा में भी कार्रवाई करने को कहा कि ऐसे व्यक्ति दोबारा भारत में अवैध रूप से प्रवेश न कर सकें। इसके लिए कानून के अनुसार appropriate restrictions और blacklisting जैसे कदम उठाने तथा संबंधित जानकारी और photographs को आवश्यक authorities तक पहुंचाने की बात कही गई। इससे अदालत का approach स्पष्ट होता है—पहचान करो, जांच करो, फर्जी documents की जड़ तक पहुंचो, deport करो और फिर illegal re-entry रोकने की व्यवस्था करो।

चार सप्ताह में Deportation proceedings आगे बढ़ाने का निर्देश

मामले में अदालत ने संबंधित authorities को आरोपियों की citizenship और immigration status verify करने के बाद Foreigners Act, Passport Act और Citizenship Act के तहत आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। Court ने deportation proceedings को “utmost expedition” के साथ आगे बढ़ाने और चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया।

Aadhaar Card भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं

इस मामले का एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी पहलू यह है कि Aadhaar Card को भारतीय citizenship का proof समझना सही नहीं है। Bombay High Court ने अगस्त 2025 में भी स्पष्ट किया था कि केवल Aadhaar Card, PAN Card या Voter ID रखने से कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं बन जाता। किसी व्यक्ति की citizenship का निर्धारण Citizenship Act, 1955 के तहत होता है। इसलिए किसी विदेशी नागरिक द्वारा Aadhaar हासिल कर लेना अपने आप उसे भारतीय नागरिक का कानूनी दर्जा नहीं देता।

Aadhaar और Citizenship में फर्क समझिए

Aadhaar मुख्य रूप से identity और विभिन्न सरकारी सेवाओं तक पहुंच के लिए इस्तेमाल होने वाला पहचान नंबर है। वहीं citizenship एक अलग कानूनी स्थिति है, जिसका निर्धारण संबंधित नागरिकता कानूनों के तहत होता है। यही अंतर मौजूदा मामले में बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि कोई विदेशी नागरिक गलत या forged documents के जरिए Aadhaar हासिल कर लेता है, तो उससे भारतीय citizenship पैदा नहीं होती; लेकिन वह फर्जी identity सरकारी व्यवस्था के दुरुपयोग का माध्यम बन सकती है।

National Security का एंगल क्यों महत्वपूर्ण?

Court की चिंता का सबसे बड़ा पहलू यही है कि forged identity केवल एक व्यक्ति की गलत पहचान तक सीमित नहीं रहती।

अगर किसी विदेशी नागरिक को फर्जी documents के आधार पर Aadhaar और अन्य सरकारी पहचान मिल जाती है, तो उसके बाद address proof, financial services, mobile connections या दूसरी सुविधाओं तक पहुंच बन सकती है। इससे विभिन्न सरकारी databases में गलत identity establish होने का खतरा बढ़ सकता है।

इसीलिए अदालत ने इसे केवल “Aadhaar fraud” की तरह देखने के बजाय agencies के बीच coordinated response की जरूरत पर जोर दिया है।

Court का केंद्र सरकार को बड़ा सुझाव

Bombay High Court ने केंद्र सरकार और UIDAI से Aadhaar Act की मौजूदा व्यवस्था पर पुनर्विचार करने को कहा है, ताकि genuine criminal investigation में फर्जी पहचान से जुड़े मामलों की जांच करने वाली agencies आवश्यक information तक प्रभावी तरीके से पहुंच सकें। 

हालांकि, यहां एक बात बिल्कुल स्पष्ट रखना जरूरी है: Bombay High Court ने Aadhaar Act में खुद कोई संशोधन नहीं किया है। अदालत ने केंद्र सरकार को कानून या procedure में आवश्यक बदलाव पर विचार करने को कहा है। Aadhaar Act में वास्तविक legislative amendment की प्रक्रिया संसद और केंद्र सरकार के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में आती है।

2025 के फैसले से जुड़ता है यह मामला

अगस्त 2025 में Bombay High Court के एक अन्य फैसले में भी Aadhaar, PAN और Voter ID को अपने आप citizenship का proof मानने से इनकार किया गया था।

उस फैसले का व्यापक कानूनी संदेश यह था कि किसी व्यक्ति के पास भारतीय सरकारी पहचान से जुड़े दस्तावेज होने और उसके भारतीय नागरिक होने के बीच अंतर है। Citizenship का सवाल Citizenship Act के तहत तय होगा। मौजूदा 2026 मामले में यही distinction और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यहां सवाल कथित तौर पर विदेशी नागरिकों द्वारा गलत पहचान के आधार पर सरकारी documents हासिल करने का है।

फैसले का संभावित असर

यदि केंद्र सरकार इस दिशा में Aadhaar Act या संबंधित procedures में बदलाव करती है, तो भविष्य में जांच एजेंसियों के लिए ऐसे मामलों में:

  • Aadhaar enrollment के पीछे इस्तेमाल documents की जांच,

  • विदेशी नागरिक की वास्तविक identity verification,

  • immigration records का मिलान,

  • forged documents के source की पहचान,

  • deportation proceedings,

  • और illegal re-entry रोकने

जैसे कदमों को अधिक प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने की व्यवस्था बन सकती है। लेकिन साथ ही Aadhaar database की privacy और personal information की सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल बनी रहेगी। इसलिए किसी भी बदलाव में investigation की जरूरत और नागरिकों की privacy—दोनों के बीच संतुलन जरूरी होगा।

इस आदेश का सीधा संदेश

Bombay High Court का यह मामला एक व्यापक सवाल सामने रखता है—अगर कोई विदेशी नागरिक फर्जी documents के जरिए सरकारी पहचान हासिल कर लेता है, तो उसे पहचानने और उसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए क्या मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त है? अदालत ने केंद्र और संबंधित agencies को इसी gap पर गंभीरता से विचार करने को कहा है। यानी मामला सिर्फ एक फर्जी Aadhaar Card का नहीं है। यह पूरी chain—Fake Documents → Fake Identity → Aadhaar → Government Records → Immigration Verification → Deportation और Illegal Re-entry—से जुड़ा हुआ है। और अदालत का जोर साफ है कि ऐसी स्थिति में केवल एक agency की कार्रवाई नहीं, बल्कि Police, UIDAI, Immigration और केंद्र-राज्य की संबंधित agencies के बीच तेज और प्रभावी coordination जरूरी है।