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मंदिर की जमीन पर नोटिस से मचा हड़कंप, करूर में 100 से ज्यादा लोगों का विरोध
करूर: तमिलनाडु के करूर जिले के थंथोनिमलाई में मंदिर की जमीन पर कथित अतिक्रमण को लेकर विवाद बढ़ गया है। HR&CE विभाग के नोटिस के विरोध में 100 से ज्यादा स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया। लोगों ने पुराने राजस्व रिकॉर्ड और सरकारी आदेशों का हवाला देते हुए जमीन के स्वामित्व की दोबारा जांच की मांग की है।

करूर: तमिलनाडु के करूर जिले के थंथोनिमलाई इलाके में मंदिर की जमीन पर कथित अतिक्रमण को लेकर विवाद सामने आया है। हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग की ओर से जारी नोटिस के विरोध में 100 से ज्यादा स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि उनके परिवार कई पीढ़ियों से इस इलाके में रह रहे हैं और संबंधित जमीन को मंदिर की संपत्ति बताने के विभाग के दावे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पुराने राजस्व रिकॉर्ड और सरकारी आदेशों की दोबारा जांच की मांग की है।
सर्वे नंबर 297 को लेकर विवाद
रिपोर्ट के अनुसार, विवादित भूमि सर्वे नंबर 297 से जुड़ी है। HR&CE विभाग का दावा है कि यह जमीन मंदिर की संपत्ति है और इस पर अनधिकृत कब्जा किया गया है। इसी आधार पर कुछ स्थानीय निवासियों को नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं, स्थानीय लोगों ने विभाग के दावे पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि उनके परिवार लंबे समय से इस इलाके में रह रहे हैं। ऐसे में उन्हें अचानक अतिक्रमणकारी बताने से पहले जमीन से जुड़े पुराने दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की पूरी तरह जांच की जानी चाहिए।
पुराने सरकारी आदेशों का दिया हवाला
प्रदर्शनकारियों ने अपने पक्ष में 1963 और 1967 में Settlement Tahsildar की ओर से जारी आदेशों का हवाला दिया है। उनका कहना है कि इन पुराने आदेशों और राजस्व रिकॉर्ड में जमीन की स्थिति से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मौजूद है। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन मौजूदा कार्रवाई से पहले पुराने रिकॉर्ड की जांच करे और जमीन के स्वामित्व की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे।
मंदिर पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
नोटिस जारी होने के बाद 100 से ज्यादा स्थानीय लोग विरोध में सामने आए। प्रदर्शनकारियों ने मंदिर की ओर मार्च किया और अपनी मांगों को लेकर मंदिर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कथित अतिक्रमण के नोटिस वापस लेने और भूमि से जुड़े रिकॉर्ड की दोबारा जांच कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मामले में किसी भी तरह की कार्रवाई दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच के बाद ही की जानी चाहिए।
इनाम जमीनों के विवाद का भी मुद्दा उठाया
स्थानीय लोगों ने मंदिरों से जुड़ी इनाम जमीनों के पुराने विवादों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि ऐसी जमीनों को लेकर कई जगह पुराने रिकॉर्ड और मौजूदा दावों के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और संबंधित विभाग से मांग की कि मंदिर की जमीन से जुड़े ऐसे मामलों की रिकॉर्ड के आधार पर समीक्षा की जाए, ताकि वास्तविक स्वामित्व और कब्जे की स्थिति स्पष्ट हो सके।
जमीन के रिकॉर्ड की जांच अहम
इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा जमीन के स्वामित्व और उससे जुड़े पुराने राजस्व रिकॉर्ड का है। एक तरफ HR&CE विभाग संबंधित जमीन को मंदिर की संपत्ति बता रहा है, जबकि स्थानीय निवासी पुराने सरकारी आदेशों और लंबे समय से अपने परिवारों के यहां रहने का हवाला देकर नोटिस का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में आगे की कार्रवाई के लिए पुराने राजस्व दस्तावेज, Settlement Tahsildar के आदेश और भूमि के स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड अहम होंगे। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अंतिम फैसला लेने से पहले इन सभी दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जाए।
