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दिशा सालियान केस: FIR क्यों नहीं हुई? बॉम्बे हाईकोर्ट के सख्त सवाल, पुलिस की जांच पर उठे गंभीर प्रश्न
दिशा सालियान की मौत को लेकर 6 साल बाद फिर उठे सवालों ने मामले को सुर्खियों में ला दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान मुंबई पुलिस से सीधा सवाल किया—जब परिवार ने हत्या का शक जताया था, तो FIR दर्ज क्यों नहीं की गई? 14वीं मंजिल से गिरने, चोटों की प्रकृति, ADR जांच और परिवार को जांच से जुड़े दस्तावेज मिलने में हुई देरी जैसे मुद्दों पर कोर्ट के सख्त सवालों के बाद अब सबकी नजर हाईकोर्ट के फैसले पर है।

मुंबई:
दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत का मामला एक बार फिर बॉम्बे हाईकोर्ट में चर्चा के केंद्र में है। 8 जून 2020 को मुंबई के मालाड में एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद दिशा की मौत हुई थी। पुलिस ने शुरुआत में इसे Accident Death Report (ADR) के तौर पर दर्ज किया और बाद की जांच में मौत को आत्महत्या बताया। हालांकि, दिशा के पिता सतीश सालियान ने इस निष्कर्ष पर सवाल उठाते हुए FIR दर्ज करने, मामले की नए सिरे से जांच कराने और CBI को जांच सौंपने की मांग की है। 28 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी हुई और अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया। इससे पहले हुई सुनवाई में कोर्ट ने मुंबई पुलिस से कई अहम सवाल पूछे थे, खास तौर पर इस बात पर कि जब परिवार ने हत्या का संदेह जताते हुए शिकायत दी थी तो FIR दर्ज क्यों नहीं की गई।
‘जब कोई संदेह जता रहा है तो FIR दर्ज करने से आपको क्या रोकता है?’
3 अगस्त 2026 की सुनवाई में जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजुषा देशपांडे की पीठ ने मुंबई पुलिस से पूछा था कि जब दिशा के पिता ने हत्या का संदेह जताया था तो FIR दर्ज कर कानून के मुताबिक जांच करने में क्या बाधा थी। Report के अनुसार, अदालत ने मौखिक टिप्पणी में पूछा कि जब कोई व्यक्ति संदेह जता रहा है तो पुलिस को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए FIR दर्ज करने से क्या रोकता है। याचिकाकर्ता के वकील निलेश ओझा ने अदालत के सामने दावा किया कि पुलिस ने FIR दर्ज करने के बजाय केवल ADR दर्ज की और बाद में मौत को आत्महत्या बताया। उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच से जुड़े दस्तावेज परिवार को देर से उपलब्ध कराए जाने का भी मुद्दा उठाया।
14वीं मंजिल से गिरने पर चोटों को लेकर भी सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह सवाल भी उठा कि यदि दिशा 14वीं मंजिल से गिरी थीं तो उनके शरीर पर चोटों की प्रकृति क्या थी और क्या वे कथित गिरने की परिस्थितियों से मेल खाती हैं। याचिकाकर्ता की ओर से पेश सामग्री में शरीर के कथित तौर पर अपेक्षाकृत कम दिखाई देने वाले बाहरी चोटों और शव के इमारत से लगभग 10 फीट दूर पाए जाने जैसे बिंदुओं पर सवाल उठाए गए। हालांकि, ये याचिकाकर्ता की ओर से उठाए गए दावे हैं और अदालत ने इन तथ्यों को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं किया है। 28 अगस्त की सुनवाई में भी पीठ ने चोटों, कपड़ों और पंचनामा सहित मामले के विभिन्न पहलुओं पर सवाल किए। राज्य की ओर से कहा गया कि पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक सामग्री के आधार पर किसी तरह की गड़बड़ी या यौन अपराध का निष्कर्ष नहीं निकलता।
पुलिस का क्या कहना है?
महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश मुख्य लोक अभियोजक शिशिर हिराय ने अदालत को बताया कि शुरुआती जांच के बाद जब मामले को लेकर आपत्ति उठी तो सरकार ने दोबारा जांच कराई। पुलिस के मुताबिक CCTV फुटेज की जांच की गई और छह लोगों के बयान दर्ज किए गए, लेकिन किसी ने भी हत्या या अन्य गड़बड़ी की बात नहीं कही।
राज्य का कहना है कि दो अलग-अलग जांचों के निष्कर्ष एक-दूसरे के अनुरूप रहे और उपलब्ध सामग्री से आत्महत्या के निष्कर्ष को समर्थन मिलता है।
SIT रिपोर्ट को भी पिता ने नकारा
मुंबई पुलिस की Special Investigation Team (SIT) ने भी कथित तौर पर पहले की जांच के निष्कर्षों के अनुरूप रिपोर्ट दी थी। लेकिन दिशा के पिता सतीश सालियान ने इस रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि उन्हें पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है और वह अदालत के सामने अपनी ओर से साक्ष्य और आपत्तियां रखेंगे।
पांच साल तक जांच और दस्तावेजों को लेकर भी सवाल
दिशा के पिता की याचिका 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंची। इससे पहले नवंबर 2025 में भी हाईकोर्ट ने पुलिस से पूछा था कि दिशा की मौत के पांच साल बाद भी जांच पूरी क्यों नहीं हुई। उस समय जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस रंजितसिंह भोंसले की पीठ ने यह जानना चाहा था कि पुलिस को यह निर्धारित करने में इतना समय क्यों लग रहा है कि मौत आत्महत्या थी, हत्या थी या कोई अन्य आपराधिक घटना। अदालत ने परिवार को बुनियादी दस्तावेज उपलब्ध कराने में भी कठिनाई पर सवाल उठाया था।
ADR की जांच इतने लंबे समय तक क्यों चली?
28 अगस्त की सुनवाई में पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि अगर पुलिस को शुरू से किसी आपराधिक साजिश या हत्या का संदेह नहीं था तो ADR के तहत जांच इतने वर्षों तक क्यों चलती रही। Times of India के मुताबिक, कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि यदि पुलिस को कोई संदेह नहीं था तो वर्षों तक जांच जारी रखने की आवश्यकता क्यों पड़ी। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि उसका ध्यान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर नहीं बल्कि कानून के अनुसार जांच और परिवार को न्यायिक रूप से उचित समाधान उपलब्ध कराने पर है।
2023 में दोबारा शुरू हुई थी जांच
मामले में शुरुआती ADR जांच के बाद दोबारा जांच का मुद्दा भी सामने आया। राज्य के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार के निर्देश पर दिसंबर 2022 के बाद मामले की पुनः जांच की गई और 2023 में SIT ने भी मामले की जांच की। पुलिस का कहना है कि CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक सामग्री की जांच के बाद भी हत्या या किसी अन्य आपराधिक घटना का प्रमाण नहीं मिला।
हाईकोर्ट में याचिका कैसे पहुंची?
दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पुलिस की जांच पर सवाल उठाए। उन्होंने अपनी बेटी की मौत को आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए FIR दर्ज करने और स्वतंत्र जांच की मांग की। याचिका में CBI जांच की मांग भी की गई। इसी दौरान याचिका में कुछ प्रभावशाली लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन इन आरोपों की अदालत ने अभी पुष्टि नहीं की है। इसलिए इन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान बदली बेंच
इस मामले की सुनवाई के दौरान जून 2026 में जस्टिस आशीष चव्हाण ने मामले से खुद को अलग कर लिया था। इसके बाद मामले की सुनवाई दूसरी पीठ के समक्ष आगे बढ़ी।
अगस्त की शुरुआती सुनवाई में जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजुषा देशपांडे की पीठ ने FIR और जांच की प्रक्रिया पर सवाल किए, जबकि 28 अगस्त की अंतिम सुनवाई में जस्टिस सारंग वी. कोतवाल और जस्टिस रंजितसिंह भोंसले की पीठ ने मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा।
पहले भी खारिज हो चुकी है CBI जांच की मांग
यह पहली बार नहीं है जब दिशा सालियान की मौत की CBI जांच का मुद्दा अदालत पहुंचा हो। 2020 में भी एक PIL के जरिए CBI जांच की मांग की गई थी। उस समय बॉम्बे हाईकोर्ट ने PIL को सुनवाई योग्य नहीं माना था और कहा था कि यदि किसी व्यक्ति के पास किसी तरह की गड़बड़ी की जानकारी है तो वह कानून के मुताबिक संबंधित प्रक्रिया अपना सकता है।
अब हाईकोर्ट के फैसले पर नजर
28 अगस्त 2026 को तीन दिन चली सुनवाई के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने सतीश सालियान की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। अब अदालत को यह तय करना है कि मामले में FIR दर्ज करने, स्वतंत्र/CBI जांच या किसी अन्य कानूनी कार्रवाई का निर्देश दिया जाए या नहीं। महत्वपूर्ण बात यह है कि हाईकोर्ट ने अभी यह निष्कर्ष नहीं दिया है कि दिशा सालियान की हत्या हुई थी। अदालत के सवाल जांच की प्रक्रिया, FIR दर्ज न करने, लंबे समय तक ADR जांच जारी रहने और उपलब्ध दस्तावेजों व परिस्थितियों की जांच से जुड़े हैं। इसलिए हत्या, गैंगरेप या किसी व्यक्ति की संलिप्तता से जुड़े दावों को फिलहाल आरोप के तौर पर ही रिपोर्ट किया जाना चाहिए।
