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NLSIU Convocation Cancelled: CJI सूर्यकांत को सार्वजनिक न्योता देने की मांग पर नहीं बनी सहमति, 2026 बैच का दीक्षांत समारोह रद्द

बेंगलुरु की प्रतिष्ठित NLSIU का 2026 Convocation अब विवादों के बीच रद्द हो गया है। CJI सूर्यकांत की मौजूदगी को लेकर छात्रों और विश्वविद्यालय के बीच सहमति बनाने की कोशिश हुई, लेकिन बाद में उन्हें सार्वजनिक रूप से आमंत्रित करने की शर्त पर बात अटक गई। छात्रों के मुताबिक, इस मुद्दे पर सर्वसम्मति नहीं बन पाई, जिसके बाद 12 सितंबर को होने वाला दीक्षांत समारोह रद्द कर दिया गया। हालांकि, विश्वविद्यालय ने आधिकारिक तौर पर इसकी वजह “unavoidable circumstances” बताई है।

Sonali28 अग. 2026, 05:13 PM IST
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NLSIU Convocation Cancelled: CJI सूर्यकांत को सार्वजनिक न्योता देने की मांग पर नहीं बनी सहमति, 2026 बैच का दीक्षांत समारोह रद्द

बेंगलुरु स्थित National Law School of India University (NLSIU) का 2026 graduating batch का 34वां Annual Convocation अब आयोजित नहीं होगा। विश्वविद्यालय ने 27 अगस्त 2026 को समारोह रद्द करने की घोषणा की। आधिकारिक तौर पर NLSIU ने इसके पीछे “unavoidable circumstances” को कारण बताया है। हालांकि, छात्रों की ओर से साझा की गई विस्तृत टाइमलाइन के अनुसार, CJI सूर्यकांत की मौजूदगी को लेकर पहले सहमति बनाने की कोशिश हुई और बाद में उन्हें सार्वजनिक रूप से आमंत्रित करने की शर्त सामने आई। इस प्रस्ताव पर सभी graduating programmes में सर्वसम्मति नहीं बन सकी और इसके बाद समारोह रद्द कर दिया गया।

12 सितंबर को होना था Convocation

NLSIU ने 3 अगस्त को graduating students को सूचित किया था कि 2026 बैच का दीक्षांत समारोह 12 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। छात्रों ने इसके आधार पर यात्रा और रहने की व्यवस्था भी शुरू कर दी थी। लेकिन 27 अगस्त को विश्वविद्यालय ने छात्रों को बताया कि 34वां Annual Convocation आयोजित नहीं किया जाएगा। इसके बजाय आवश्यक मंजूरियों के बाद छात्रों को डिग्रियां “in absentia” प्रदान की जाएंगी। छात्र कैंपस से अपनी डिग्री प्राप्त कर सकेंगे या उसे कूरियर के माध्यम से मंगवा सकेंगे।

700 से अधिक छात्रों और alumni ने जताई थी आपत्ति

इस विवाद की पृष्ठभूमि अगस्त में सामने आए एक अन्य घटनाक्रम से जुड़ी है। 15 अगस्त को NLSIU समुदाय के 700 से अधिक सदस्यों ने एक बयान पर हस्ताक्षर किए थे।

छात्रों द्वारा साझा आंकड़ों के अनुसार, इसमें 165 graduating students, 409 current students और 128 alumni शामिल थे।  बयान में CJI सूर्यकांत और Bar Council of India (BCI) Chairman Manan Kumar Mishra की प्रस्तावित मौजूदगी पर आपत्ति जताई गई थी। छात्रों की नाराजगी का एक बड़ा कारण NALSAR University of Law, Hyderabad से जुड़ा विवाद था।

NALSAR विवाद से कैसे जुड़ा मामला?

NALSAR के 2026 graduating batch के छात्रों ने CJI सूर्यकांत को Convocation Chief Guest बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी। छात्रों ने CJI से जुड़ी कुछ नीतिगत और संस्थागत चिंताओं को उठाते हुए उनकी प्रस्तावित मौजूदगी पर पुनर्विचार की मांग की थी। इसके बाद 13 अगस्त को BCI ने NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के enrolment को रोकने की घोषणा की। हालांकि, कुछ ही घंटों में BCI ने अपना फैसला वापस ले लिया। इस घटनाक्रम के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार तथा BCI की कार्रवाई को लेकर सवाल उठे। यही घटनाक्रम बाद में NLSIU के छात्रों की आपत्तियों की पृष्ठभूमि बना।

NLSIU के छात्रों ने CJI और BCI चेयरमैन की मौजूदगी पर उठाए सवाल

15 अगस्त के बयान में NLSIU समुदाय के सदस्यों ने CJI सूर्यकांत और BCI Chairman Manan Kumar Mishra की Convocation में मौजूदगी पर आपत्ति जताई।

छात्रों की ओर से BCI से NALSAR मामले में माफी की मांग भी की गई थी। यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि छात्रों की आपत्ति केवल CJI सूर्यकांत तक सीमित नहीं थी। BCI Chairman Manan Kumar Mishra की प्रस्तावित मौजूदगी भी विवाद का हिस्सा थी।

CJI सूर्यकांत NLSIU के Chancellor हैं

CJI सूर्यकांत NLSIU के Chancellor हैं। छात्रों के साथ विवाद सुलझाने की कोशिश के तहत 17 अगस्त को उन्हें छात्रों से मिलने की जानकारी दी गई। छात्रों की साझा टाइमलाइन के मुताबिक, इसके बाद CJI और graduating batches के बीच बैठक हुई, जिसमें छात्रों की स्थिति और उनकी आपत्तियों को समझने की कोशिश की गई।

23 अगस्त को हुआ मतदान

बैठक के बाद छात्रों से पूछा गया कि क्या वे CJI सूर्यकांत की मौजूदगी में होने वाले Convocation में शामिल होंगे और समारोह के दौरान कोई विरोध या व्यवधान नहीं करेंगे।

छात्रों के अनुसार, उस समय CJI के बिना समारोह आयोजित करने या Convocation के दौरान व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की अनुमति देने का विकल्प नहीं दिया गया था।

साथ ही छात्रों को यह आश्वासन दिया गया कि BCI Chairman Manan Kumar Mishra समारोह में शामिल नहीं होंगे। 23 अगस्त को हुए मतदान में इस व्यवस्था को बहुमत मिला। छात्रों का कहना है कि इस समर्थन का एक कारण यह भी था कि उनके सामने विकल्प मूल रूप से Convocation को स्वीकार करने या उसके रद्द होने के रूप में था।

25 अगस्त को सामने आई नई शर्त

छात्रों की साझा टाइमलाइन के अनुसार, 25 अगस्त को उन्हें बताया गया कि Convocation आयोजित करने के लिए केवल CJI की मौजूदगी स्वीकार करना पर्याप्त नहीं होगा।

इसके लिए छात्रों को CJI सूर्यकांत को सार्वजनिक रूप से आमंत्रित करने वाला बयान भी जारी करना होगा। सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह बताई गई कि इस सार्वजनिक निमंत्रण के लिए सभी चार graduating programmes की पूर्ण सहमति जरूरी होगी। छात्रों के मुताबिक, पहले हुई बातचीत में ऐसी किसी public invitation को समारोह की पूर्व शर्त के रूप में नहीं बताया गया था। इसलिए चारों graduating programmes में इस मुद्दे पर दोबारा चर्चा हुई।

BA LLB (Hons.) ने public invitation का विरोध किया

छात्रों के अनुसार, B.A., LL.B. (Hons.) programme ने CJI को सार्वजनिक रूप से आमंत्रित करने वाला बयान जारी करने के प्रस्ताव का विरोध किया। इसके पीछे छात्रों ने कई कारण बताए। इनमें public invitation की मांग अचानक सामने आना, बयान में यह उल्लेख नहीं करने की शर्त कि Manan Kumar Mishra समारोह में शामिल नहीं होंगे और बयान जारी होने से पहले उसके vetting की बात शामिल थी। इस विरोध के कारण सभी graduating programmes के बीच आवश्यक unanimity नहीं बन सकी।

27 अगस्त को Convocation रद्द

जब public invitation के मुद्दे पर सभी programmes की पूर्ण सहमति नहीं बन सकी, तब 27 अगस्त को NLSIU ने graduating batches को बताया कि इस साल Convocation आयोजित नहीं किया जाएगा। हालांकि, विश्वविद्यालय के आधिकारिक नोटिस में CJI को निमंत्रण देने या छात्रों के विरोध को Convocation रद्द करने का कारण नहीं बताया गया है। NLSIU ने आधिकारिक तौर पर केवल “unavoidable circumstances” का उल्लेख किया है। इसलिए यह कहना अधिक सटीक होगा कि छात्रों की टाइमलाइन के अनुसार public invitation पर consensus न बनने के बाद Convocation रद्द हुआ, जबकि विश्वविद्यालय की आधिकारिक स्थिति अलग है।

2025 में भी Convocation में शामिल हुए थे CJI सूर्यकांत

इस विवाद का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि CJI सूर्यकांत इससे पहले NLSIU के Convocation में शामिल हो चुके हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 2025 के NLSIU Convocation में सूर्यकांत, जो उस समय सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश थे, समारोह में शामिल हुए थे। वहीं Manan Kumar Mishra ने welcome address दिया था। इस पृष्ठभूमि में 2026 के Convocation को लेकर छात्रों की आपत्ति और अधिक चर्चा में आई।

अब छात्रों को मिलेगी डिग्री

Convocation रद्द होने के बावजूद 2026 graduating batch की डिग्रियां प्रभावित नहीं होंगी। विश्वविद्यालय के अनुसार आवश्यक governing body approvals के बाद डिग्रियां छात्रों को “in absentia” प्रदान की जाएंगी। छात्र उन्हें कैंपस से प्राप्त कर सकेंगे या कूरियर के जरिए हासिल कर सकेंगे।

विवाद में सबसे अहम सवाल क्या है?

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि NLSIU की आधिकारिक घोषणा और छात्रों की ओर से साझा की गई घटनाओं में अंतर है। विश्वविद्यालय ने समारोह रद्द करने के लिए “unavoidable circumstances” का हवाला दिया है। दूसरी ओर, छात्रों की टाइमलाइन में CJI सूर्यकांत की मौजूदगी, 23 अगस्त के मतदान और 25 अगस्त को सार्वजनिक निमंत्रण की कथित नई शर्त को घटनाक्रम की महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया है। इसलिए फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि विश्वविद्यालय ने आधिकारिक तौर पर “CJI को निमंत्रण न देने” के कारण Convocation रद्द किया। इतना जरूर है कि छात्रों की ओर से सामने आए घटनाक्रम में public invitation पर consensus नहीं बनने और उसके बाद Convocation रद्द होने के बीच सीधा क्रम बताया गया है।