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मुरादाबाद में तेंदुओं का बढ़ता आतंक: 22 दिनों में 3 महिलाओं की मौत, 20 से ज्यादा घायल; 11 तेंदुए पकड़े गए
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में तेंदुओं की लगातार बढ़ती गतिविधियों ने ग्रामीण इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। पिछले 22 दिनों में तेंदुए के हमलों में तीन महिलाओं की मौत और 20 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। वन विभाग के मुताबिक, इलाके में 100 से अधिक तेंदुओं की मौजूदगी का अनुमान है। अब तक 11 तेंदुओं को पकड़ा जा चुका है और 29 पिंजरे लगाए गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में थर्मल ड्रोन से निगरानी के साथ वन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं।

मुरादाबाद के ग्रामीण इलाकों में दहशत
मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा, डिलारी, कांठ और छजलैट क्षेत्र के कई गांवों में पिछले कुछ सप्ताह से तेंदुओं की गतिविधियां लगातार सामने आ रही हैं। उत्तराखंड सीमा से लगे इलाकों में स्थिति ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है। लगातार हो रहे हमलों के कारण ग्रामीणों में डर का माहौल है। खेतों में काम करने, पशुओं के लिए चारा लाने और दूसरे जरूरी कामों के लिए बाहर निकलने में लोग सावधानी बरत रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 50 गांवों में तेंदुओं की मौजूदगी को लेकर चिंता बनी हुई है। कुछ इलाकों में ग्रामीणों को अकेले खेतों की ओर न जाने की सलाह दी गई है।
22 दिन में तीन महिलाओं की मौत
पिछले 22 दिनों के दौरान तेंदुए के हमलों में तीन महिलाओं की मौत की जानकारी सामने आई है। ताजा घटनाओं में बहापुर बलिया गांव की 45 वर्षीय मिथिलेश देवी की मौत की खबर सामने आई। बताया गया कि वह खेत में घास काटने गई थीं, जहां तेंदुए ने उन पर हमला किया। इसके अलावा कई अन्य ग्रामीण भी तेंदुए के हमलों में घायल हुए हैं। विभिन्न रिपोर्टों में घायलों की संख्या 20 से अधिक बताई गई है। इन घटनाओं ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के सामने मानव-वन्यजीव संघर्ष को नियंत्रित करने की चुनौती बढ़ा दी है।
100 से ज्यादा तेंदुओं की मौजूदगी का अनुमान
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, मुरादाबाद और उत्तराखंड सीमा से लगे वन क्षेत्रों में पहले से ही तेंदुओं की मौजूदगी रही है। मौजूदा हालात में इलाके में 100 से अधिक तेंदुओं की मौजूदगी का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, यह संख्या किसी ताजा पूर्ण वैज्ञानिक गणना का अंतिम आंकड़ा नहीं है। इसे क्षेत्र में तेंदुओं की गतिविधियों, कैमरा/मैदानी निगरानी और सामने आई घटनाओं के आधार पर लगाया गया अनुमान माना जाना चाहिए।
11 तेंदुए पकड़े गए, 29 पिंजरे लगाए
लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद वन विभाग ने बड़े स्तर पर रेस्क्यू और निगरानी अभियान शुरू किया है। प्रभावित क्षेत्रों में 29 पिंजरे लगाए गए हैं।
ताजा उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अभियान के दौरान 11 तेंदुओं को पकड़ा जा चुका है। अलग-अलग दिनों में जारी रिपोर्टों में पकड़े गए तेंदुओं की संख्या अलग रही है, क्योंकि अभियान लगातार जारी है। वन विभाग की टीमें संभावित संवेदनशील स्थानों पर निगरानी कर रही हैं और तेंदुओं की गतिविधियों के आधार पर पिंजरों की स्थिति भी बदली जा रही है।
थर्मल ड्रोन से निगरानी
तेंदुओं को खोजने और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग थर्मल ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। यह तकनीक रात या कम रोशनी में जानवरों की गतिविधियों का पता लगाने में मदद कर सकती है। इसके अलावा अलग-अलग जिलों से वन विभाग के विशेषज्ञों और रेस्क्यू टीमों को भी मुरादाबाद बुलाया गया है। कुछ स्थानों पर विशेषज्ञ टीमें तेंदुओं को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए अभियान चला रही हैं।
गन्ने के खेत बन रहे छिपने की जगह
वन विभाग के अनुसार, क्षेत्र में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती तेंदुओं के लिए छिपने का अनुकूल स्थान उपलब्ध कराती है। ऊंची फसल के कारण खेतों में तेंदुए को दूर से देख पाना मुश्किल हो जाता है।यही वजह है कि खेतों में काम करने वाले किसानों और ग्रामीणों का तेंदुओं से अचानक सामना होने का खतरा बढ़ जाता है।विशेषज्ञों के मुताबिक, मानव बस्तियों के आसपास प्राकृतिक आवास में बदलाव और शिकार की उपलब्धता जैसे कई कारण मानव-तेंदुआ संघर्ष को बढ़ा सकते हैं। हालांकि, किसी खास हमले के पीछे कारण का निर्धारण वन विभाग की जांच के बाद ही किया जा सकता है।
तेंदुए को पकड़ना क्यों चुनौतीपूर्ण?
DFO डॉ. विनय कुमार पांडेय के मुताबिक, तेंदुए के व्यवहार और उसकी छिपने की क्षमता के कारण उसे पकड़ना चुनौतीपूर्ण होता है। तेंदुआ घनी झाड़ियों और फसलों में आसानी से छिप सकता है और कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा सकता है। इसी कारण केवल एक स्थान पर पिंजरा लगाने से समस्या का समाधान नहीं होता। वन विभाग को तेंदुए की गतिविधि वाले क्षेत्र की पहचान कर लगातार निगरानी करनी पड़ती है।
ग्रामीणों में बढ़ी चिंता
तेंदुओं के लगातार देखे जाने और हमलों की खबरों से ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है। खेती-किसानी से जुड़े लोगों के लिए खेतों में जाना जरूरी है, लेकिन कई परिवार अब बच्चों और महिलाओं को अकेले बाहर भेजने से बच रहे हैं। कुछ गांवों में लोगों को सतर्क रहने, समूह में खेतों की ओर जाने और अंधेरे के समय अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई है।
वन विभाग के सामने दोहरी चुनौती
वन विभाग के सामने एक ओर ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर तेंदुओं को सुरक्षित तरीके से पकड़कर मानव आबादी से दूर रखना भी जरूरी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सभी तेंदुओं को केवल इसलिए पकड़ना समाधान नहीं है क्योंकि वे किसी इलाके में मौजूद हैं। कार्रवाई उन जानवरों की पहचान और रेस्क्यू पर केंद्रित होनी चाहिए जो मानव आबादी के लिए वास्तविक खतरा पैदा कर रहे हैं।
फिलहाल मुरादाबाद में अभियान जारी है। 29 पिंजरों, थर्मल ड्रोन और विशेषज्ञ टीमों की मदद से तेंदुओं की निगरानी की जा रही है। 11 तेंदुओं के पकड़े जाने के बावजूद कई इलाकों में उनकी गतिविधियां सामने आ रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में वन विभाग की कार्रवाई और क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पर नजर बनी रहेगी।
