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‘मकान गिराया किसने?’ Status Quo के बावजूद Varanasi में Demolition पर Allahabad HC हैरान, तीन अधिकारियों के तीन दावे; एक ने माना- पुलिस बल के साथ मौके पर था

अदालत ने कहा था- ‘Status Quo बनाए रखिए’, लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद मकान गिर गया। अब जब Allahabad High Court ने पूछा कि आखिर यह demolition किसने किया, तो तीनों सरकारी अधिकारियों के जवाब सुनकर खुद कोर्ट हैरान रह गई। किसी ने demolition से इनकार किया, किसी ने कहा PWD ने कार्रवाई की, तो किसी ने दावा किया कि मकान का हिस्सा अपने आप गिर गया। लेकिन इसी बीच एक अधिकारी ने यह जरूर माना कि वह 11 जून को पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद था। अब सवाल सिर्फ मकान गिरने का नहीं, बल्कि यह है- कोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई हुई तो आखिर जिम्मेदार कौन है?

Sonali28 अग. 2026, 05:12 PM IST
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‘मकान गिराया किसने?’ Status Quo के बावजूद Varanasi में Demolition पर Allahabad HC हैरान, तीन अधिकारियों के तीन दावे; एक ने माना- पुलिस बल के साथ मौके पर था

वाराणसी के चर्चित Dalmandi इलाके में एक मकान के कथित demolition को लेकर Allahabad High Court के सामने ऐसा विरोधाभास सामने आया है, जिसने पूरी कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत के Status Quo आदेश के बावजूद 11 जून 2026 को मकान गिराए जाने का आरोप है, लेकिन अब जिन तीन अधिकारियों से जवाब मांगा गया, तीनों ने अपने-अपने हलफनामों में demolition करने से इनकार कर दिया है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इनमें से एक अधिकारी ने यह स्वीकार किया कि वह 11 जून को पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद था। उसके अनुसार वहां उसकी मौजूदगी demolition करने के लिए नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए थी।

इसी विरोधाभास पर Justice Vikas Budhwar ने 20 अगस्त 2026 के आदेश में स्थिति को “quite paradoxical and amazing” बताया। यानी अदालत के सामने सवाल अब यह है कि अगर किसी अधिकारी ने मकान नहीं गिराया, तो फिर 11 जून को कथित demolition आखिर किसने किया?

पहले समझिए- मामला शुरू कैसे हुआ?

यह विवाद Varanasi के Dalmandi इलाके में स्थित House No. 39/12 से जुड़ा है। याचिकाकर्ता Javed Alam ने 15 अप्रैल 2026 को जारी demolition notice को Allahabad High Court में चुनौती दी थी। यह notice U.P. Municipal Corporation Act, 1959 की Section 331(1)(2) के तहत जारी किया गया था। याचिका में demolition notice पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि मकान को पहले 30 जनवरी 2026 की जर्जर भवनों की सूची में शामिल नहीं किया गया था, लेकिन बाद में 15 अप्रैल को demolition notice जारी कर दिया गया। मामला सुनवाई के लिए High Court पहुंचा और अदालत ने demolition की कार्रवाई पर हस्तक्षेप करते हुए authorities से inspection report और कार्रवाई का आधार स्पष्ट करने को कहा।

30 अप्रैल 2026: High Court ने लगाई Status Quo की रोक

मामले में 30 अप्रैल 2026 को Allahabad High Court ने Nagar Nigam से उस inspection report को पेश करने को कहा, जिसके आधार पर demolition notice जारी किया गया था। अदालत ने अगली सुनवाई तक Status Quo बनाए रखने और मकान को गिराने की कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था। यही आदेश आगे चलकर contempt proceedings की पूरी कहानी का आधार बना।

7 मई 2026: Court ने Fresh Inspection का आदेश दिया

इसके बाद 7 मई 2026 को Writ-C No. 16633 of 2026 में अदालत ने मामले की प्रक्रिया को नए सिरे से करने का निर्देश दिया। Court ने पाया कि पहले inspection process में पर्याप्त safeguards नहीं थे। इसलिए fresh inspection के लिए नई committee बनाने का निर्देश दिया गया। इस committee में independent architect, Executive Engineer और दूसरे State department के Executive Engineer को शामिल किया जाना था। इसके बाद fresh inspection report तैयार की जानी थी और property owner को fresh notice देकर objection दाखिल करने का अवसर दिया जाना था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि यह प्रक्रिया पूरी होने तक parties को Status Quo बनाए रखना था। यही वह judicial protection थी जिसके उल्लंघन का आरोप बाद में लगाया गया।

15 मई 2026: नई Inspection Committee बनी

7 मई के आदेश के बाद Municipal Commissioner ने 15 मई को fresh inspection committee गठित की। इसमें Varanasi Municipal Corporation के Executive Engineer, Public Works Department के Executive Engineer और Varanasi Development Authority की approved list में शामिल independent registered architect को शामिल किया गया। Committee ने property का निरीक्षण किया और बाद में building की condition को लेकर अपनी report दी।

26 मई 2026: Fresh Demolition Notice

Authorities के affidavit के अनुसार fresh inspection के बाद 26 मई को Section 331(1)(2) के तहत नया notice जारी किया गया। Municipal Corporation का दावा था कि inspection में building को बेहद जर्जर और खतरनाक पाया गया था। लेकिन property owner की ओर से इसका विरोध किया गया और objection दाखिल किया गया।

1 जून 2026: Property Owner ने दाखिल किया Objection

Javed Alam के अनुसार उसने 1 जून 2026 को competent authority के सामने अपना objection दाखिल किया। उसका आरोप है कि objection पर फैसला किए बिना ही 11 जून को मकान के खिलाफ demolition action कर दिया गया। यही आरोप contempt proceedings में सबसे महत्वपूर्ण बन गया।

11 जून 2026: कथित Demolition ने खड़ा किया बड़ा सवाल

Applicant का कहना है कि 11 जून 2026 को उसके premises को forcibly demolish कर दिया गया। लेकिन authorities की ओर से इस आरोप पर कोई एक समान explanation सामने नहीं आया। इसके बजाय तीन अलग-अलग affidavits में तीन अलग-अलग explanations सामने आए।

पहला दावा: Municipal Corporation ने demolition नहीं किया

एक अधिकारी ने कहा कि Municipal Commissioner ने 15 मई को committee बनाई थी और inspection के बाद fresh notice जारी किया गया था। लेकिन उनका कहना था कि Municipal Corporation की ओर से demolition action नहीं किया गया। उनके अनुसार demolition किसी दूसरे department द्वारा किया गया था।

दूसरा दावा: PWD ने कार्रवाई की, अधिकारी सिर्फ Police Force के साथ मौजूद था

दूसरे अधिकारी ने कहा कि 11 जून की कार्रवाई Public Works Department द्वारा Dalmandi Road को widen और strengthen करने के उद्देश्य से की गई थी।

लेकिन इस अधिकारी ने एक महत्वपूर्ण बात स्वीकार की। उसने माना कि वह 11 जून को मौके पर मौजूद था और उसके साथ police force भी थी। उसका कहना था कि उसकी मौजूदगी केवल area में peace and tranquility यानी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए थी। यहीं से High Court का सवाल और गंभीर हो गया।

तीसरा दावा: मकान का हिस्सा खुद गिर गया

तीसरे अधिकारी ने अलग explanation दिया। उनका कहना था कि road construction के लिए कुछ हिस्सों को हटाया गया था, लेकिन applicant के हिस्से को demolish नहीं किया गया। उनके अनुसार applicant से संबंधित हिस्सा पहले से जर्जर और खाली था तथा वह अपने आप गिर गया।

‘यह Paradoxical और Amazing है’: Court की सख्त टिप्पणी

तीनों affidavits को देखने के बाद Justice Vikas Budhwar ने इस contradiction पर गंभीर टिप्पणी की। Court ने गौर किया कि एक ओर सभी संबंधित authorities demolition करने से इनकार कर रही हैं, लेकिन दूसरी ओर एक अधिकारी ने स्वयं यह स्वीकार किया है कि वह 11 जून को मौके पर police force के साथ मौजूद था।

Court ने इसी स्थिति को “quite paradoxical and amazing” कहा। अदालत का सवाल मूल रूप से यही है कि यदि demolition किसी ने नहीं किया, तो फिर applicant के अनुसार demolition exercise कैसे हुई और मौके पर मौजूद अधिकारी की भूमिका क्या थी?

24 जून से शुरू हुई जवाबदेही की प्रक्रिया

11 जून की कथित कार्रवाई के बाद मामला contempt proceedings में पहुंचा। 24 जून 2026 की कार्यवाही में Court के सामने यह बात रखी गई कि petitioner ने 1 जून को अपना reply/objection दाखिल किया था, लेकिन उस पर फैसला होने से पहले ही कथित demolition कर दिया गया। Court ने State counsel से instructions लेने को कहा। इसके बाद मामला आगे की सुनवाई के लिए लगाया गया।

29 जुलाई: Court ने पूछा- आखिर Demolition किसने किया?

29 जुलाई 2026 की कार्यवाही इस मामले में बेहद अहम रही। Court ने Standing Counsel को District Administration से विशेष रूप से यह पता करने को कहा कि 11 जून को demolition District Administration द्वारा किया गया था या नहीं। इसके साथ ही संबंधित opposite parties से independent affidavits मांगे गए।

यानी Court अब सिर्फ demolition हुआ या नहीं, इस सवाल तक सीमित नहीं था, बल्कि यह जानना चाहती थी कि यदि कार्रवाई हुई तो उसकी जिम्मेदारी किस authority की थी।

20 अगस्त 2026: तीनों affidavits पर Court ने उठाए सवाल

20 अगस्त 2026 को Justice Vikas Budhwar के सामने contempt matter फिर आया। तीनों authorities के affidavits रिकॉर्ड पर थे। इन affidavits को पढ़ने के बाद Court ने contradiction को रेखांकित किया और कहा कि स्थिति “paradoxical and amazing” है। Court ने applicant को तीनों affidavits का जवाब दाखिल करने का मौका दिया। अदालत ने अभी यह अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है कि किस अधिकारी या department ने contempt किया या Status Quo order का जानबूझकर उल्लंघन किया। मामला अभी जांच और जवाब के चरण में है।

अगली सुनवाई कब?

Allahabad High Court ने मामले को 22 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। इस तारीख पर applicant की ओर से तीनों affidavits के जवाब के बाद Court आगे यह तय कर सकती है कि 11 जून की कार्रवाई की वास्तविक प्रकृति और जिम्मेदारी क्या थी।

Dalmandi Road Widening Project भी है पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में

Dalmandi क्षेत्र में road widening और strengthening project इस पूरे विवाद का एक महत्वपूर्ण background है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार Dalmandi corridor को Beniyabagh से Kashi Vishwanath Temple की ओर जाने वाले route के रूप में विकसित और चौड़ा करने की योजना से कई properties और structures का मामला जुड़ा है। इसी road work को लेकर एक अधिकारी ने 11 जून की कार्रवाई को PWD की road widening exercise से जोड़ा है। हालांकि, Javed Alam के contempt case में यह अलग से तय किया जाना बाकी है कि 11 जून को उसके premises के साथ वास्तव में क्या कार्रवाई हुई और क्या वह 7 मई के Status Quo आदेश के दायरे में आती थी।

Dalmandi से जुड़ा एक अलग बड़ा कानूनी विवाद भी

Dalmandi road project से जुड़े broader legal issues पर भी Allahabad High Court में अलग proceedings हुई हैं। 2 जुलाई 2026 को Justice J.J. Munir और Justice Arun Kumar की Division Bench ने एक अलग मामले में Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991 की व्याख्या करते हुए कहा था कि यह कानून public purpose के लिए religious property के lawful acquisition पर पूर्ण रोक नहीं लगाता, बशर्ते acquisition कानून के अनुसार हो। हालांकि, इस मामले को Javed Alam के contempt proceedings से अलग समझना जरूरी है। दोनों मामलों की factual और legal issues अलग हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल- ‘मकान गिराया किसने?’

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है। एक तरफ petitioner का आरोप है कि 11 जून को उसके premises को court के Status Quo order के बावजूद गिराया गया। दूसरी तरफ authorities में से कोई भी demolition की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं कर रहा। एक अधिकारी कहता है कि Municipal Corporation ने demolition नहीं किया। दूसरा कहता है कि PWD ने road widening के लिए कार्रवाई की, लेकिन वह खुद police force के साथ मौके पर था। तीसरा कहता है कि applicant का हिस्सा demolish नहीं किया गया बल्कि जर्जर हिस्सा खुद गिर गया। यही विरोधाभासी versions अब High Court के सामने हैं।

यह मामला केवल एक मकान के demolition का विवाद नहीं रह गया है। अब यह सवाल अदालत के आदेश के पालन, सरकारी agencies के बीच coordination और अधिकारियों की accountability से भी जुड़ गया है। सबसे अहम बात यह है कि High Court ने अभी किसी अधिकारी को contempt का दोषी घोषित नहीं किया है। Court ने केवल affidavits में मौजूद विरोधाभास पर सवाल उठाए हैं और applicant को अपना जवाब दाखिल करने का अवसर दिया है। अब 22 सितंबर की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उसी के बाद यह तस्वीर और साफ हो सकती है कि 11 जून को Dalmandi में वास्तव में क्या हुआ था और Status Quo order के बावजूद हुई कथित कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी थी।