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नवी मुंबई में 3,400 SIR फॉर्म निजी दुकान तक कैसे पहुंचे? BJP पदाधिकारी पर FIR, 5 BLO निलंबित; चुनावी प्रक्रिया की गोपनीयता पर उठे सवाल

नवी मुंबई के खारघर में एक निजी फोटोकॉपी सेंटर से पनवेल विधानसभा क्षेत्र के करीब 3,400 SIR (Special Intensive Revision) फॉर्म मिलने के बाद चुनावी प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन के मुताबिक, बरामद दस्तावेजों में मतदाताओं की तस्वीर, निजी जानकारी और BLO के हस्ताक्षर मौजूद थे। मामले में रायगढ़ जिला प्रशासन ने पांच Booth Level Officers (BLO) को निलंबित कर दिया है, जबकि पुलिस ने BJP युवा विंग से जुड़े बताए जा रहे सूरज पाटील के खिलाफ FIR दर्ज की है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इस घटना के बाद शिवसेना (UBT), BJP और अन्य विपक्षी नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं।

sd29 अग. 2026, 12:35 PM IST
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नवी मुंबई में 3,400 SIR फॉर्म निजी दुकान तक कैसे पहुंचे? BJP पदाधिकारी पर FIR, 5 BLO निलंबित; चुनावी प्रक्रिया की गोपनीयता पर उठे सवाल

मामला नवी मुंबई के खारघर सेक्टर-19 स्थित एक निजी फोटोकॉपी सेंटर से जुड़ा है। 27 अगस्त को शिकायत मिलने के बाद चुनावी अधिकारियों ने दुकान का निरीक्षण किया। जांच के दौरान वहां SIR प्रक्रिया से जुड़े करीब 3,400 फॉर्म मिले। अधिकारियों के अनुसार, ये फॉर्म पनवेल विधानसभा क्षेत्र के 11 मतदान केंद्रों से संबंधित थे। जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में फॉर्म पांच मतदान केंद्रों से जुड़े थे, जबकि छह अन्य मतदान केंद्रों से एक-एक फॉर्म मिले थे।

रिपोर्टों में कुल संख्या कहीं 3,400 और कहीं 3,404 बताई गई है। इसलिए प्रशासनिक रिकॉर्ड के संदर्भ में खबर में करीब 3,400 फॉर्म कहना अधिक उपयुक्त है।

फॉर्म में क्या जानकारी थी?

प्रशासनिक जांच के अनुसार, बरामद दस्तावेज सामान्य खाली फॉर्म नहीं थे। इनमें मतदाताओं द्वारा दी गई जानकारी, तस्वीरें और संबंधित BLO के आधिकारिक हस्ताक्षर मौजूद थे। यही वजह है कि निजी फोटोकॉपी सेंटर में इतने बड़े पैमाने पर SIR फॉर्म मिलने को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। फिलहाल जांच का मुख्य सवाल यही है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े ये दस्तावेज निर्धारित सरकारी व्यवस्था से बाहर कैसे पहुंचे।

सूरज पाटील के खिलाफ FIR

मामले में प्रशासनिक शिकायत के आधार पर सूरज पाटील के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें BJP की युवा विंग की स्थानीय गतिविधियों से जुड़ा बताया गया है। पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 314 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 128 के तहत मामला दर्ज किया है। आरोप है कि SIR से जुड़े दस्तावेज उनके कब्जे में थे और उनकी फोटोकॉपी कराई जा रही थी। हालांकि, FIR में आरोप दर्ज होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फॉर्म उनके पास किस माध्यम से पहुंचे और उनका उद्देश्य क्या था।

5 BLO पर कार्रवाई क्यों हुई?

रायगढ़ के कलेक्टर किशन जवाले के मुताबिक, बरामद दस्तावेज संबंधित BLO की जिम्मेदारी में आने वाले मूल चुनावी दस्तावेज थे। इसी आधार पर संबंधित क्षेत्र के पांच BLO को निलंबित किया गया है। इन कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच भी की जा रही है। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि दस्तावेजों की सुरक्षा और उनके वितरण या संग्रहण की प्रक्रिया में कहां चूक हुई।

प्रशासन ने शुरू की जांच

घटना की जानकारी मिलने के बाद चुनावी अधिकारियों ने फॉर्मों को जब्त कर पुलिस को सौंप दिया। प्रशासनिक स्तर पर भी जांच शुरू की गई है।

जांच में मुख्य रूप से यह पता लगाया जा रहा है कि:

  • इतने बड़े पैमाने पर SIR फॉर्म निजी दुकान तक कैसे पहुंचे?
  • फॉर्म किसके जरिए वहां लाए गए?
  • फॉर्म की फोटोकॉपी किस उद्देश्य से कराई जा रही थी?
  • संबंधित BLO की भूमिका और जिम्मेदारी क्या थी?
  • क्या निर्धारित चुनावी प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ?
  • क्या मतदाताओं की निजी जानकारी की सुरक्षा प्रभावित हुई?

इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद सामने आएंगे।

BJP और शिवसेना (UBT) में आरोप-प्रत्यारोप

मामला सामने आने के बाद BJP और शिवसेना (UBT) कार्यकर्ताओं के बीच विवाद भी हुआ। कुछ स्थानीय नेताओं ने सवाल उठाया कि मतदाताओं द्वारा भरे गए SIR फॉर्म निजी व्यक्ति तक कैसे पहुंचे। शिवसेना (UBT) की ओर से मामले की विस्तृत जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है। विपक्षी नेताओं ने SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, स्थानीय BJP नेताओं ने पार्टी कार्यकर्ताओं का इस मामले से संबंध होने से इनकार किया है। इसलिए फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि किसी राजनीतिक दल ने चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी की है। यह पुलिस और प्रशासन की जांच का विषय है।

वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद

मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विवाद और बढ़ गया। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा फॉर्मों को कब्जे में लिया गया। घटना ने चुनावी दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आए दावों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने तक नहीं मानी जा सकती।

चुनावी प्रक्रिया की गोपनीयता पर सवाल

SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण करना है। ऐसे में मतदाताओं की निजी जानकारी वाले दस्तावेजों का सरकारी प्रक्रिया से बाहर किसी निजी स्थान पर मिलना प्रशासन के लिए गंभीर विषय है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट है कि प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पांच BLO को निलंबित किया है और पुलिस ने एक व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज की है। लेकिन दस्तावेज निजी दुकान तक पहुंचने के पीछे वास्तविक जिम्मेदारी किसकी थी और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।

अब तक की कार्रवाई

  • ब
  • रामद फॉर्म: करीब 3,400; कुछ रिपोर्टों में 3,404
  • स्थान: खारघर सेक्टर-19, नवी मुंबई
  • विधानसभा क्षेत्र: पनवेल
  • मतदान केंद्र: 11
  • FIR: सूरज पाटील के खिलाफ
  • कानूनी प्रावधान: BNS धारा 314 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 128
  • प्रशासनिक कार्रवाई: 5 BLO निलंबित
  • दस्तावेज: मतदाताओं की जानकारी और BLO के हस्ताक्षर वाले SIR फॉर्म
  • जांच: पुलिस और जिला प्रशासन दोनों स्तर पर जारी
  • राजनीतिक स्थिति: BJP और शिवसेना (UBT) के बीच आरोप-प्रत्यारोप

निष्कर्ष

नवी मुंबई के खारघर में करीब 3,400 SIR फॉर्म का निजी फोटोकॉपी सेंटर से मिलना चुनावी दस्तावेजों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला है। पांच BLO के निलंबन और सूरज पाटील के खिलाफ FIR के बाद अब जांच का केंद्र यह है कि इतने संवेदनशील दस्तावेज निजी हाथों तक कैसे पहुंचे। फिलहाल किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल को चुनावी गड़बड़ी का दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। FIR और निलंबन प्रशासनिक/कानूनी कार्रवाई हैं, जबकि अंतिम जिम्मेदारी जांच के निष्कर्ष और आगे की कानूनी प्रक्रिया से तय होगी।