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सरकारी राशन पर बड़ी डेटा जांच: 56.22 लाख आयकरदाता और 7.21 लाख GST कारोबारी सूची में चिन्हित, 2.44 करोड़ रिकॉर्ड की होगी पड़ताल

देश में सरकारी राशन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और लक्षित बनाने के लिए केंद्र सरकार ने लाभार्थियों के रिकॉर्ड की व्यापक डेटा जांच शुरू की है। विभिन्न सरकारी विभागों और डेटाबेस से प्राप्त जानकारी का मिलान करने के बाद बड़ी संख्या में ऐसे राशन लाभार्थी सामने आए हैं, जिनके रिकॉर्ड को आगे सत्यापन की जरूरत है।

sd27 अग. 2026, 05:05 PM IST
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सरकारी राशन पर बड़ी डेटा जांच: 56.22 लाख आयकरदाता और 7.21 लाख GST कारोबारी सूची में चिन्हित, 2.44 करोड़ रिकॉर्ड की होगी पड़ताल
      ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 2.44 करोड़ लाभार्थियों को संभावित रूप से अपात्र श्रेणी में चिन्हित किया गया है। इनमें 56,22,619 ऐसे लाभार्थी हैं जिनके रिकॉर्ड आयकर विभाग के डेटा से जुड़े मिले, जबकि 7,21,343 लाभार्थियों का संबंध GST पंजीकरण/कारोबारी रिकॉर्ड से पाया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों को सीधे तौर पर 'फर्जी राशन कार्ड' या 'फर्जी लाभार्थी' कहना सही नहीं होगा। डेटा मिलान के दौरान सामने आए रिकॉर्ड को संबंधित राज्यों के पास सत्यापन के लिए भेजा जा रहा है। पात्रता की अंतिम पुष्टि स्थानीय स्तर पर जांच के बाद ही होगी।
किन-किन श्रेणियों के रिकॉर्ड सामने आए?
डेटा जांच में कई तरह की विसंगतियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार—
56,22,619 लाभार्थी आयकर रिकॉर्ड से जुड़े मिले।
7,21,343 लाभार्थी GST से जुड़े रिकॉर्ड में पाए गए।
2,42,313 राशन लाभार्थी कंपनियों के निदेशक पाए गए।
2,76,544 लाभार्थियों का रिकॉर्ड सरकारी कर्मचारियों से जुड़ा मिला।
3,01,978 ऐसे लाभार्थी मिले जिनकी उम्र 100 वर्ष से अधिक दर्ज थी।
10,77,631 मामलों में दो अलग-अलग राशन कार्ड से संबंधित रिकॉर्ड सामने आए।
1,13,094 राशन कार्ड ऐसे लोगों के नाम पर मिले जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम थी।
2,07,970 लाभार्थियों का रिकॉर्ड चार पहिया वाहन मालिकों से जुड़ा मिला।
करीब 1.58 करोड़ लाभार्थी ऐसे पाए गए जिन्होंने लंबे समय से राशन नहीं लिया था।
इन श्रेणियों में आपसी ओवरलैप संभव है। इसलिए सभी आंकड़ों को जोड़कर कुल अपात्र लाभार्थियों की संख्या निकालना सही तरीका नहीं होगा।
आयकरदाता मिलने का क्या मतलब है?
इस जांच में सबसे ज्यादा चर्चा 56.22 लाख आयकरदाताओं के राशन सूची में होने की है। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है।
किसी व्यक्ति का आयकर रिटर्न दाखिल करना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह सरकारी राशन के लिए अपात्र है। राशन की पात्रता संबंधित राज्य के नियमों, परिवार की आर्थिक स्थिति और लागू सरकारी मानकों पर निर्भर करती है। इसी वजह से इन लोगों को फिलहाल डेटा-मिलान में चिन्हित लाभार्थी कहना अधिक उचित है। राज्य सरकार द्वारा जांच के बाद ही तय किया जाएगा कि कौन वास्तव में पात्र है और किसका नाम हटाया जाना चाहिए।
GST कारोबारियों पर भी नजर
इसी तरह 7.21 लाख लाभार्थियों के रिकॉर्ड GST नेटवर्क से जुड़े मिले हैं। सरकार का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या ऐसे लाभार्थी सरकारी राशन की निर्धारित पात्रता के दायरे में आते हैं या नहीं। यहां भी GST पंजीकरण मात्र से किसी व्यक्ति को फर्जी लाभार्थी घोषित नहीं किया जा सकता। अंतिम निर्णय पात्रता मानदंड और सत्यापन के आधार पर होगा।
कई सरकारी डेटाबेस का किया जा रहा इस्तेमाल 
राशन व्यवस्था में संभावित गड़बड़ियों की पहचान के लिए सरकार केवल राशन कार्ड के रिकॉर्ड पर निर्भर नहीं है। विभिन्न सरकारी डेटाबेस के बीच रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में आधार, आयकर विभाग/CBDT, GST/CBIC, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय और वाहन संबंधी सरकारी रिकॉर्ड जैसे स्रोतों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य डुप्लीकेट, मृत व्यक्ति के नाम पर जारी कार्ड, लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहे कार्ड और संभावित रूप से पात्रता से बाहर हो चुके लाभार्थियों की पहचान करना है।
पहले भी हटाए जा चुके हैं करोड़ों अपात्र नाम
सरकार इससे पहले भी राशन डेटाबेस की सफाई कर चुकी है। 2025 में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा 2.12 करोड़ से अधिक अपात्र लाभार्थियों को हटाए जाने की जानकारी सामने आई थी। जून 2026 में भी केंद्र की ओर से बताया गया था कि राज्यों ने करीब 2.21 करोड़ अपात्र लाभार्थियों को PDS सूची से हटाया है। इससे स्पष्ट है कि मौजूदा कार्रवाई किसी एक दिन की जांच नहीं बल्कि लंबे समय से चल रहे डेटा-क्लीनअप अभियान का हिस्सा है।
सरकार को हजारों करोड़ रुपये की बचत का अनुमान
ताजा कार्रवाई के बाद संभावित रूप से अपात्र करीब 2.44 करोड़ लाभार्थियों को हटाए जाने पर सरकार को लगभग 5,800 करोड़ रुपये सालाना की खाद्य सब्सिडी बचने का अनुमान है। सरकार का तर्क है कि यदि अपात्र लाभार्थियों को सूची से हटाया जाता है तो बची हुई क्षमता का इस्तेमाल वास्तविक पात्र परिवारों को राशन उपलब्ध कराने के लिए किया जा सकता है।
नए पात्र लोगों के लिए खुल सकता है रास्ता
राशन सूची की सफाई का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अपात्र नाम हटने के बाद वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को शामिल करने की गुंजाइश बढ़ सकती है। केंद्र की ओर से पहले यह संकेत दिया गया था कि राज्यों द्वारा अपात्र नाम हटाने के बाद करीब तीन करोड़ नए राशन कार्ड जारी करने की संभावनाएं बन सकती हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी खाद्य सब्सिडी वास्तव में जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे।
78 करोड़ बनाम 81.35 करोड़ का आंकड़ा क्यों?
सरकारी मुफ्त राशन योजना के संदर्भ में 78 करोड़ और 81.35 करोड़ जैसे अलग-अलग आंकड़े भी सामने आते हैं। 81.35 करोड़ लोगों की संख्या योजना की स्वीकृत कवरेज सीमा से संबंधित है, जबकि लगभग 78 करोड़ वर्तमान लाभार्थियों के संदर्भ में इस्तेमाल किया जा रहा आंकड़ा है। इसलिए दोनों को एक ही श्रेणी का आंकड़ा मानना उचित नहीं है। राज्य सरकारों को रिकॉर्ड का सत्यापन करना होगा और उसके बाद ही पात्रता के संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
क्या बदलेगा?
सरकार के इस डेटा-आधारित अभियान से तीन प्रमुख बदलाव की उम्मीद है:
डुप्लीकेट और गलत रिकॉर्ड की पहचान बढ़ेगी।
खाद्य सब्सिडी के दुरुपयोग और लीकेज को कम करने में मदद मिल सकती है।
अपात्र नाम हटने के बाद वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को राशन सूची में शामिल करने की गुंजाइश बढ़ेगी।
निष्कर्ष
सरकारी राशन व्यवस्था में चल रही यह कार्रवाई देश के सबसे बड़े कल्याणकारी कार्यक्रमों में से एक को अधिक लक्षित और पारदर्शी बनाने की कोशिश है। 56.22 लाख आयकरदाता और 7.21 लाख GST से जुड़े लाभार्थियों का सामने आना जांच का महत्वपूर्ण संकेत जरूर है, लेकिन इन्हें सीधे 'फर्जी' कहना अभी जल्दबाजी होगी। अब असली परीक्षा राज्यों के स्तर पर होने वाले सत्यापन की होगी। यदि जांच में अपात्रता की पुष्टि होती है तो नाम हटाए जाएंगे, जबकि पात्र पाए जाने वाले परिवारों को राशन सुविधा जारी रखने का अधिकार रहेगा।