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15 साल तक मरीजों का भरोसा जीतता रहा ‘डॉक्टर’, पुलिस ने खोला राज; 10वीं पास निकला आरोपी
गुजरात के वडोदरा में पुलिस ने एक कथित फर्जी डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी करीब 15 वर्षों से बिना मान्य मेडिकल डिग्री और पंजीकरण के एलोपैथिक इलाज कर रहा था। छापेमारी में उसके क्लिनिक से दवाइयां, इंजेक्शन और अन्य मेडिकल सामग्री बरामद हुई है।
Kalpana Gautam27 अग. 2026, 05:05 PM IST

गुजरात के वडोदरा में पुलिस ने एक कथित फर्जी डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी करीब 15 वर्षों से बिना मान्य मेडिकल डिग्री और पंजीकरण के एलोपैथिक इलाज कर रहा था। छापेमारी में उसके क्लिनिक से दवाइयां, इंजेक्शन और अन्य मेडिकल सामग्री बरामद हुई है।
वडोदरा में फर्जी डॉक्टर का खुलासा
गुजरात के वडोदरा से सामने आया यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस ने शहर के अकोटा इलाके में एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर लंबे समय से डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज कर रहा था। पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान बिस्वजीत प्रफुल्ल हलदार के रूप में हुई है। वह मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला बताया गया है और करीब 15 साल पहले वडोदरा आया था। पुलिस का दावा है कि उसने अकोटा इलाके में ‘प्रमिला क्लिनिक’ नाम से मरीजों का इलाज शुरू किया था।
सिर्फ 10वीं तक पढ़ाई, फिर भी कर रहा था इलाज
जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि हलदार के पास डॉक्टर के तौर पर इलाज करने के लिए आवश्यक मेडिकल डिग्री या वैध पंजीकरण नहीं था। रिपोर्टों के मुताबिक उसकी शैक्षणिक योग्यता केवल कक्षा 10 तक है। इसके बावजूद वह कथित रूप से एलोपैथिक दवाइयां लिख रहा था और मरीजों का इलाज कर रहा था। पुलिस ने उसके क्लिनिक पर छापा मारकर उसे हिरासत में लिया।
क्लिनिक से मिलीं दवाइयां और इंजेक्शन
छापेमारी के दौरान पुलिस को क्लिनिक से बड़ी मात्रा में मेडिकल सामग्री मिली। इनमें विभिन्न दवाइयां, इंजेक्शन, कफ सिरप, ग्लूकोज की बोतलें और अन्य उपचार संबंधी सामान शामिल बताए गए हैं। पुलिस ने क्लिनिक से दवाओं और मेडिकल सामग्री के साथ नकदी भी जब्त की। एक स्थानीय रिपोर्ट में बरामद सामान की संख्या और अधिक विस्तार से बताई गई है, जिसमें सैकड़ों दवा स्ट्रिप्स, 162 इंजेक्शन, मेडिकल ट्यूब, कफ सिरप, ORS पैकेट, IV/इन्फ्यूजन सेट और ग्लूकोज की बोतलें शामिल हैं। हालांकि इन विस्तृत आंकड़ों को स्थानीय रिपोर्ट ने प्रकाशित किया है, इसलिए अंतिम जब्ती सूची की पुष्टि पुलिस रिकॉर्ड से होना बाकी है।
पुलिस को कैसे मिली जानकारी?
रिपोर्टों के अनुसार पुलिस को सूचना मिली थी कि अकोटा इलाके में बिना मेडिकल डिग्री वाला व्यक्ति क्लिनिक चला रहा है। इसके बाद स्थानीय क्राइम ब्रांच की टीम ने क्लिनिक पर कार्रवाई की। पुलिस ने आरोपी से मेडिकल डिग्री और संबंधित दस्तावेज पेश करने को कहा, लेकिन वह आवश्यक योग्यता का प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद उसके खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की गई।
15 साल में कितने मरीजों का इलाज किया, जांच जारी
अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी ने वास्तव में कितने मरीजों का इलाज किया और इतने लंबे समय तक बिना वैध मेडिकल योग्यता के क्लिनिक कैसे संचालित करता रहा। यह भी महत्वपूर्ण सवाल है कि उसे मेडिकल दवाइयां और इंजेक्शन किस माध्यम से मिल रहे थे और क्या इस पूरे मामले में किसी अन्य व्यक्ति या सप्लायर की भूमिका थी।
गुजरात में फर्जी डॉक्टरों पर कार्रवाई तेज
वडोदरा का यह मामला कोई अकेला मामला नहीं है। गुजरात में हाल के महीनों में बिना मान्य मेडिकल डिग्री के इलाज करने वाले कथित फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ कई कार्रवाइयां सामने आई हैं। अगस्त 2026 में ही वडोदरा ग्रामीण क्षेत्र में एक अन्य व्यक्ति को कथित तौर पर बिना मेडिकल डिग्री के एलोपैथिक प्रैक्टिस करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने बताया था कि वह मरीजों को दवाइयां दे रहा था। इससे पहले मार्च 2026 में सूरत में भी एक कथित फर्जी डॉक्टर को पकड़ा गया था, जिसके बारे में पुलिस ने बताया था कि वह कक्षा 10 तक पढ़ा था और बिना डिग्री के मरीजों का इलाज कर रहा था।
मेडिकल प्रैक्टिस के लिए डिग्री और रजिस्ट्रेशन जरूरी
गुजरात मेडिकल काउंसिल के नियमों के अनुसार आधुनिक चिकित्सा पद्धति यानी मॉडर्न मेडिसिन या सर्जरी की प्रैक्टिस करने के लिए मान्यता प्राप्त मेडिकल योग्यता और संबंधित मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण आवश्यक है। इसलिए केवल लंबे समय तक मरीजों का इलाज कर लेना किसी व्यक्ति को वैध डॉक्टर नहीं बनाता। इस मामले में पुलिस की जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष निकलेगा।
