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महाराष्ट्र में बच्चों की आंखों की सेहत पर बड़ा कदम, 20 लाख छात्रों की होगी जांच
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 5वीं से 10वीं तक के 20 लाख विद्यार्थियों की आंखों की जांच के लिए विशेष परियोजना शुरू की है। 36 महीने तक चलने वाले इस अभियान में राज्यभर में जांच शिविर लगाए जाएंगे। जांच में दृष्टिदोष पाए जाने वाले पात्र विद्यार्थियों को मुफ्त नंबर के चश्मे उपलब्ध कराए जाएंगे। परियोजना के लिए स्कूल शिक्षा विभाग, रत्ननिधि चैरिटेबल ट्रस्ट और OneSight EssilorLuxottica Foundation के बीच समझौता हुआ है।

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के आंखों के स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। कक्षा 5वीं से 10वीं तक के करीब 20 लाख विद्यार्थियों की आंखों की जांच की जाएगी। जांच में दृष्टिदोष पाए जाने वाले पात्र विद्यार्थियों को नंबर के चश्मे मुफ्त उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग, रत्ननिधि चैरिटेबल ट्रस्ट और OneSight EssilorLuxottica Foundation के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ है।
36 महीने तक चलेगा विशेष अभियान
इस परियोजना के तहत महाराष्ट्रभर में अगले 36 महीनों के दौरान आंखों की जांच के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। स्कूल शिक्षा विभाग परियोजना के क्रियान्वयन और स्कूलों के साथ समन्वय की जिम्मेदारी संभालेगा। रत्ननिधि चैरिटेबल ट्रस्ट को परियोजना का Implementation Partner बनाया गया है, जबकि OneSight EssilorLuxottica Foundation Technical Partner के तौर पर काम करेगा। जरूरतमंद और पात्र विद्यार्थियों को प्रिस्क्रिप्शन चश्मे उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी साझेदार संस्थाओं की होगी।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुआ करार
यह समझौता मुंबई के सह्याद्री राज्य अतिथिगृह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे की मौजूदगी में हुआ। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रणजीत सिंह देओल, रत्ननिधि चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी राजीव मेहता और OneSight EssilorLuxottica Foundation के निदेशक वेणू अंबाती सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
हर तीन महीने में होगी प्रगति की समीक्षा
परियोजना के तहत सिर्फ आंखों की जांच ही नहीं, बल्कि इसकी प्रगति की नियमित निगरानी भी की जाएगी। त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट के जरिए कितने जांच शिविर आयोजित हुए, कितने विद्यार्थियों की जांच हुई, कितने बच्चों में दृष्टिदोष पाया गया और कितने विद्यार्थियों को चश्मे दिए गए—इन सभी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा विद्यार्थियों की आंखों के स्वास्थ्य से जुड़ा डेटा वैज्ञानिक तरीके से एकत्र किया जाएगा। समझौते में विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं।
पहले भी हजारों विद्यार्थियों को मिला फायदा
यह पहल पूरी तरह नई शुरुआत नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 2019 से चल रहे सहयोग के तहत 18 जिलों के 800 स्कूलों में 6.8 लाख से अधिक विद्यार्थियों की आंखों की जांच की जा चुकी है और 63 हजार से अधिक विद्यार्थियों को चश्मे वितरित किए गए हैं। अब इस अभियान को राज्यभर के 20 लाख विद्यार्थियों तक विस्तार दिया जा रहा है। महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े भी बताते हैं कि राज्य में सरकारी स्तर पर स्कूली विद्यार्थियों की आंखों की जांच और दृष्टिदोष वाले बच्चों को मुफ्त चश्मे उपलब्ध कराने का कार्यक्रम पहले से चल रहा है।
पढ़ाई पर भी पड़ेगा सकारात्मक असर
बच्चों में दृष्टिदोष समय पर सामने नहीं आने पर उन्हें कक्षा में बोर्ड पढ़ने, किताब देखने और पढ़ाई से जुड़ी गतिविधियों में परेशानी हो सकती है। ऐसे में स्कूल स्तर पर नियमित जांच से समस्या की पहचान जल्दी होने और जरूरत के मुताबिक चश्मा उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। सरकार और साझेदार संस्थाओं का लक्ष्य है कि आर्थिक कारणों से किसी विद्यार्थी को दृष्टि संबंधी समस्या के समाधान से वंचित न रहना पड़े। 20 लाख विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग और जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त चश्मे देने की यह पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
