law-order

162 साल बाद AAWI को मिलेगी पहली महिला अध्यक्ष, हर तीसरे कार्यकाल में महिलाओं के लिए आरक्षित होगा पद

162 साल के लंबे इतिहास में पहली बार बॉम्बे हाईकोर्ट की प्रतिष्ठित Advocates’ Association of Western India (AAWI) की कमान किसी महिला अधिवक्ता के हाथों में जाने वाली है। एसोसिएशन ने अपने संविधान में बड़ा बदलाव करते हुए President का पद महिलाओं के लिए आरक्षित करने का फैसला किया है। खास बात यह है कि यह सिर्फ एक बार का फैसला नहीं, बल्कि हर तीन चुनाव में एक बार महिला वकील के लिए President का पद आरक्षित रहेगा। यानी अब AAWI के इतिहास में पहली महिला अध्यक्ष का रास्ता साफ हो गया है।

Sonali29 अग. 2026, 12:07 PM IST
खबर शेयर करें:
162 साल बाद AAWI को मिलेगी पहली महिला अध्यक्ष, हर तीसरे कार्यकाल में महिलाओं के लिए आरक्षित होगा पद

बॉम्बे हाईकोर्ट की 162 साल पुरानी Advocates’ Association of Western India (AAWI) अब अपने इतिहास में पहली बार किसी महिला अधिवक्ता को अध्यक्ष बनाने जा रही है। एसोसिएशन ने अपने संविधान और नियमों में अहम संशोधन करते हुए अध्यक्ष का पद महिलाओं के लिए आरक्षित करने का फैसला किया है। यह आरक्षण हर तीन चुनावों में एक बार लागू होगा। यानी अगले चुनाव में AAWI की कमान पहली बार किसी महिला वकील के हाथ में होगी।

सुप्रीम कोर्ट के महिला आरक्षण वाले निर्देशों की पृष्ठभूमि में अहम फैसला

AAWI का यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश की अदालतों में बार एसोसिएशनों और बार काउंसिलों में महिला अधिवक्ताओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल के वर्षों में बार निकायों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक की जिला बार एसोसिएशनों में गवर्निंग काउंसिल के स्तर पर महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण का निर्देश दिया था। इसके बाद राज्य बार काउंसिलों में भी महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर इसी तरह की व्यवस्था पर जोर दिया गया। ऐसे में AAWI का फैसला महिला वकीलों को सिर्फ प्रतिनिधित्व देने के बजाय नेतृत्वकारी पदों तक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

21 अगस्त की विशेष आमसभा में सर्वसम्मति से हुआ फैसला

AAWI के इस ऐतिहासिक फैसले को 21 अगस्त 2026 को हुई विशेष आमसभा की बैठक में सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। इससे पहले 9 अगस्त को एक Constitutional Amendment Committee गठित की गई थी, जिसने एसोसिएशन के नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए बदलावों की सिफारिश की थी। AAWI की स्थापना 1864 में हुई थी और यह भारत के सबसे पुराने बार एसोसिएशनों में से एक है। एसोसिएशन के मुताबिक, अपने 162 साल के इतिहास में अब तक कोई महिला अध्यक्ष के पद पर नहीं रही है।

हर तीसरे चुनाव में महिला होगी अध्यक्ष

संशोधित नियमों के अनुसार अध्यक्ष का पद हर तीसरे कार्यकाल में महिला सदस्य के लिए आरक्षित रहेगा। दो कार्यकाल सामान्य रहेंगे और तीसरे कार्यकाल में अध्यक्ष पद पर केवल महिला सदस्य का चुनाव होगा। यह व्यवस्था अगले चुनाव से प्रभावी होगी। रिपोर्टों के मुताबिक, आरक्षित अध्यक्ष पद के लिए महिला उम्मीदवार के पास कम से कम 20 वर्ष की कानूनी प्रैक्टिस होना जरूरी होगा।

सचिव पद पर भी महिलाओं के लिए आरक्षण

सिर्फ अध्यक्ष पद ही नहीं, AAWI ने नेतृत्व के दूसरे महत्वपूर्ण पदों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का फैसला किया है। दो गैर-आरक्षित राष्ट्रपति कार्यकालों में से पहले कार्यकाल के दौरान सचिव का पद महिला सदस्य के लिए आरक्षित रहेगा। इसके अलावा संयुक्त सचिव और Executive Council में भी महिलाओं के लिए प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। Executive Council में नियमित सदस्यों की संख्या भी बढ़ाकर नौ की गई है और चार पद महिलाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। इस बदलाव के बाद कार्यकारिणी में महिलाओं की हिस्सेदारी एक-तिहाई से थोड़ी अधिक होगी।

2018 में भी AAWI ने की थी पहल

AAWI ने महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में पहली बड़ी पहल 2018 में की थी। उस समय Vice-President के एक पद और Executive Council की दो सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया था। अब अध्यक्ष पद को आरक्षित करने का फैसला उसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है।

दूसरे बार एसोसिएशनों में भी बढ़ रहा महिला प्रतिनिधित्व

AAWI का फैसला देश के अन्य बार निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर चल रही बहस के बीच आया है। हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने Oudh Bar Association में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के महिला प्रतिनिधित्व से जुड़े निर्देशों का हवाला देते हुए कहा था कि बार एसोसिएशनों में महिलाओं की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है। इस मामले में अदालत के सामने यह सवाल भी आया कि महिलाओं को केवल कुछ सीमित पदों तक क्यों रखा जाए और उन्हें President जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नेतृत्व का अवसर क्यों न मिले। इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि महिला अधिवक्ताओं का मुद्दा अब केवल सदस्यता या कार्यकारिणी में कुछ सीटों के आरक्षण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बार एसोसिएशनों के शीर्ष नेतृत्व में उनकी भागीदारी भी चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बन रही है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का असर

बार एसोसिएशनों में 30 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों ने देशभर के बार निकायों में नए बदलावों की राह खोली है। अदालतों ने इस बात पर जोर दिया है कि कानूनी पेशे में महिलाओं की संख्या बढ़ने के साथ-साथ निर्णय लेने वाली संस्थाओं में भी उनका पर्याप्त प्रतिनिधित्व होना चाहिए।

AAWI ने इसी व्यापक बदलाव के बीच अपने स्तर पर एक और कदम आगे बढ़ाते हुए President के पद के लिए rotational reservation की व्यवस्था की है। इस व्यवस्था के तहत हर तीसरे चुनाव में महिला सदस्य के लिए President का पद आरक्षित रहेगा।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया अहम कदम

वरिष्ठ अधिवक्ता दीप चावन ने इस फैसले को महत्वपूर्ण बताया है। उनके अनुसार, 162 वर्षों में पहली बार महिला के AAWI की कमान संभालने का रास्ता खुलना कानूनी पेशे में समानता की दिशा में बड़ा कदम है।

AAWI का ऐतिहासिक महत्व

AAWI की ऐतिहासिक भूमिका का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 2014 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने एसोसिएशन की 150वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक रिकॉर्ड में AAWI को देश के सबसे पुराने बार एसोसिएशनों में से एक बताया गया था और न्याय व्यवस्था में बार एसोसिएशनों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया था।

क्यों खास है यह फैसला?

AAWI का यह कदम केवल एक पद को आरक्षित करने तक सीमित नहीं है। 162 साल से पुरुष नेतृत्व वाले शीर्ष पद में पहली बार महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होने के साथ-साथ सचिव, संयुक्त सचिव और Executive Council में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई गई है। ऐसे में यह फैसला बार एसोसिएशन के नेतृत्व में gender representation को लेकर एक महत्वपूर्ण संस्थागत बदलाव माना जा सकता है। खास बात यह है कि AAWI का मॉडल केवल संख्या आधारित आरक्षण तक सीमित नहीं है। President जैसे सबसे महत्वपूर्ण पद को भी rotational basis पर महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है। इससे महिला अधिवक्ताओं को बार की निर्णय प्रक्रिया में सीधे नेतृत्व की भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।