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₹1.50 करोड़ की कथित रिश्वत से शुरू हुआ मामला, ₹40 लाख पर डील का आरोप; CGST के Additional Commissioner समेत 3 गिरफ्तार, कोर्ट ने गिरफ्तारी को माना अवैध

महाराष्ट्र के रायगढ़ में कथित रिश्वतखोरी के एक मामले ने केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) विभाग में हलचल मचा दी है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने CGST के Additional Commissioner विनय कुमार कांथेती, Superintendent राकेश कुमार सिन्हा और एक निजी व्यक्ति नरिंदर राजपूत को कथित ₹40 लाख रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया। CBI के अनुसार, एक पत्थर खनन कंपनी से जुड़े GST और रॉयल्टी विवाद को निपटाने के लिए कथित तौर पर पहले ₹1.50 करोड़ की मांग की गई थी, जिसे बातचीत के बाद ₹40 लाख किया गया। हालांकि, गिरफ्तारी के अगले दिन ठाणे की विशेष अदालत ने तीनों की गिरफ्तारी को कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं होने के कारण अवैध माना और उन्हें बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया। मामले की जांच अभी जारी है।

sd29 अग. 2026, 12:08 PM IST
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₹1.50 करोड़ की कथित रिश्वत से शुरू हुआ मामला, ₹40 लाख पर डील का आरोप; CGST के Additional Commissioner समेत 3 गिरफ्तार, कोर्ट ने गिरफ्तारी को माना अवैध

              CBI के मुताबिक, 26 अगस्त 2026 को रायगढ़ के CGST Superintendent राकेश कुमार सिन्हा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। आरोप है कि उन्होंने एक पत्थर खनन कंपनी से जुड़े GST और रॉयल्टी मामले को निपटाने के बदले ₹1.50 करोड़ की कथित रिश्वत की मांग की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, बातचीत के बाद कथित रिश्वत की रकम घटाकर ₹40 लाख कर दी गई। इसके बाद रिश्वत की रकम सीधे लेने के बजाय एक निजी व्यक्ति के जरिए लेने की व्यवस्था की गई।

₹40 लाख की रकम लेते निजी व्यक्ति को पकड़ा

CBI ने कथित रिश्वत के लेन-देन की पुष्टि के बाद ट्रैप कार्रवाई की। एजेंसी के अनुसार, निजी व्यक्ति नरिंदर राजपूत को ₹40 लाख की रकम स्वीकार करते हुए पकड़ा गया। CBI का दावा है कि इसके बाद मामले में CGST Superintendent राकेश कुमार सिन्हा और Additional Commissioner विनय कुमार कांथेती की कथित भूमिका सामने आई। इसके आधार पर दोनों अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया गया।

तलाशी में ₹43 लाख नकद और करीब ₹90 लाख के आभूषण

CBI ने आरोपियों से जुड़े परिसरों पर तलाशी भी ली। एजेंसी के अनुसार, तलाशी के दौरान ₹43 लाख अतिरिक्त नकद और करीब ₹90 लाख मूल्य के आभूषण बरामद किए गए। CBI ने इस बरामदगी को जांच का हिस्सा बताया है। इन संपत्तियों और नकदी के स्रोत तथा मामले से उनके संबंध की जांच आगे की जा रही है।

कोर्ट में पहुंचते ही बदला घटनाक्रम

गिरफ्तारी के बाद CBI ने तीनों आरोपियों को ठाणे की विशेष अदालत में पेश किया और आगे की पूछताछ के लिए पांच दिन की पुलिस हिरासत की मांग की।

हालांकि, बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। दलील दी गई कि आरोपियों को गिरफ्तारी के आधार और कारण उचित तरीके से बताए जाने का रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं है। साथ ही, उनके रिश्तेदारों को गिरफ्तारी की लिखित सूचना दिए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया गया।

अदालत ने गिरफ्तारी को माना अवैध

विशेष अदालत ने गिरफ्तारी मेमो और केस डायरी की जांच के बाद पाया कि दस्तावेजों से यह स्पष्ट नहीं होता कि आरोपियों को गिरफ्तारी के आधार और कारण सही तरीके से समझाए गए थे। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि आरोपियों के रिश्तेदारों को लिखित सूचना दिए जाने का पर्याप्त रिकॉर्ड नहीं था।

इन प्रक्रियात्मक कमियों के आधार पर अदालत ने तीनों की गिरफ्तारी को कानूनी रूप से उचित नहीं माना और CBI की आगे की कस्टडी की मांग खारिज कर दी।

₹15 हजार के बॉन्ड पर रिहाई

अदालत ने तीनों आरोपियों को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। रिपोर्टों के अनुसार, प्रत्येक आरोपी को ₹15,000 के व्यक्तिगत बॉन्ड और इतनी ही राशि की जमानत देने का निर्देश दिया गया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपियों को जांच में सहयोग करना होगा और CBI द्वारा बुलाए जाने पर जांच में उपस्थित होना होगा।

CBI के सामने अब आगे की चुनौती

कोर्ट के आदेश के बावजूद रिश्वत मामले की जांच खत्म नहीं हुई है। CBI का कहना है कि उसके पास आरोपियों की कथित भूमिका से जुड़े साक्ष्य हैं। Times of India की रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसी अदालत के आदेश को चुनौती देने पर विचार कर रही है। फिलहाल मामले में यह अंतर महत्वपूर्ण है कि CBI ने तीनों को गिरफ्तार किया था, लेकिन अदालत ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कानूनी कमियां पाए जाने के बाद उन्हें रिहा कर दिया। अदालत के इस आदेश का अर्थ यह नहीं है कि रिश्वत के आरोपों पर तीनों को दोषमुक्त कर दिया गया है। आरोपों की जांच अभी जारी है।