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Raksha Bandhan 2026: राष्ट्रपति मुर्मू से PM मोदी तक, देश के बड़े नेताओं ने दी बधाई; जानिए क्यों खास है आज का रक्षाबंधन

राखी के धागे में सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने का वादा बंधा होता है। भाई-बहन के इसी अटूट रिश्ते के पर्व रक्षाबंधन पर आज देशभर में उत्साह है। इस खास मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तक ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। अपने संदेशों में सभी ने प्रेम और विश्वास के इस पर्व के साथ महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण का संकल्प लेने का संदेश भी दिया।

Sonali28 अग. 2026, 05:13 PM IST
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Raksha Bandhan 2026: राष्ट्रपति मुर्मू से PM मोदी तक, देश के बड़े नेताओं ने दी बधाई; जानिए क्यों खास है आज का रक्षाबंधन

नई दिल्ली। 

देशभर में आज यानी शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक यह पर्व इस बार श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। नेताओं ने रक्षाबंधन को सिर्फ भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान, जिम्मेदारी, सद्भाव और सामाजिक एकजुटता का संदेश देने वाला अवसर बताया।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा- विश्वास और संवेदनशीलता पर टिके हैं रिश्ते

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश और विदेश में रहने वाले भारतीयों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन की पवित्र परंपरा प्राचीन समय से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं का हिस्सा रही है। राष्ट्रपति के अनुसार, समय के साथ यह त्योहार भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के रिश्ते का प्रतीक बनने के साथ-साथ परिवार और समाज में स्नेह, सम्मान तथा आपसी जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने वाला पर्व बन गया है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन यह याद दिलाता है कि जीवन के हर रिश्ते की नींव विश्वास, संवेदनशीलता और आपसी सहयोग पर टिकी होती है। उन्होंने लोगों से समाज और राष्ट्र की रक्षा का संकल्प लेने तथा विकसित भारत के निर्माण की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने दी सुख-शांति की शुभकामना

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी रक्षाबंधन पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कामना की कि यह पर्व लोगों के बीच प्रेम, स्नेह और एकजुटता के रिश्ते को और मजबूत करे। उन्होंने रक्षाबंधन के माध्यम से करुणा, सद्भाव और आपसी सम्मान जैसे मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया तथा सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

पीएम मोदी बोले- हमेशा मजबूत रहे प्रेम और विश्वास का रिश्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रक्षाबंधन के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पावन पर्व सभी के जीवन में खुशियां, समृद्धि और सफलता लेकर आए। प्रधानमंत्री ने भाई-बहन के बीच प्रेम, स्नेह और आपसी विश्वास के रिश्ते के हमेशा मजबूत और अटूट बने रहने की कामना की। प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट पर भी 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन की शुभकामनाओं से संबंधित संदेश दर्ज है।

ओम बिरला बोले- राखी सिर्फ धागा नहीं, जिम्मेदारी का प्रतीक

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रक्षाबंधन को भारत की समृद्ध संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने का पर्व नहीं है। यह प्रेम, विश्वास, सम्मान और जीवनभर एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की प्रतिबद्धता का उत्सव है।

ओम बिरला ने विशेष रूप से कहा कि सुरक्षा का अर्थ केवल बहनों की शारीरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं होना चाहिए। महिलाओं के सम्मान, गरिमा, अधिकारों और उनके सपनों की रक्षा भी इसी भावना का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जब समाज की हर बेटी और हर बहन सुरक्षित, सम्मानित और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकेगी, तभी राष्ट्र वास्तविक अर्थों में मजबूत और सशक्त बनेगा।

28 अगस्त को ही क्यों मनाया जा रहा है रक्षाबंधन?

रक्षाबंधन हिंदू पंचांग के श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व शुक्रवार, 28 अगस्त को पड़ रहा है। उपलब्ध पंचांग संबंधी जानकारी के अनुसार श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रही। इसी कारण 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाया जा रहा है। ध्यान देने वाली बात यह है कि रक्षाबंधन की तारीख हर वर्ष अंग्रेजी कैलेंडर में बदलती रहती है, क्योंकि इसका निर्धारण हिंदू चंद्र कैलेंडर की श्रावण पूर्णिमा के आधार पर होता है।

रक्षाबंधन की परंपरा में क्या होता है?

रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी या रक्षा सूत्र बांधती हैं। इसके बाद भाई की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की जाती है। भाई भी अपनी बहन के प्रति प्रेम, सहयोग और सुरक्षा का संकल्प लेते हैं तथा उपहार देते हैं। हालांकि आधुनिक समय में इस पर्व का अर्थ और व्यापक हुआ है। अब इसे केवल भाई द्वारा बहन की रक्षा के वादे के रूप में नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच समान रूप से प्रेम, सम्मान, सहयोग और जिम्मेदारी के रिश्ते के रूप में भी देखा जाता है।

रक्षाबंधन से जुड़े हैं कई क्षेत्रीय पर्व

श्रावण पूर्णिमा का दिन भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा है। कई समुदायों में इस दिन विशेष पूजा-पाठ, दान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। पश्चिमी भारत में इसी पूर्णिमा के आसपास नारली पूर्णिमा की परंपरा भी जुड़ी हुई है, जबकि कुछ समुदायों में उपाकर्म जैसे धार्मिक संस्कार किए जाते हैं।

रक्षाबंधन का बदलता संदेश

आज रक्षाबंधन का संदेश पारंपरिक भाई-बहन के रिश्ते से आगे बढ़ चुका है। यह पर्व परिवार में विश्वास और संवाद मजबूत करने, महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा, तथा समाज में आपसी सहयोग और सद्भाव की भावना को बढ़ाने का अवसर भी बन गया है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष के इस वर्ष के संदेशों में भी इसी व्यापक भावना पर जोर दिया गया है—रिश्तों में प्रेम और विश्वास के साथ समाज में सम्मान, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना।