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UPI के 10 साल पूरे, Digital Payments में भारत ने रचा नया इतिहास
नई दिल्ली: भारत के Unified Payments Interface (UPI) ने 25 अगस्त 2026 को अपनी शुरुआत के 10 साल पूरे कर लिए। 2016 में 44 बैंकों से शुरू हुआ UPI नेटवर्क अब 703 बैंकों तक पहुंच चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 में UPI पर 24,162 करोड़ से अधिक लेनदेन हुए, जबकि इसका कुल लेनदेन मूल्य करीब ₹314 लाख करोड़ रहा। UPI अब 11 देशों में भी संचालित हो रहा है, जिससे भारत के Digital Payment Model को वैश्विक पहचान मिली है।

नई दिल्ली: भारत की डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को नई पहचान देने वाला Unified Payments Interface (UPI) 25 अगस्त 2026 को अपने लॉन्च के 10 साल पूरे कर चुका है। इन दस वर्षों में UPI ने छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों और आम लोगों तक डिजिटल भुगतान को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना दिया है। आज UPI को दुनिया की सबसे बड़ी real-time payment प्रणालियों में गिना जाता है। 2016 में शुरुआत के समय UPI पर केवल 44 बैंक लाइव थे। वित्त वर्ष 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 703 बैंक हो गई। इसी अवधि में UPI के वार्षिक लेनदेन की संख्या 1.78 करोड़ से बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गई। लेनदेन का कुल मूल्य भी ₹0.07 लाख करोड़ से बढ़कर करीब ₹314 लाख करोड़ पहुंच गया।
2016 में हुई थी शुरुआत
UPI को National Payments Corporation of India (NPCI) ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नियामकीय निगरानी में विकसित किया था। 25 अगस्त 2016 को इसे औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया। इसका मूल उद्देश्य अलग-अलग बैंक खातों और भुगतान सेवाओं को एक ऐसे प्लेटफॉर्म से जोड़ना था, जिसके जरिए लोग मोबाइल फोन से तुरंत पैसे भेज और प्राप्त कर सकें। धीरे-धीरे UPI ने बैंक ट्रांसफर, QR Code Payment और कई अन्य डिजिटल भुगतान सुविधाओं को एक ही व्यवस्था में जोड़ दिया।
10 साल में हजारों गुना बढ़ा इस्तेमाल
UPI की सबसे बड़ी उपलब्धि इसके लेनदेन में हुई तेज वृद्धि है। वित्त वर्ष 2016-17 में जहां UPI पर सिर्फ 1.78 करोड़ लेनदेन हुए थे, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा 24,162 करोड़ से अधिक हो गया। यानी दस वर्षों में लेनदेन की संख्या में करीब 13,000 गुना वृद्धि हुई। इसी तरह लेनदेन के मूल्य में भी लगभग 4,000 गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस वृद्धि ने डिजिटल भुगतान को केवल बड़े शहरों और बड़े कारोबार तक सीमित नहीं रहने दिया। छोटे दुकानदार, स्थानीय कारोबारी और आम उपभोक्ता भी QR Code और मोबाइल आधारित भुगतान का इस्तेमाल करने लगे।
QR Code से आसान हुआ भुगतान
UPI की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण इसकी सरलता है। बैंक खाते से जुड़े मोबाइल ऐप के जरिए QR Code स्कैन करके भुगतान करना संभव हुआ। इससे नकद रखने की जरूरत कई परिस्थितियों में कम हुई और छोटी रकम के भुगतान भी डिजिटल माध्यम से होने लगे। इसी वजह से UPI का इस्तेमाल किराना दुकानों, रेस्तरां, परिवहन, ऑनलाइन खरीदारी और रोजमर्रा की कई सेवाओं में तेजी से बढ़ा।
703 बैंक UPI से जुड़े
UPI की शुरुआत 44 बैंकों के साथ हुई थी। दस साल बाद वित्त वर्ष 2025-26 में 703 बैंक इसके नेटवर्क पर लाइव हैं। बैंकों की बढ़ती भागीदारी ने UPI की पहुंच को देशभर में विस्तार देने में मदद की है। इससे अलग-अलग बैंकों के ग्राहकों के बीच तत्काल भुगतान करना आसान हुआ और डिजिटल भुगतान का एक साझा इंटरफेस तैयार हुआ।
भारत से बाहर भी बढ़ा UPI का विस्तार
UPI अब केवल भारत तक सीमित नहीं है। अगस्त 2026 तक यह 11 देशों में संचालित हो रहा है। इससे भारतीय भुगतान तकनीक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। UPI आधारित cross-border payment व्यवस्था का विस्तार भारतीय यात्रियों और दूसरे देशों में भुगतान करने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय डिजिटल भुगतान को और आसान बनाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
Financial Inclusion को मिला बढ़ावा
UPI ने डिजिटल भुगतान को बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के व्यापक विस्तार से भी जोड़ा है। बैंक खाते, मोबाइल और डिजिटल भुगतान के बीच बेहतर कनेक्टिविटी ने लोगों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में सक्रिय रूप से भाग लेने का अवसर दिया है। वित्तीय समावेशन के व्यापक आंकड़ों के अनुसार, भारत का Financial Inclusion Index मार्च 2017 के 43.4 से बढ़कर मार्च 2026 में 70.0 हो गया। हालांकि इस बदलाव का श्रेय केवल UPI को देना सही नहीं होगा; इसमें बैंकिंग पहुंच, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य वित्तीय सेवाओं की भी भूमिका रही है।
Digital Public Infrastructure की ताकत
UPI को भारत के Digital Public Infrastructure (DPI) मॉडल की महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जाता है। इसकी खासियत यह है कि अलग-अलग बैंक और payment applications एक साझा इंटरफेस के माध्यम से आपस में जुड़े हैं। इस मॉडल ने भारत में डिजिटल भुगतान के लिए एक ऐसा ecosystem तैयार किया है, जिसमें बैंक, payment apps, merchants और consumers एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं।
आगे की चुनौती क्या है?
UPI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ cyber fraud, payment security और user awareness जैसी चुनौतियां भी महत्वपूर्ण हो गई हैं। डिजिटल भुगतान जितना व्यापक होता है, सुरक्षित लेनदेन और लोगों को धोखाधड़ी से बचाने की जरूरत भी उतनी ही बढ़ती है। ऐसे में आने वाले वर्षों में UPI के विस्तार के साथ cybersecurity, fraud prevention और सुरक्षित डिजिटल भुगतान को मजबूत करना अहम रहेगा।
10 साल बाद UPI की तस्वीर
दस वर्षों में UPI ने भारत के भुगतान करने के तरीके को काफी बदल दिया है। 1.78 करोड़ वार्षिक लेनदेन से शुरू होकर 24,162 करोड़ से अधिक वार्षिक लेनदेन तक पहुंचना इसके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को दिखाता है। साथ ही 703 बैंकों की भागीदारी और 11 देशों तक इसका विस्तार भारतीय डिजिटल भुगतान तकनीक की बढ़ती वैश्विक पहुंच को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी UPI के 10 साल पूरे होने पर नागरिकों से अपने UPI अनुभव साझा करने का आग्रह किया और इसकी यात्रा को भारत के डिजिटल भुग,तान बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
