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नेपाल में Flash Flood का कहर, 9 लोगों की मौत; 384 यात्री लापता

काठमांडू: नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रासुवा जिले में भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ से भारी तबाही हुई है। बाढ़ और मलबे के तेज बहाव में कम से कम 9 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 384 यात्रियों के लापता होने की सूचना सामने आई है। इनमें 105 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। सड़क, पुल और जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है और सेना-पुलिस की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं।

Neha Sharma26 अग. 2026, 07:29 PM IST
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नेपाल में Flash Flood का कहर, 9 लोगों की मौत; 384 यात्री लापता

काठमांडू: नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बुधवार, 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। नेपाल के रासुवा जिले में भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ से कई गांव, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक कम से कम 9 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं।


अचानक आई बाढ़ से मची तबाही

बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रासुवा जिले के टिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाकों में देखा गया। पानी और मलबे के तेज बहाव ने नदी किनारे बसे इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। कई घर, वाहन और अन्य ढांचे बह गए या मलबे में दब गए। सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। स्थानीय प्रशासन ने भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की चेतावनी दी है।


384 यात्रियों के लापता होने की सूचना

इस आपदा का एक गंभीर पहलू बड़ी संख्या में लोगों का लापता होना है। शुरुआती सूची में 384 यात्रियों के नाम शामिल किए गए हैं, जिनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक बताए गए हैं। इनमें 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह शुरुआती सूची है और लापता लोगों की स्थिति की पुष्टि की जा रही है। कई विदेशी नागरिक तिब्बत और आसपास के धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों की यात्रा पर थे। बाढ़ के कारण सीमा क्षेत्र में संपर्क और परिवहन व्यवस्था बाधित होने से उनकी स्थिति का पता लगाने में मुश्किल आ रही है।


बाढ़ की वजह क्या रही?

बाढ़ के सटीक कारण की जांच जारी है। शुरुआती आकलनों में बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन से नदी के प्रवाह में अचानक रुकावट बनने और उसके बाद पानी के तेज बहाव की संभावना जताई गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक क्षेत्र में करीब 4.4 तीव्रता का भूकंप भी दर्ज किया गया था, लेकिन इसे बाढ़ का कारण मानने की अभी पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों ने नदी के ऊपरी हिस्से में बने संभावित अवरोध को लेकर भी चिंता जताई है, क्योंकि इसके टूटने पर दोबारा तेज बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।


चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी असर

बाढ़ और मलबे का असर नेपाल के साथ-साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी देखा गया। तिब्बत के ग्यिरोंग (Gyirong) क्षेत्र में सीमा व्यापार केंद्र के पास मलबा आने की सूचना है। वहां भी लोगों के लापता होने और बड़े नुकसान की आशंका जताई गई है। दोनों देशों की एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान चला रही हैं।


राहत और बचाव अभियान तेज

नेपाल में सेना, पुलिस और सशस्त्र सुरक्षा बलों को राहत एवं बचाव कार्य में लगाया गया है। हालांकि कई जगह सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। कुछ इलाकों में हेलीकॉप्टर से राहत पहुंचाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। प्रशासन ने नदी किनारे बसे लोगों को विशेष सावधानी बरतने को कहा है। अधिकारियों को आशंका है कि पहाड़ी क्षेत्र में मौजूद अवरोधों के कारण हालात और बिगड़ सकते हैं।


जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान

बाढ़ से नेपाल के महत्वपूर्ण Hydropower Infrastructure को भी नुकसान पहुंचा है। रासुवा क्षेत्र में कई जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं और कुछ परियोजनाओं की संरचनाओं को बाढ़ के पानी और मलबे से नुकसान पहुंचने की खबर है। इससे स्थानीय बिजली उत्पादन और परियोजनाओं के संचालन पर भी असर पड़ सकता है। नुकसान का पूरा आकलन राहत एवं बचाव अभियान के बाद ही सामने आने की उम्मीद है।


भारत में भी बढ़ी चिंता

नेपाल से निकलने वाली कई नदियां भारत के मैदानी इलाकों की ओर आती हैं। इसी वजह से नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बाद भारत के कुछ सीमावर्ती और नदी किनारे वाले इलाकों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। रिपोर्टों के अनुसार उत्तर प्रदेश और बिहार में कुछ नदियों को लेकर बाढ़ संबंधी चेतावनी जारी की गई है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना, लापता लोगों की तलाश करना और नदी किनारे रहने वाली आबादी को संभावित दूसरे बाढ़ के खतरे से बचाना है।


बढ़ सकता है मृतकों और लापता लोगों का आंकड़ा

यह आपदा अभी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आई है और कई प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल बना हुआ है। इसलिए अधिकारियों को आशंका है कि आने वाले घंटों में मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े में बदलाव हो सकता है। फिलहाल कम से कम 9 मौतों की पुष्टि वाली रिपोर्ट सामने आई है, जबकि सैकड़ों लोगों की तलाश जारी है। राहत और बचाव दलों के प्रभावित इलाकों तक पहुंचने के साथ नुकसान की वास्तविक तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।