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महिला का कंधा पकड़कर दबाना और धक्का देना ‘मॉडेस्टी भंग’ हो सकता है, लेकिन Sexual Harassment नहीं: Bombay HC
मुंबई: महिला का कंधा पकड़ना, उसे दबाना और फिर धक्का देकर अलग कर देना—क्या यह Sexual Harassment है? Bombay High Court ने इस सवाल पर अहम कानूनी अंतर स्पष्ट किया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा व्यवहार महिला की ‘मॉडेस्टी’ को ठेस पहुंचाने वाला अपराध हो सकता है, लेकिन केवल physical contact के आधार पर उसे Sexual Harassment नहीं कहा जा सकता। जब तक घटना में sexual intent, sexual overture या sexual favour से जुड़ा आवश्यक तत्व न हो, IPC की धारा 354-A लागू नहीं होगी। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि आरोपी बच जाएगा—High Court ने धारा 354 समेत अन्य आरोपों में केस जारी रखने का आदेश दिया है।

मुंबई:
किसी महिला को पकड़ना, उसका कंधा दबाना और उसे धक्का देना गंभीर आपराधिक कृत्य हो सकता है, लेकिन हर unwanted physical contact को कानून की नजर में ‘Sexual Harassment’ नहीं कहा जा सकता। Bombay High Court ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि घटना में sexual intent, sexual overture या sexual favour की मांग जैसे आवश्यक तत्व मौजूद नहीं हैं, तो IPC की धारा 354-A के तहत Sexual Harassment का अपराध नहीं बनता। हालांकि, वही घटना महिला की modesty को outrage करने वाला assault या criminal force हो सकती है और IPC की धारा 354 के तहत मामला चल सकता है। Justice Abhay J. Mantri ने 20 अगस्त 2026 को Girish Nigonda Patil v. State of Maharashtra & Anr. मामले में यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने आरोपी को पूरी राहत देने से इनकार करते हुए FIR और charge-sheet को केवल IPC Section 354-A की सीमा तक quash किया, जबकि Sections 323, 353 और 354 के तहत आपराधिक कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के मंगलवेढा क्षेत्र का है। घटना 5 फरवरी 2024 की बताई गई है। आरोप के मुताबिक आरोपी Girish Nigonda Patil Maroli Gram Panchayat कार्यालय पहुंचा था, जहां उसका महिला Block Development Officer (BDO) के साथ विवाद हुआ। आरोप है कि विवाद के दौरान आरोपी ने महिला अधिकारी के हाथ से घरकुल मंजूरी संबंधी आदेश छीन लिया, उसे फाड़कर टेबल पर फेंक दिया। इसके बाद उसने महिला का दायां कंधा पकड़ा, उसे दबाया और फिर धक्का देकर अलग कर दिया। महिला अधिकारी ने शिकायत में आरोप लगाया कि इस व्यवहार से उसे अपमान और शर्मिंदगी महसूस हुई। इसके बाद Mangalwedha Police Station में Crime No. 0090/2024 दर्ज किया गया।
किन धाराओं में दर्ज हुई FIR?
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 323, 353, 354 और 354-A के तहत मामला दर्ज किया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने charge-sheet दाखिल की और मामला Regular Criminal Case No. 198 of 2024 के रूप में आगे बढ़ा। आरोपी ने इसके बाद Bombay High Court का दरवाजा खटखटाया और FIR तथा charge-sheet को quash करने की मांग की।
20 अगस्त 2026 को क्या फैसला आया?
Justice Abhay J. Mantri की single-judge bench ने 20 अगस्त 2026 को फैसला सुनाते हुए FIR को पूरी तरह रद्द करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने माना कि उपलब्ध material को प्रथम दृष्टया देखने पर आरोपी द्वारा महिला के साथ assault/criminal force का इस्तेमाल किए जाने के पर्याप्त आधार हैं। इसलिए IPC Sections 323, 353 और 354 के तहत proceedings जारी रहेंगी। हालांकि, Section 354-A के मामले में Court ने आरोपी को राहत दी।
Section 354-A क्यों हटाई गई?
Bombay HC ने Section 354-A के statutory ingredients पर विशेष ध्यान दिया। इस provision के तहत Sexual Harassment के लिए केवल physical contact का आरोप पर्याप्त नहीं है। खास तौर पर physical contact और advances में “unwelcome and explicit sexual overtures” जैसे sexual elements होने चाहिए।
Court को इस मामले की FIR और charge-sheet में ऐसा material नहीं मिला जिससे यह प्रथम दृष्टया साबित हो कि आरोपी का conduct sexual overture या sexual favour की मांग से जुड़ा था। यही कारण रहा कि IPC Section 354-A को लागू करने के लिए आवश्यक ingredients पूरे नहीं माने गए।
लेकिन Section 354 क्यों कायम रही?
यही इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण legal distinction है। Court ने माना कि आरोपी द्वारा महिला का कंधा पकड़ना, उसे दबाना और धक्का देना केवल इस वजह से अपराध की श्रेणी से बाहर नहीं हो जाता कि उसमें sexual intent नहीं था। यदि किसी महिला पर assault या criminal force का इस्तेमाल इस तरह किया जाता है जिससे उसकी modesty outrage होती है, तो IPC Section 354 लागू हो सकती है। इसलिए Court ने Section 354-A हटाई, लेकिन Section 354 को कायम रखा। अर्थात Court का संदेश साफ है—‘Sexual Harassment’ और ‘outraging the modesty of a woman’ कानून में एक ही अपराध नहीं हैं।
महिला के बयान को गवाहों का भी समर्थन
State और शिकायतकर्ता की ओर से आरोपी की याचिका का विरोध किया गया। दलील दी गई कि FIR में घटना का स्पष्ट विवरण मौजूद है और महिला अधिकारी के बयान को मौके पर मौजूद दो गवाहों के बयानों से prima facie support मिलता है। इनमें Gram Panchayat के Sarpanch और एक peon शामिल थे। इस आधार पर High Court ने यह मानने से इनकार किया कि पूरी criminal proceedings को प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त कर दिया जाए।
आरोपी ने Supreme Court के किन फैसलों का हवाला दिया?
आरोपी की ओर से Supreme Court के Naresh Aneja alias Naresh Kumar Aneja v. State of Uttar Pradesh और Salib @ Shalu @ Salim v. State of Uttar Pradesh जैसे फैसलों का सहारा लिया गया। आरोपी का तर्क था कि Section 354 और 354-A के लिए आवश्यक ingredients इस मामले में मौजूद नहीं हैं। लेकिन Bombay HC ने मौजूदा मामले के facts को उन precedents से अलग पाया।
Naresh Aneja मामले से क्यों नहीं मिली पूरी राहत?
Bombay HC ने Naresh Aneja के Supreme Court judgment पर विचार किया, लेकिन कहा कि वहां facts अलग थे। मौजूदा मामले में FIR और eyewitness statements से prima facie महिला के खिलाफ physical force इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आती है। इसलिए Court ने माना कि आरोपी को Section 354 के आरोप से इस precedent के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती। यह distinction महत्वपूर्ण है क्योंकि Court ने Section 354-A और Section 354 को अलग-अलग statutory tests के आधार पर परखा।
Salib @ Shalu @ Salim फैसला भी चर्चा में आया
Bombay HC ने Supreme Court के Salib @ Shalu @ Salim v. State of Uttar Pradesh मामले को भी देखा। इस तरह के मामलों में अदालतें यह देखती हैं कि FIR में लगाए गए आरोप संबंधित criminal provision के आवश्यक ingredients को प्रथम दृष्टया पूरा करते हैं या नहीं। यानी केवल किसी धारा का नाम FIR में लिख देना पर्याप्त नहीं होता; allegations में उस offence के जरूरी factual ingredients दिखाई देने चाहिए।
Karnataka HC और Bombay HC के दूसरे फैसलों से भी जुड़ता है मामला
Section 354-A के interpretation को लेकर दूसरे High Court decisions में भी यह principle सामने आया है कि केवल physical contact का आरोप अपने आप Sexual Harassment का अपराध नहीं बना देता। अदालत को यह देखना होता है कि alleged physical contact में statutory provision के अनुसार sexual element और unwelcome तथा explicit sexual overture मौजूद था या नहीं। इसी legal approach के कारण मौजूदा मामले में Bombay HC ने Section 354-A को हटाया, लेकिन Section 354 को बरकरार रखा।
2024 की घटना में IPC क्यों लगी?
घटना 5 फरवरी 2024 की है, जबकि Bharatiya Nyaya Sanhita यानी BNS 1 जुलाई 2024 से लागू हुई। इसलिए FIR में IPC की धाराएं लगाई गईं। वर्तमान कानून में महिला की modesty outrage करने से संबंधित अपराध BNS की Section 74 में और Sexual Harassment से संबंधित provision BNS की Section 75 में है। BNS Section 75 में भी physical contact and advances के साथ unwelcome and explicit sexual overtures को Sexual Harassment के statutory framework में शामिल किया गया है।
कोर्ट ने पूरी FIR क्यों नहीं रद्द की?
High Court ने यह भी स्पष्ट किया कि FIR और charge-sheet को quash करने के स्तर पर Court केवल यह देखती है कि allegations और उपलब्ध material से प्रथम दृष्टया offence बनता है या नहीं। इस मामले में Sections 323, 353 और 354 के लिए Court को prima facie material मिला। इसलिए इन धाराओं के तहत trial/proceedings जारी रहेंगी। Court की observations इस stage तक सीमित हैं और इन्हें trial के अंतिम परिणाम के रूप में नहीं माना जाएगा।
फैसले का सबसे बड़ा कानूनी संदेश
इस फैसले से एक महत्वपूर्ण distinction सामने आता है: महिला के साथ physical force का इस्तेमाल होना और उस physical force का Sexual Harassment होना दो अलग कानूनी प्रश्न हैं। किसी महिला का कंधा पकड़ना, दबाना या धक्का देना facts और circumstances के आधार पर उसकी modesty outrage करने वाला अपराध हो सकता है। लेकिन Section 354-A लगाने के लिए prosecution को उस provision के specific ingredients—विशेषकर sexual overture या अन्य prescribed sexual conduct—का प्रथम दृष्टया आधार दिखाना होगा। इसलिए ‘हर physical contact = Sexual Harassment’ वाला सिद्धांत कानून की सही स्थिति नहीं है। Bombay High Court का यह फैसला महिला के साथ physical force को ‘मामूली’ बताने वाला फैसला नहीं है। Court ने स्पष्ट रूप से Section 354 के आरोप को कायम रखा है। फैसले का वास्तविक legal point यह है कि Sexual Harassment के लिए कानून में निर्धारित sexual ingredients का होना जरूरी है। वहीं, sexual intent के अभाव में भी किसी महिला के खिलाफ assault या criminal force उसके facts और circumstances के आधार पर उसकी modesty outrage करने का अपराध बन सकता है। यानी एक ही घटना में Section 354-A न बनना यह नहीं बताता कि आरोपी का conduct अपराध नहीं था। Bombay HC ने इसी अंतर को स्पष्ट करते हुए Section 354-A हटाई, लेकिन बाकी आपराधिक कार्यवाही जारी रखी।
