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‘गेट तुरंत खोलिए...’ छात्र आंदोलन के बीच शौचालय बंद होने पर भड़के रोहित पवार
पुणे: आदिवासी छात्रों के आंदोलन के बीच प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे शौचालय का गेट बंद किए जाने के आरोप ने विवाद खड़ा कर दिया है। विधायक रोहित पवार ने सरकार से गेट तुरंत खुलवाने और कथित तौर पर इसे बंद करने वाले जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, गेट बंद करने के प्रशासनिक कारण की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।

पुणे: महाराष्ट्र के पुणे में आदिवासी छात्रों का आंदोलन जारी है। इसी बीच आंदोलन में शामिल छात्र-छात्राओं के इस्तेमाल वाले शौचालय का गेट बंद किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा और शौचालय का गेट तत्काल खोलने की मांग की।
रोहित पवार ने क्या कहा?
रोहित पवार ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस घटना पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनकारी छात्र-छात्राओं द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे शौचालय का गेट बंद करना बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने सरकार से तत्काल शौचालय का गेट खोलने के निर्देश देने और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। पवार ने यह भी कहा कि अगर गेट नहीं खोला गया और उसे छात्रों ने तोड़ दिया, तो इसके लिए आंदोलनकारी छात्रों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में गेट किस प्रशासनिक आदेश पर बंद किया गया और इसके पीछे आधिकारिक कारण क्या था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि स्पष्ट रूप से नहीं हुई है। इसलिए इस हिस्से को रोहित पवार के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
किस आंदोलन से जुड़ा है मामला?
यह मामला पुणे में चल रहे आदिवासी छात्रों के आंदोलन से जुड़ा है। छात्र अपनी छात्रावास और शिक्षा से संबंधित विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारी छात्रों की मांगों में आदिवासी छात्रावासों से जुड़े सरकारी आदेश में बदलाव, छात्रावासों में बेहतर सुविधाएं और खाली पदों पर भर्ती समेत कई मुद्दे शामिल हैं।
मांजरी स्थित आदिवासी सरकारी बालक छात्रावास में भी छात्रों का धरना और भूख हड़ताल जारी रही है। रिपोर्टों के अनुसार, आंदोलन के दौरान कुछ छात्रों की तबीयत खराब हुई और एक छात्र को उपचार के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा था।
छात्रावास और मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा
आंदोलनकारी छात्र केवल सरकारी आदेश में बदलाव की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि छात्रावासों में मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। छात्रों की मांगों में सुरक्षित और बेहतर सुविधाओं वाला छात्रावास, महिला छात्रों के लिए बेहतर व्यवस्था, खाली सरकारी पदों को भरना और छात्रावास परिसरों में सुरक्षा एवं स्वच्छता कर्मचारियों की व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल हैं। ऐसे में शौचालय का गेट बंद किए जाने का आरोप आंदोलन के दौरान उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं को लेकर पहले से चल रही बहस को और बढ़ा सकता है।
कई विपक्षी नेताओं ने छात्रों को दिया समर्थन
आदिवासी छात्रों के आंदोलन को विपक्ष के कई नेताओं का समर्थन मिला है। रोहित पवार आंदोलन स्थल पर पहुंचकर छात्रों से मिले और उनके मुद्दों का समर्थन किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से छात्रों की समस्याओं पर ध्यान देने और उनसे बातचीत कर समाधान निकालने की अपील की थी।
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने भी छात्रों से फोन पर बातचीत कर सरकार के साथ चर्चा कराने का भरोसा दिया था।
अब सरकार से क्या मांग?
शौचालय का गेट बंद किए जाने के आरोप के बाद रोहित पवार ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि आंदोलनकारी छात्रों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। इस मामले में अब प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण होगा कि शौचालय का गेट किस कारण से बंद किया गया था और क्या इसे दोबारा खोलने के लिए कोई कदम उठाया गया है।
फिलहाल पुणे में आदिवासी छात्रों का आंदोलन जारी है और छात्र अपनी मांगों को लेकर सरकार से ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। शौचालय के गेट को लेकर सामने आया विवाद इस आंदोलन में छात्रों की मूलभूत सुविधाओं और प्रशासन की जिम्मेदारी के मुद्दे को भी सामने लाता है।
