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लोन का झांसा देकर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय कॉल सेंटर का पर्दाफाश, चार गिरफ्तार l
महाराष्ट्र के पनवेल में पुलिस ने सस्ते लोन और आकर्षक योजनाओं का लालच देकर लोगों से ऑनलाइन ठगी करने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पनवेल शहर पुलिस ने कर्जोडे इलाके के एक फ्लैट में छापा मारकर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों की पहचान विजय बाबू भंडारी, तुषार अरुण पिंगले, रोहित रंगापा गौड़ा और दर्शन उमाशंकर के रूप में हुई है। पुलिस ने उनके पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन, नकदी और अन्य सामान समेत करीब 3.95 लाख रुपये की संपत्ति बरामद की है।

महाराष्ट्र के पनवेल में सस्ते लोन और आकर्षक वित्तीय योजनाओं का झांसा देकर लोगों से ऑनलाइन ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पनवेल शहर पुलिस ने कर्जोडे इलाके में एक फ्लैट पर छापा मारकर फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया। पुलिस ने मौके से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी इसी फ्लैट से फर्जी कॉल सेंटर चला रहे थे। वे लोगों को कम ब्याज दर पर लोन दिलाने, तुरंत कर्ज मंजूर कराने और आकर्षक योजनाओं में निवेश का लालच देते थे। बातचीत के दौरान आरोपियों द्वारा लोगों से जरूरी दस्तावेज, बैंक खाते की जानकारी और अन्य निजी विवरण हासिल किए जाते थे।
आरोप है कि इसके बाद लोगों से लोन की फाइल आगे बढ़ाने, प्रोसेसिंग फीस, बीमा, जीएसटी, वेरिफिकेशन चार्ज या अन्य शुल्क के नाम पर पैसे जमा कराए जाते थे। रकम मिल जाने के बाद आरोपी पीड़ितों से संपर्क करना बंद कर देते थे या उन्हें लगातार नए-नए भुगतान करने के लिए मजबूर करते थे। लोन की जरूरत वाले लोग अक्सर कम ब्याज और जल्दी कर्ज मिलने के लालच में आरोपियों के संपर्क में आते थे। गिरोह के सदस्य खुद को वित्तीय संस्थानों, बैंक प्रतिनिधियों या लोन एजेंट के रूप में पेश करते थे। फोन पर भरोसा पैदा करने के लिए वे लोगों को आकर्षक ऑफर और आसान शर्तों की जानकारी देते थे।
पुलिस को इस फर्जी कॉल सेंटर के बारे में जानकारी मिलने के बाद जांच शुरू की गई। प्रारंभिक जांच और तकनीकी निगरानी के आधार पर पुलिस ने कर्जोडे क्षेत्र स्थित फ्लैट की पहचान की। इसके बाद पुलिस टीम ने वहां छापा मारा और चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विजय बाबू भंडारी, तुषार अरुण पिंगले, रोहित रंगापा गौड़ा और दर्शन उमाशंकर के रूप में हुई है। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वे कितने समय से यह फर्जी कॉल सेंटर चला रहे थे।
पुलिस ने आरोपियों के पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन, नकदी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। बरामद सामान की कुल कीमत करीब 3.95 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस इन उपकरणों की जांच कर रही है, ताकि कॉल रिकॉर्ड, बैंक खातों, संपर्क सूची, मैसेज और ऑनलाइन लेन-देन से जुड़े सुराग मिल सकें। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और ठगी की कुल रकम कितनी है। आरोपियों के मोबाइल फोन और लैपटॉप से देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों से संपर्क के रिकॉर्ड मिल सकते हैं। इसी आधार पर पुलिस इस गिरोह को अंतरराज्यीय बता रही है।
पुलिस को संदेह है कि गिरोह में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। कुछ लोग फोन पर ग्राहकों से बातचीत करते होंगे, कुछ बैंक खातों में रकम मंगाते होंगे और अन्य लोग तकनीकी व्यवस्था संभालते होंगे। आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस गिरोह से जुड़े दूसरे सदस्यों और उनके बैंक खातों की जानकारी जुटा सकती है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों, सिम कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल तो नहीं किया था। पुलिस उन खातों की जांच कर सकती है, जिनमें ठगी की रकम जमा कराई गई। इसके अलावा, कॉल सेंटर के लिए इस्तेमाल किए जा रहे फ्लैट को किराए पर लेने से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन पर लोन या निवेश का लालच मिलने पर तुरंत भरोसा न करें। लोन लेने से पहले संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था की आधिकारिक वेबसाइट और हेल्पलाइन से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति को ओटीपी, एटीएम पिन, बैंक पासवर्ड या मोबाइल पर आए लिंक की जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति लोन मंजूर कराने के नाम पर पहले पैसे जमा करने को कहता है, तो यह धोखाधड़ी का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में पीड़ितों को तुरंत पुलिस या साइबर अपराध हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए। फिलहाल चारों आरोपी पुलिस की हिरासत में हैं और मामले की विस्तृत जांच जारी है। पुलिस बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराने के साथ-साथ आरोपियों के बैंक खातों और ऑनलाइन गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है। जांच पूरी होने के बाद गिरोह के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
