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गंगाजल की शपथ और 60 लोगों में रकम बांटने का दावा, शाहजहांपुर में मचा बवाल
शाहजहांपुर: नगर निगम के कुछ पार्षदों का बताया जा रहा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में एक व्यक्ति गंगाजल से भरा पात्र हाथ में लेकर कथित तौर पर रिश्वत से मिलने वाली रकम को 60 लोगों में बराबर बांटने की शपथ लेते दिखाई दे रहा है। मामला सामने आने के बाद शाहजहांपुर नगर निगम ने जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच में वीडियो की सत्यता और उसमें मौजूद लोगों की पहचान समेत पूरे मामले की पड़ताल की जाएगी।

शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर नगर निगम से जुड़ा एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में कुछ लोग, जिन्हें नगर निगम के पार्षद बताया जा रहा है, गंगाजल हाथ में लेकर कथित तौर पर निगम से होने वाली आय को आपस में बराबर बांटने की शपथ लेते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद शाहजहांपुर नगर निगम ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
वीडियो में क्या दिखाई दे रहा है?
वायरल वीडियो में एक व्यक्ति गंगाजल से भरा पात्र हाथ में लिए दिखाई देता है और समूह के अन्य लोग उसके साथ शपथ दोहराते नजर आते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, कथित शपथ में नगर निगम से मिलने वाली रकम को 60 लोगों के बीच बराबर बांटने की बात कही गई है। वीडियो में समूह के सदस्य किसी व्यक्ति के परेशानी में पड़ने पर उसके साथ खड़े रहने की बात भी कहते सुनाई देते हैं। हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान और वीडियो की पूरी परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है।
नगर निगम ने जांच के दिए आदेश
शाहजहांपुर की नगर आयुक्त सौम्या गुरुरानी के मुताबिक, सामने आया वीडियो कथित तौर पर नवंबर 2025 का है, जब नगर निगम में एक अन्य आयुक्त कार्यरत थे। इसके बावजूद वर्तमान प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। नगर निगम के अनुसार, जांच में वीडियो की प्रामाणिकता, उसमें दिखाई देने वाले लोगों की पहचान और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की पड़ताल की जाएगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शाहजहांपुर नगर निगम में 60 निर्वाचित पार्षद
रिपोर्टों के अनुसार शाहजहांपुर नगर निगम में 60 निर्वाचित पार्षद और 10 नामित सदस्य हैं। वायरल वीडियो में 60 लोगों के बीच रकम बांटने की कथित बात को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि वीडियो में दिखाई देने वाली रकम वास्तव में रिश्वत थी या उसमें शामिल सभी लोग वर्तमान पार्षद हैं—इन बिंदुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
वीडियो पर राजनीतिक प्रतिक्रिया
वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय राजनीतिक नेताओं ने भी मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष राजनीश गुप्ता ने नगर निगम में कथित भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठाए। समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष तनवीर खान ने कहा कि ऐसे वीडियो से जनता के बीच गलत संदेश जाता है। सोशल मीडिया पर भी वीडियो को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। हालांकि, वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पर किए गए दावों को आधिकारिक जांच का विकल्प नहीं माना जा सकता।
जांच के बाद ही साफ होगी सच्चाई
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे अहम बात नगर निगम की जांच है। प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि वीडियो कब और किन परिस्थितियों में बनाया गया, उसमें दिखाई देने वाले लोग कौन हैं और कथित शपथ का वास्तविक संदर्भ क्या था। नगर निगम ने फिलहाल जांच शुरू कर दी है और कहा है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसलिए जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं होती, वीडियो में लगाए गए कथित रिश्वत संबंधी दावों को आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
